एमपी में सड़क हादसे में 17% बढ़ीं मौतें, पुरुषों की संख्या पांच गुना ज्यादा
Aman Vaishnav | Jul 09, 2026, 07:45 IST
एमपी में सड़क हादसे
मध्य प्रदेश में साल 2025 में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा करीब 17% बढ़ गया है। पीटीआरआई की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा मौतें ओवरस्पीडिंग और सीधी सड़कों पर हुईं। इनमें आधे से ज्यादा युवा थे।
मध्य प्रदेश में सड़क हादसों से मौत का आंकड़ा एक साल में तेजी से बढ़ा है। पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (PTRI – Police Training and Research Institute) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में प्रदेश में कुल 58 हजार 183 सड़क हादसे हुए थे। इनमें 15 हजार 976 लोगों की जान गई थी।
वहीं साल 2024 में यह आंकड़ा 13 हजार 661 मौतों का था। यानी मौतों में करीब 17% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। हादसों की संख्या में भी बढ़त देखी गई, हालांकि यह बढ़त सिर्फ 2.7% रही।
रिपोर्ट में हादसों की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार ड्राइविंग बताई गई है। अकेले ओवर स्पीडिंग से जुड़े मामलों में 12 हजार 818 मौतें दर्ज हुईं। गलत दिशा में वाहन चलाने से 713 लोगों की जान गई।
वहीं शराब पीकर गाड़ी चलाने से 271 और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल यूज करने से 112 मौतें हुईं।
चौंकाने वाला आंकड़ा हेलमेट को लेकर सामने आया है। कुल छह हजार 793 लोगों की मौत सिर्फ हेलमेट न पहनने की वजह से हुई। यह आंकड़ा बताता है कि छोटी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
![01bd3588-fe9]()
रिपोर्ट के मुताबिक शाम 6 बजे से रात 9 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। इस दौरान 12 हजार 328 हादसों में तीन हजार 711 लोगों की जान गई।
यह समय दिनभर के मुकाबले सबसे जोखिम भरा माना गया है। ऑफिस से घर लौटने और अंधेरा होने की वजह से जोखिम और बढ़ जाता है।
![1a626442-d4ef-464a-9b8a-5060551a34d4_1774267569005-378679]()
शहरों के मुकाबले गांव की सड़कों पर मौतें कहीं ज्यादा हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 11 हजार 937 लोगों की जान गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा चार हजार 39 रहा।
सीधी सड़कों पर भी हादसे ज्यादा हुए। कुल 37 हजार 116 हादसे सीधी सड़कों पर हुए, जिनमें नौ हजार 956 लोगों की मौत हुई।
इसके उलट गड्ढे वाली सड़कों पर सिर्फ 300 मौतें दर्ज हुईं। यह आंकड़ा बताता है कि खराब सड़क से ज्यादा खतरनाक तेज रफ्तार और लापरवाही है।
रिपोर्ट में एक और तथ्य सामने आया है। पांच साल से कम पुरानी गाड़ियों से 16 हजार 64 हादसे हुए। इनमें चार हजार 579 लोगों की मौत हुई। साफ मौसम में भी नौ हजार 872 मौतें दर्ज हुईं। यानी नई गाड़ी और अच्छा मौसम भी सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं देते।
![hp-kul-accident-img-7204051_01012026102322_0101f_1767243202_476-403568]()
मरने वालों में हर दूसरा व्यक्ति 18 से 35 साल की उम्र का था। 18 से 25 साल के आयु वर्ग में तीन हजार 850 मौतें हुईं। वहीं 25 से 35 साल के वर्ग में यह आंकड़ा चार हजार 301 रहा।
दोनों वर्ग मिलाकर कुल मौतों का 51% से ज्यादा हिस्सा बनते हैं। यह आंकड़ा सबसे ज्यादा चिंता की बात है, क्योंकि यही उम्र किसी परिवार की कमाई और सहारे की होती है।
कुल 15 हजार 976 मृतकों में 13 हजार541 पुरुष थे। महिलाओं की संख्या दो हजार 435 रही। यानी सड़क हादसों में पुरुषों की मौत महिलाओं के मुकाबले पांच गुना से ज्यादा रही।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसकी वजह पुरुषों का ज्यादा सफर करना और दोपहिया वाहन ज्यादा चलाना हो सकती है।
कुल मिलाकर रिपोर्ट यह साफ करती है कि हादसों की वजह सड़क की हालत से ज्यादा ड्राइविंग का तरीका है। तेज रफ्तार, हेलमेट न पहनना और लापरवाही सबसे बड़े कारण बनकर उभरे हैं।
एमपी में रोड एक्सीडेंट: नेता जी का जन्मदिन मनाकर लौट रहे 5 युवाओं की सड़क हादसे में मौत
छिंदवाड़ा-बैतूल नेशनल हाईवे पर पिकअप और ट्रक की टक्कर, तीन महिला समेत पांच की मौत
एमपी में हर घंटे हो रहे 12 एक्सीडेंट, शिकार होने वाले युवा सबसे ज्यादा
हिट एंड रन हादसों में एमपी सबसे आगे, पांच साल में 60 हजार से ज्यादा केस दर्ज
रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में प्रदेश में कुल 58 हजार 183 सड़क हादसे हुए थे। इनमें 15 हजार 976 लोगों की जान गई थी।
वहीं साल 2024 में यह आंकड़ा 13 हजार 661 मौतों का था। यानी मौतों में करीब 17% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। हादसों की संख्या में भी बढ़त देखी गई, हालांकि यह बढ़त सिर्फ 2.7% रही।
ओवरस्पीडिंग बनी सबसे बड़ी वजह
वहीं शराब पीकर गाड़ी चलाने से 271 और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल यूज करने से 112 मौतें हुईं।
चौंकाने वाला आंकड़ा हेलमेट को लेकर सामने आया है। कुल छह हजार 793 लोगों की मौत सिर्फ हेलमेट न पहनने की वजह से हुई। यह आंकड़ा बताता है कि छोटी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
01bd3588-fe9
शाम का समय सबसे खतरनाक
यह समय दिनभर के मुकाबले सबसे जोखिम भरा माना गया है। ऑफिस से घर लौटने और अंधेरा होने की वजह से जोखिम और बढ़ जाता है।
1a626442-d4ef-464a-9b8a-5060551a34d4_1774267569005-378679
गांव की सड़कें ज्यादा जानलेवा
सीधी सड़कों पर भी हादसे ज्यादा हुए। कुल 37 हजार 116 हादसे सीधी सड़कों पर हुए, जिनमें नौ हजार 956 लोगों की मौत हुई।
इसके उलट गड्ढे वाली सड़कों पर सिर्फ 300 मौतें दर्ज हुईं। यह आंकड़ा बताता है कि खराब सड़क से ज्यादा खतरनाक तेज रफ्तार और लापरवाही है।
रिपोर्ट में एक और तथ्य सामने आया है। पांच साल से कम पुरानी गाड़ियों से 16 हजार 64 हादसे हुए। इनमें चार हजार 579 लोगों की मौत हुई। साफ मौसम में भी नौ हजार 872 मौतें दर्ज हुईं। यानी नई गाड़ी और अच्छा मौसम भी सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं देते।
hp-kul-accident-img-7204051_01012026102322_0101f_1767243202_476-403568
युवाओं की सबसे ज्यादा मौत
दोनों वर्ग मिलाकर कुल मौतों का 51% से ज्यादा हिस्सा बनते हैं। यह आंकड़ा सबसे ज्यादा चिंता की बात है, क्योंकि यही उम्र किसी परिवार की कमाई और सहारे की होती है।
पुरुषों की मौत महिलाओं से पांच गुना ज्यादा
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसकी वजह पुरुषों का ज्यादा सफर करना और दोपहिया वाहन ज्यादा चलाना हो सकती है।
कुल मिलाकर रिपोर्ट यह साफ करती है कि हादसों की वजह सड़क की हालत से ज्यादा ड्राइविंग का तरीका है। तेज रफ्तार, हेलमेट न पहनना और लापरवाही सबसे बड़े कारण बनकर उभरे हैं।
ये खबरें भी पढ़िए...
छिंदवाड़ा-बैतूल नेशनल हाईवे पर पिकअप और ट्रक की टक्कर, तीन महिला समेत पांच की मौत
एमपी में हर घंटे हो रहे 12 एक्सीडेंट, शिकार होने वाले युवा सबसे ज्यादा
हिट एंड रन हादसों में एमपी सबसे आगे, पांच साल में 60 हजार से ज्यादा केस दर्ज
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari