बाल श्रवण योजना में बड़ा घोटाला, 8.96 लाख की गड़बड़ी पर DEIM की छुट्टी

Neel Tiwari | Jan 22, 2026, 14:00 IST
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bal shravan yojana scam
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मध्य प्रदेश की बाल श्रवण योजना में 8.96 लाख रुपए की गड़बड़ी सामने आई है। जांच में यह खुलासा हुआ है कि DEIM सुभाष शुक्ला के जरिए अवैध भुगतान किए गए थे। इस पर उनकी संविदा सेवा समाप्त कर दी गई है।

News In Short

  • बाल श्रवण योजना में फर्जी फॉलोअप बिलों का भुगतान किया गया था।
  • मामले में बिना इलाज वाले बच्चों की फाइलें आगे बढ़ाने का आरोप लगा था।
  • जांच में 8.96 लाख रुपए के अवैध भुगतान की पुष्टि गई है।
  • प्रमुख सचिव स्तर पर अपील खारिज की गई है।
  • राशि जमा न करने पर संविदा सेवा समाप्त कर दी गई है।

News in detail

बाल श्रवण योजना में उजागर हुई गंभीर वित्तीय अनियमितता

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) मध्यप्रदेश के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। जांच में पाया गया कि मूक-बधिर बच्चों के कॉक्लियर इम्प्लांट और स्पीच थेरेपी (AVT) के नाम पर ऐसे फॉलोअप बिलों का भुगतान किया गया था। इनका वास्तविक उपचार कभी हुआ ही नहीं था। यह पूरा मामला सीधे तौर पर योजना की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।



क्या है पूरा मामला

मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के तहत दिव्यांग बच्चों को सुनने की क्षमता प्रदान करने के उद्देश्य से सरकारी धन खर्च किया जाना था। वहीं, जांच में खुलासा हुआ कि जबलपुर में पदस्थ DEIM सुभाष शुक्ला ने संदिग्ध फाइलों को आगे बढ़ा दिया था। इसी के आधार पर अवैध भुगतान हुए हैं। इन भुगतानों में इलाज, फॉलोअप और उपस्थिति से जुड़ी कोई ठोस पुष्टि नहीं पाई गई है।

दिव्यांग बच्चों की मदद के नाम पर महाघोटाला

यह योजना दिव्यांग और असहाय बच्चों के भविष्य से जुड़ी है। वहीं, आरोप है कि इसका दुरुपयोग कर सरकारी धन की बंदरबांट की गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कागजों में उपचार दिखाया गया, जबकि वास्तविकता में बच्चों को योजना का लाभ ही नहीं मिला था। इससे न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हुआ, बल्कि जरूरतमंद बच्चों के अधिकारों पर भी चोट पहुंची है।

बिना इलाज और जांच के कर दिया गया भुगतान

महालेखाकार (AG) ग्वालियर की वर्ष 2019 की ऑडिट रिपोर्ट में इस गड़बड़ी की ओर पहले ही इशारा किया गया था। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि फॉलोअप उपचार के बिना ही लाखों रुपए के बिल पास कर दिए गए थे। इसके बावजूद आपत्तियों का निराकरण किए बिना 8.96 लाख रुपए के भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जो नियमों के खिलाफ मानी गई है।

फर्जी दस्तावेज और हस्ताक्षरों पर उठे सवाल

जांच के दौरान आरटीआई के माध्यम से सामने आए दस्तावेजों में अभिभावकों के कथित हस्ताक्षर संदिग्ध पाए गए हैं। कई अभिभावकों ने स्पष्ट किया कि उनके बच्चों का इलाज निजी स्तर पर हुआ था। साथ ही, NHM की किसी सुविधा का लाभ नहीं लिया गया था। इसके बावजूद कागजों में उनके नाम पर सरकारी भुगतान दिखाया गया है।

DEIM सुभाष शुक्ला की भूमिका तय

जबलपुर के क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं की जांच रिपोर्ट में यह सामने आया है कि DEIM सुभाष शुक्ला ने संदिग्ध भुगतानों से जुड़ी फाइलें आगे बढ़ाई थीं। रिपोर्ट में यह कहा गया कि उन्होंने अपने पदीय दायित्वों को सही ढंग से नहीं निभाया है। इसके साथ ही, उन्हें वित्तीय अनियमितताओं का दोषी भी पाया गया है।

अपील में भी नहीं मिली राहत

सुभाष शुक्ला ने वसूली आदेश के खिलाफ प्रमुख सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के समक्ष अपील दायर की थी। उन्होंने तर्क दिया कि भुगतान ई-वित्त प्रणाली से अन्य अधिकारियों के जरिए किया गया था।

वहीं, सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ कि नोटशीट और फाइलें उन्हीं के जरिए आगे बढ़ाई गई थीं। 10 नवंबर 2025 को उनकी अपील खारिज कर दी गई थी।

राशि जमा न करने पर कड़ी कार्रवाई

अपील खारिज होने के बाद NHM ने 7 दिनों के भीतर 8.96 लाख रुपए सरकारी खाते में जमा करने के निर्देश दिए थे। तय समय सीमा में राशि जमा न करने और आदेशों की अनदेखी को कदाचरण मानते हुए विभाग ने सख्त रुख अपनाया है।

संविदा सेवा समाप्त, आईडी भी हटाई गई

NHM मानव संसाधन मैनुअल 2025 के प्रावधानों के तहत मिशन संचालक सलोनी सिडाना ने सुभाष शुक्ला की संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। साथ ही उनकी कर्मचारी आईडी (NHM009365) को पोर्टल से हटाने के निर्देश जारी किए है। वहीं, यह कार्रवाई स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक कड़ा संदेश मानी जा रही है।

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