एमपी में डिजिटल शिक्षा की स्थिति बदहाल, इंटरनेट तो छोड़ो...कई स्कूलों में बिजली तक नहीं
Aman Vaishnav | May 12, 2026, 08:36 IST
mp school education niti aayog report 2026
नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की पोल खोल दी है। इंटरनेट, बिजली और कंप्यूटर जैसी बुनियादी सुविधाओं के मामले में मध्य प्रदेश कई राज्यों से पीछे है।
मध्य प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव गंभीर समस्या बन गई है। राज्य के एक लाख 22 हजार स्कूलों में से लगभग 67 हजार स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है। वहीं 98 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास की कोई व्यवस्था ही नहीं है।
नीति आयोग ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट (NITI Aayog Education Report 2026) जारी की है। स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया रिपोर्ट के अनुसार 14 हजार 900 स्कूलों में अब भी बिजली की आपूर्ति ठीक से नहीं हो रही है। इसके अलावा लगभग 50 हजार स्कूलों में अब तक कंप्यूटर का उपयोग नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 10वीं के बाद 100 में से लगभग 17 छात्र स्कूल छोड़ रहे हैं, जो कि चिंता का विषय है। इसके साथ ही राज्य में कुल 52 हजार 19 शिक्षक पद खाली पड़े हैं। यह रिपोर्ट यूडाइस प्लस 2024-25 और परख 2024 के आंकड़ों पर आधारित है।
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मध्य प्रदेश के केवल 45.7% स्कूलों में ही इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है। वहीं जबकि 54.3% स्कूलों में इंटरनेट नहीं है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल एक लाख 22 हजार 120 स्कूल हैं। इनमें से 67 हजार 532 स्कूलों में इंटरनेट की व्यवस्था नहीं है।
इंटरनेट सुविधा की बात करें तो मध्य प्रदेश देश के 24 राज्यों से पीछे है। राष्ट्रीय औसत 63.5% से लगभग 18 प्रतिशत अंक पीछे है।
बिहार, असम और ओडिशा 2014-15 में मध्य प्रदेश से पीछे थे। अब इंटरनेट की सुविधा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। हालांकि मध्य प्रदेश ने 10 साल में इंटरनेट सुविधा में 3.8% से बढ़कर 45.7% तक का सफर तय किया है। इन राज्यों से पिछड़ने के कारण अब भी काफी सुधार की आवश्यकता है।
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स्मार्ट क्लास रूम की सुविधा में मध्य प्रदेश का देश में 28वां स्थान है। एमपी देश के 20 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों से पीछे है। प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में 2024-25 में सिर्फ 19.6% स्कूलों में ही स्मार्ट क्लासरूम हैं।
यह देश के औसत 30.6% से 11 प्रतिशत कम है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 98 हजार 184 स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा नहीं है।
तमिलनाडु जैसे राज्य ने इस मामले में एमपी से तेजी से प्रगति की है। 2021-22 में एमपी में केवल 5.2% स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम थे।
अब यह आंकड़ा बढ़कर 19.6% हो गया है। हालांकि कई ऐसे राज्य हैं जो 2021-22 में एमपी से पीछे थे। अब वे इस मामले में एमपी से काफी आगे निकल चुके हैं।
स्कूलों में बिजली की सुविधा के मामले में मध्य प्रदेश देश के 17 राज्यों से पीछे है। बड़े राज्यों में इसका 18वां स्थान है। 2024-25 में प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में 87.8% स्कूलों में बिजली की सुविधा है। जबकि देश का औसत 91.9% है। यानी एमपी अभी भी देश के औसत से 4.1 प्रतिशत अंक पीछे है।
आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के करीब एक लाख 22 हजार स्कूलों में से लगभग 14 हजार 900 स्कूलों में अब भी काम करने वाली बिजली नहीं है।
हालांकि 2014-15 में मध्य प्रदेश में सिर्फ 26.3% स्कूलों में बिजली की सुविधा थी। अब यह बढ़कर 87.8% हो गई है। 10 साल में प्रदेश ने काफी प्रगति की है। वहीं कई ऐसे राज्य हैं जो 2014-15 में एमपी से पीछे थे। अब वे इस मामले में एमपी से आगे निकल चुके हैं।
स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा के मामले में मध्य प्रदेश देश के 17 राज्यों से पीछे है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 में प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में केवल 59.2% स्कूलों में ही काम करने वाले कंप्यूटर हैं। जबकि देश का औसत 64.7% है। यानी एमपी अभी भी देश के औसत से 5.5 प्रतिशत अंक पीछे है।
आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के लगभग एक लाख 22 हजार स्कूलों में से लगभग 72 हजार 300 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा है। वहीं करीब 49 हजार 800 स्कूलों में अभी भी कंप्यूटर नहीं हैं।
2014-15 में मध्य प्रदेश के केवल 14.6% स्कूलों में कंप्यूटर थे। अब 2024-25 में बढ़कर 59.2% हो गए हैं। 10 साल में प्रदेश ने 44.6 प्रतिशत अंक की बढ़त की है।
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नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों में टॉयलेट की सुविधा के मामले में मध्य प्रदेश देश के 16 राज्यों से पीछे है। प्रदेश के स्कूलों में लड़कों के लिए केवल 87.2% और लड़कियों के लिए 88.6% स्कूलों में ही टॉयलेट हैं। जबकि देश का औसत क्रमशः 92.4% और 94% है। यानी एमपी दोनों मामलों में देश के औसत से करीब 5 प्रतिशत अंक पीछे है।
आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के एक लाख 22 हजार स्कूलों में से लगभग 15 हजार 600 स्कूलों में लड़कों के टॉयलेट की सुविधा नहीं है। वहीं करीब 13 हजार 900 स्कूलों में लड़कियों के टॉयलेट की सुविधा नहीं है।
10 साल पहले 2014-15 में मध्य प्रदेश के 78% स्कूलों में लड़कों के और 78.7% स्कूलों में लड़कियों के टॉयलेट थे। अब 2024-25 में बढ़कर 87.2% और 88.6% हो गए हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में खुलासाहुआ है कि कई ऐसे राज्य हैं जो 2014-15 में एमपी से पीछे थे। अब इस मामले में एमपी से काफी आगे निकल चुके हैं।
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50 हजार स्कूलों में अब तक कंप्यूटर नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 10वीं के बाद 100 में से लगभग 17 छात्र स्कूल छोड़ रहे हैं, जो कि चिंता का विषय है। इसके साथ ही राज्य में कुल 52 हजार 19 शिक्षक पद खाली पड़े हैं। यह रिपोर्ट यूडाइस प्लस 2024-25 और परख 2024 के आंकड़ों पर आधारित है।
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24 राज्यों से पीछे मध्य प्रदेश
इंटरनेट सुविधा की बात करें तो मध्य प्रदेश देश के 24 राज्यों से पीछे है। राष्ट्रीय औसत 63.5% से लगभग 18 प्रतिशत अंक पीछे है।
बिहार, असम और ओडिशा 2014-15 में मध्य प्रदेश से पीछे थे। अब इंटरनेट की सुविधा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। हालांकि मध्य प्रदेश ने 10 साल में इंटरनेट सुविधा में 3.8% से बढ़कर 45.7% तक का सफर तय किया है। इन राज्यों से पिछड़ने के कारण अब भी काफी सुधार की आवश्यकता है।
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स्मार्ट क्लास सुविधा में पिछड़ा मध्य प्रदेश
यह देश के औसत 30.6% से 11 प्रतिशत कम है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 98 हजार 184 स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की सुविधा नहीं है।
तमिलनाडु जैसे राज्य ने इस मामले में एमपी से तेजी से प्रगति की है। 2021-22 में एमपी में केवल 5.2% स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम थे।
अब यह आंकड़ा बढ़कर 19.6% हो गया है। हालांकि कई ऐसे राज्य हैं जो 2021-22 में एमपी से पीछे थे। अब वे इस मामले में एमपी से काफी आगे निकल चुके हैं।
स्कूलों में बिजली की सुविधा के मामले में मध्य प्रदेश देश के 17 राज्यों से पीछे है। बड़े राज्यों में इसका 18वां स्थान है। 2024-25 में प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में 87.8% स्कूलों में बिजली की सुविधा है। जबकि देश का औसत 91.9% है। यानी एमपी अभी भी देश के औसत से 4.1 प्रतिशत अंक पीछे है।
हजारों स्कूलों में अब भी बिजली नहीं
हालांकि 2014-15 में मध्य प्रदेश में सिर्फ 26.3% स्कूलों में बिजली की सुविधा थी। अब यह बढ़कर 87.8% हो गई है। 10 साल में प्रदेश ने काफी प्रगति की है। वहीं कई ऐसे राज्य हैं जो 2014-15 में एमपी से पीछे थे। अब वे इस मामले में एमपी से आगे निकल चुके हैं।
49 हजार स्कूलों में अभी भी कंप्यूटर नहीं
आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के लगभग एक लाख 22 हजार स्कूलों में से लगभग 72 हजार 300 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा है। वहीं करीब 49 हजार 800 स्कूलों में अभी भी कंप्यूटर नहीं हैं।
2014-15 में मध्य प्रदेश के केवल 14.6% स्कूलों में कंप्यूटर थे। अब 2024-25 में बढ़कर 59.2% हो गए हैं। 10 साल में प्रदेश ने 44.6 प्रतिशत अंक की बढ़त की है।
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कई स्कूलों में टॉयलेट की सुविधा नहीं
आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के एक लाख 22 हजार स्कूलों में से लगभग 15 हजार 600 स्कूलों में लड़कों के टॉयलेट की सुविधा नहीं है। वहीं करीब 13 हजार 900 स्कूलों में लड़कियों के टॉयलेट की सुविधा नहीं है।
10 साल पहले 2014-15 में मध्य प्रदेश के 78% स्कूलों में लड़कों के और 78.7% स्कूलों में लड़कियों के टॉयलेट थे। अब 2024-25 में बढ़कर 87.2% और 88.6% हो गए हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में खुलासाहुआ है कि कई ऐसे राज्य हैं जो 2014-15 में एमपी से पीछे थे। अब इस मामले में एमपी से काफी आगे निकल चुके हैं।
FAQ
- मध्य प्रदेश में कितने स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है?
नीति आयोग की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के कुल 1,22,120 स्कूलों में से 67,532 स्कूलों में इंटरनेट की व्यवस्था नहीं है। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो केवल 45.7% स्कूलों में ही इंटरनेट पहुंच पाया है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है, जिसके कारण डिजिटल शिक्षा में काफी रुकावट आ रही है। - एमपी के स्कूलों में शिक्षकों की कमी का क्या स्तर है?
मध्य प्रदेश में शिक्षा के गिरते स्तर का एक बड़ा कारण शिक्षकों के खाली पद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य भर के स्कूलों में वर्तमान में 52 हजार 19 शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। शिक्षकों की इस कमी की वजह से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है और छात्रों का ड्रॉपआउट रेट (विशेषकर 10वीं के बाद) बढ़ता जा रहा है। - क्या मध्य प्रदेश के सभी स्कूलों में बिजली और कंप्यूटर उपलब्ध हैं?
नहीं, मध्य प्रदेश के करीब 14 हजार 900 स्कूलों में आज भी काम करने वाली बिजली की आपूर्ति नहीं है। वहीं, कंप्यूटर शिक्षा की बात करें तो लगभग 49 हजार 800 स्कूलों में अब तक कंप्यूटर का उपयोग शुरू नहीं किया गया है। राज्य में केवल 59.2% स्कूलों में ही कंप्यूटर की सुविधा है, जो राष्ट्रीय औसत 64.7% से काफी कम है।
पुलिस बल कम, अपराध ज्यादा, 2,522 संगीन मामलों में अटक रही गिरफ्तारी
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