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News In Short
- आजीविका मिशन की अटकी डिजिटल प्रक्रिया से ग्रामीण स्व सहायता समूहों को ब्याज अनुदान नहीं मिल पा रहा है।
- स्व-सहायता समूहों को मिलने वाला कुल 5% ब्याज अनुदान दो साल से अटका है।
- शहरी और अन्य विभागीय योजनाओं में महिलाओं को नियमित रूप से 2% अनुदान मिल रहा है।
- 66 लाख ग्रामीण महिलाएं सरकारी सहायता के बावजूद ब्याज राहत से वंचित है।
- प्रशासनिक शर्तों और धीमे डिजिटलीकरण ने शहरी-ग्रामीण असमानता उजागर कर दी है।
News In Detail
मध्य प्रदेश में अफसरशाही की खींचतान से उन लाखों ग्रामीण महिलाओं को बड़ा नुकसान हो रहा है, जो स्व-सहायता समूहों के जरिए आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रही हैं। मध्य प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) से राज्यभर में 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूह जुड़े हैं।
इन समूहों के माध्यम से करीब 66 लाख ग्रामीण महिलाएं आजीविका से जुड़ी हैं। सरकार ने इन्हें बैंक ऋण के साथ ब्याज बोझ से राहत देने का भरोसा दिलाया था। आजीविका मिशन का डिजिटल काम अफसरों की आपसी खींचतान से पूरा नहीं होने से यह ब्याज अनुदान अटक गया है।
शर्त बनी संकट की जड़
सरकार ने ऋण पर कुल 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देने की नीति बनाई। इसमें 3 प्रतिशत अनुदान आजीविका मिशन और 2 प्रतिशत महिला वित्त एवं विकास निगम देता है। निगम का भुगतान मिशन द्वारा अनुदान जारी करने के बाद ही संभव होता है। नियम यह है कि पहले आजीविका मिशन अपना तीन प्रतिशत अदा करेगा। इसके बाद ही महिला वित्त एवं विकास निगम दो प्रतिशत अनुदान जारी करता है। मिशन की प्रक्रिया रुकते ही निगम का भुगतान भी स्वतः ठप हो गया।
डिजिटलीकरण की धीमी चाल बनी रोड़ा
भ्रष्टाचार के पुराने आरोपों से उबरने के लिए आजीविका मिशन ने डिजिटल व्यवस्था अपनाने का फैसला लिया। तीन अलग-अलग पोर्टल बनाने की योजना बनी, लेकिन डेढ़ साल में एजेंसी तय नहीं हो सकी। नई व्यवस्था लागू न होने तक मिशन ने ब्याज अनुदान पर अघोषित रोक लगा दी।
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दो साल से ग्रामीण समूह वंचित
मिशन की रोक के चलते बीते दो साल से समूहों को तीन प्रतिशत अनुदान नहीं मिला। इसका असर यह हुआ कि महिला वित्त निगम भी अपना हिस्सा नहीं दे सका। ग्रामीण महिलाएं सरकार के पूरे 5 प्रतिशत लाभ से वंचित रह गईं।
महिला वित्त एवं विकास निगम के बंधे हाथ
दूसरी ओर महिला वित्त एवं विकास निगम अन्य योजनाओं में नियमित भुगतान कर रहा है। शहरी और विभागीय योजनाओं की महिलाओं को दो प्रतिशत ब्याज अनुदान मिल रहा है। स्व-सहायता समूहों के मामले में निगम के हाथ बंधे हुए हैं।
2023-24 के बाद पूरी तरह ठहराव
वर्ष 2023-24 में निगम ने ग्रामीण समूहों को 3.66 करोड़ रुपए अनुदान दिया था। शहरी क्षेत्र के समूहों को भी लगभग 35 लाख रुपए की सहायता मिली। 2024–25 और मौजूदा वित्तीय वर्ष में एक रुपया भी जारी नहीं हो सका।
शहरी महिलाएं आगे, ग्रामीण पीछे
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना सहित कई योजनाएं बिना किसी रुकावट के बढ़िया चल रही हैं। इन योजनाओं से जुड़ी महिलाएं नियमित ब्याज अनुदान का लाभ उठा रही हैं। ग्रामीण आजीविका समूह इस व्यवस्था से बाहर रह गए हैं।
समस्त पोर्टल से जुड़ी योजनाओं में बाधा नहीं
अन्य योजनाएं सीएलबीसी के समस्त पोर्टल से जुड़ी हुई हैं। इनमें एमएसएमई विभाग की मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना,संत रविदास स्वरोजगार योजना,अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार व टंटया मामा आर्थिक कल्याण योजना शामिल हैं।
पोर्टल आधारित प्रक्रिया होने से भुगतान में कोई तकनीकी अड़चन नहीं आई। पिछले तीन वर्षों में निगम ने 2.62 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित किया।
दोहरी नीति से उजागर हुई असमानता
एक ही सरकार की नीति में दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। शहरी महिलाओं को राहत मिल रही है। ग्रामीण महिलाएं इंतजार में हैं। एसआरएलएम की अटकी प्रक्रिया ने महिला सशक्तिकरण की असमानता उजागर कर दी है।
निगम महाप्रबंधक का दावा
महिला वित्त एवं विकास निगम के महाप्रबंधक अरविंद भाल के अनुसार, एसआरएलएम के नोडल बैंक से मांग न आने के कारण भुगतान नहीं हो सका। 2023–24 में जैसे ही मांग आई, अनुदान तत्काल जारी कर दिया गया।
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