MP में ई-अटेंडेंस का अड़ंगा, आदिवासी जिलों में सबसे खराब हालात
Ramanand Tiwari | Aug 23, 2026, 22:37 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ई-अटेंडेंस को 100% लागू करने की कोशिश में जुटा है, लेकिन दफ्तरों में ही व्यवस्था कमजोर नजर आ रही है। समीक्षा में 84% अटेंडेंस सामने आई, जबकि धार समेत आदिवासी जिलों में आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं।
ऐसे समझें पूरा मामला...
- दफ्तरों में 84% ही ई-अटेंडेंस दर्ज।
- स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति 97%।
- धार में 129 में 73 गैरहाजिर मिले।
- झाबुआ में 61 में 34 ने हाजिरी नहीं लगाई।
- सिग्नल-सर्वर की दिक्कत भी बनी बड़ी बाधा।
समीक्षा रिपोर्ट में विभागीय कार्यालयों में करीब 84 फीसदी ई-अटेंडेंस ही सामने आई है। सबसे ज्यादा सवाल आदिवासी इलाकों से उठ रहे हैं। धार में 129 में 73 कर्मचारी गैरहाजिर मिले, जबकि झाबुआ में 61 में 34 कर्मचारियों की ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं थी।
दफ्तर ही कमजोर तो 100% लक्ष्य कैसे?
लेकिन समीक्षा के आंकड़े बताते हैं कि स्कूलों और विभागीय कार्यालयों की स्थिति एक जैसी नहीं है। स्कूलों में शिक्षक करीब 97 फीसदी तक ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं, जबकि विभागीय कार्यालयों में यह आंकड़ा 84 फीसदी तक ही पहुंच रहा है।
यानी जिस व्यवस्था को स्कूलों में लागू कराने की कोशिश हो रही है, उसकी राह विभाग के अपने कार्यालयों में भी पूरी तरह आसान नहीं है।
आदिवासी जिलों में सबसे बड़ा सवाल
यह आंकड़ा सामान्य तकनीकी समस्या से आगे जाकर व्यवस्था की जमीन पर पकड़ पर सवाल खड़े करता है। झाबुआ में 61 में से 34 और अनूपपुर में 55 में से 25 कर्मचारियों की अटेंडेंस नहीं मिली। बड़वानी में भी 123 में से 46 कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए।
सिर्फ कर्मचारी जिम्मेदार या सिस्टम भी?
कई जगह मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट सिग्नल, सर्वर और डेटा संबंधी दिक्कतें अटेंडेंस में बाधा बनती हैं। खासकर दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए हर मिसिंग अटेंडेंस को सीधे कर्मचारी की लापरवाही मान लेना भी तस्वीर का पूरा हिस्सा नहीं होगा।
ग्वालियर में भी तस्वीर राहत वाली नहीं
मंडला में 154 में से 58 कर्मचारी भी ई-अटेंडेंस में दर्ज नहीं हुए। इससे संकेत मिलता है कि व्यवस्था की चुनौती अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में अलग कारणों से मौजूद है।
विभाग की कोशिश बनाम जमीन की हकीकत
इसका सकारात्मक पहलू यह है कि स्कूलों में करीब 97 फीसदी तक ई-अटेंडेंस पहुंचना बताता है कि व्यवस्था पूरी तरह विफल नहीं है। बड़ी संख्या में शिक्षक इसे अपना भी रहे हैं।
लेकिन कार्यालयों में 84 फीसदी का आंकड़ा और कुछ जिलों में बड़ी संख्या में मिसिंग अटेंडेंस यह संकेत देती है कि 100 फीसदी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता बाकी है।
100% ई-अटेंडेंस आसान लक्ष्य नहीं
अगर नेटवर्क और सर्वर की समस्या दूर होती है, साथ ही कर्मचारियों को सिस्टम की स्पष्ट जानकारी और जरूरी तकनीकी सुविधा मिलती है, तो अटेंडेंस का प्रतिशत बढ़ सकता है, लेकिन मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए 100 फीसदी ई-अटेंडेंस स्कूल शिक्षा विभाग के लिए फिलहाल आसान लक्ष्य नजर नहीं आ रहा।
आने वाला समय बताएगा कि डिजिटल हाजिरी सिर्फ सरकारी आदेश बनकर रह जाती है या वास्तव में विभागीय कामकाज में ऐसी व्यवस्था बन पाती है, जिसमें कर्मचारी भी जवाबदेह हों और सिस्टम भी अपनी जिम्मेदारी निभाए।
ये खबरें भी पढ़ें....
एमपी बीजेपी की ओरछा बैठक में Gen-Z पर फोकस, 2028 से पहले बनेगी नई रणनीति
एमपी में संघ का Gen-Z से सीधा संवाद, 20 सितंबर को भोपाल आएंगे दत्तात्रेय होसबले
NEET PG 2026: 30 अगस्त को, एडमिट कार्ड डाउनलोड प्रोसेस समेत जानें पूरी जानकारी
खेलो एमपी पर करोड़ों की चमक, कोचिंग सिस्टम हुआ खोखला!
मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 11 जिलों के कलेक्टर बदले; CM मोहन यादव के कुनबे में भी बढ़ोतरी
By Sumit Kumar
सरकार ने जारी की नई किराया दरें, साधारण से लेकर एसी और स्लीपर बसों तक यात्रियों की जेब पर पड़ेगा असर
By VINAY VERMA
भजनलाल शर्मा की समीक्षा बैठक के बाद पुलिस महकमे में बड़ी कार्रवाई, 9 अफसरों पर गिरी गाज
By Ashish Bhardwaj
Fire Safety Rules 2026: आग लगी तो जिम्मेदार कौन? MP में अब हर साल देना होगा भवनों की सुरक्षा का हिसाब
By Ramanand Tiwari
पुलिस होती कौन है हमें रोकने वाली? AISF कार्यकर्ता श्रावणी का बड़ा आरोप, इटारसी हिरासत से हाईकोर्ट तक की पूरी कहानी
By Neel Tiwari
CG Top News: CM हाउस के बाहर हंगामा, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का WhatsApp हैक, मंत्रालय में 162 कर्मचारियों के तबादले समेत पढ़े बड़ी खबरें
By Umeshwari Baghel
Rajasthan Top News: जयपुर जिला परिषद चुनाव में भाजपा-कांग्रेस ने घोषित किए प्रत्याशी
By Ashish Bhardwaj