शिक्षा सर्वे 2026: पंजाब-दिल्ली से काफी पीछे छूटा एमपी, इंदौर-भोपाल भी पिछड़े

Kaushiki | Aug 29, 2026, 15:34 IST
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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के ताजा सर्वे में मध्य प्रदेश की स्कूली शिक्षा का बुरा हाल सामने आया है। इंदौर जैसे एजुकेशन हब के स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सिर्फ 41 फीसदी हैं। बड़वानी में डिजिटल लर्निंग का स्तर घटकर 16 फीसदी रह गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने पीजीआई-डी रिपोर्ट 2025-26 जारी की है।
  • इंदौर जिले को स्कूल शिक्षा में प्रचेस्टा-2 ग्रेड मिला है।
  • इंदौर को 600 में से सिर्फ 284 अंक मिले हैं।
  • मध्य प्रदेश में सीधी जिला टॉप पर है, इंदौर 16वें नंबर पर है।
  • देश में कोई भी जिला सबसे ऊंची ग्रेड उत्कर्ष नहीं पा सका है।

पीजीआई-डी रिपोर्ट क्या है

MP School Ranking 2026: मध्य प्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बताने वाले दावों की पोल खुल गई है। केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट ने राज्य के शिक्षा मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने जिला प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI-D) जारी किया है।

इस राष्ट्रीय रिपोर्ट में इंदौर के स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं केवल 41% पाई गईं। इंदौर को पूरे प्रदेश में सबसे बड़ा एजुकेशन हब माना जाता है। यहां दूर-दूर से बच्चे पढ़ाई करने और अपना करियर बनाने आते हैं। लेकिन स्कूलों की यह हालत वाकई चिंताजनक और डराने वाली है।

इंदौर में बच्चों की लर्निंग आउटकम भी काफी कम है। यह आंकड़ा सिर्फ 47% पर आकर सिमट गया है। जब राज्य के सबसे बड़े शहर का यह हाल है, तो बाकी जगहों की स्थिति समझी जा सकती है।

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भोपाल और उज्जैन का भी बुरा हाल

राज्य की राजधानी भोपाल का प्रदर्शन भी काफी निराशाजनक रहा है। भोपाल के स्कूलों में बच्चों का लर्निंग आउटकम लगभग 47% भोपाल में स्कूल सेफ्टी का पैमाना सिर्फ 37% पाया गया है।

यह आंकड़ा साफ बताता है कि राजधानी के स्कूलों में बच्चे कितने सुरक्षित हैं। प्रशासनिक केंद्र होने के बावजूद यहां की स्कूली व्यवस्था पूरी तरह से लचर नजर आ रही है।

मुख्यमंत्री के गृह जिले उज्जैन की स्थिति भी कोई खास अच्छी नहीं है। उज्जैन में स्कूल सेफ्टी का ग्राफ महज 34% पर अटका है। वहीं डिजिटल लर्निंग का स्तर सिर्फ 28% दर्ज किया गया है।

School Performance grading Index
School Performance grading Index


टॉप राज्यों से बहुत पीछे छूटा एमपी

इस राष्ट्रीय सर्वे(School Performance grading Index) में देश भर के 784 जिलों को शामिल किया गया था। पंजाब का बरनाला जिला 462 अंकों के साथ देश में सबसे ऊपर रहा। श्री मुक्तसर साहिब जिला 447 अंक हासिल कर दूसरे स्थान पर रहा।

चंडीगढ़ ने 437 अंकों के साथ देश में शानदार दूसरा स्थान प्राप्त किया है। दिल्ली के भी ज्यादातर जिलों ने 420 से अधिक अंक हासिल किए हैं। यह सभी जिले देश की सबसे टॉप यानी 'उत्तम-2' ग्रेड श्रेणी में शामिल हैं।

दूसरी तरफ मध्य प्रदेश का सबसे बेस्ट प्रदर्शन करने वाला सीधी जिला बेहद पीछे है। सीधी को सिर्फ 333 अंक यानी 55.5 प्रतिशत अंक ही मिल सके हैं। यह जिला भी टॉप रैंकिंग से पूरे 100 अंक पीछे छूट गया है।

डिजिटल पढ़ाई में बड़वानी फिसड्डी

डिजिटल इंडिया के दौर में मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाके काफी पीछे हैं। सागर जिले में डिजिटल लर्निंग का स्तर सिर्फ 24% दर्ज किया गया। धार जिले में यह आंकड़ा और भी कम यानी 20% पर आ गया।

सबसे खराब स्थिति आदिवासी बहुल जिले बड़वानी की सामने आई है। बड़वानी में डिजिटल लर्निंग का स्तर गिरकर सिर्फ 16% रह गया है। यहां बच्चों की सीखने की क्षमता भी केवल 36% पाई गई।

बड़वानी के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा का ग्राफ सिर्फ 26% है। विदिशा में पढ़ाई का स्तर 41% और अशोकनगर में प्रबंधन 4% दर्ज हुआ। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि बच्चे आधुनिक शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।

जिलामेन स्केलदर्ज प्रतिशत (%)
इंदौरबुनियादी सुविधाएं (Infrastructure)41%
इंदौरसीखने की क्षमता (Learning Outcome)47%
भोपालस्कूल सुरक्षा (School Safety)37%
उज्जैनडिजिटल लर्निंग (Digital Learning)28%
बड़वानीडिजिटल पढ़ाई (Digital Education)16%
सागरडिजिटल लर्निंग (Digital Learning)24%
सीधीकुल अंक (Best in MP)55.5% (333 अंक)

क्या है प्राचेष्टा ग्रेड का मतलब

शिक्षा मंत्रालय ने इस रिपोर्ट में प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग ग्रेड दिए हैं। इसमें 'उत्कर्ष' और 'उत्तम' को सबसे ऊपरी स्तर की श्रेणी माना जाता है। वहीं 'प्राचेष्टा' श्रेणी का मतलब सुधार की ओर बढ़ते मध्यम स्तर से है।

प्राचेष्टा का सीधा अर्थ है कि स्कूल बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन वे गुणवत्ता और मानकों के मामले में अभी काफी पीछे हैं। मध्य प्रदेश के ज्यादातर जिले प्राचेष्टा-1, 2 और 3 श्रेणी में ही फंसे हैं।

पूरा राज्य 60% के न्यूनतम स्तर को भी पार नहीं कर पाया है। इससे साफ जाहिर होता है कि स्कूल अभी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। व्यवस्था में बड़े सुधार की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है।

विपक्ष ने सरकार पर बोला हमला

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राज्य में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

जीतू पटवारी ने कहा कि यह रिपोर्ट सरकार का 25 साल का रिपोर्ट कार्ड है। उन्होंने विज्ञापनों की राजनीति छोड़कर स्कूलों की वास्तविक स्थिति पर बहस की मांग की। बच्चों के भविष्य को लेकर उन्होंने चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि आज की दुनिया डिजिटल तकनीक और जेनरेशन-अल्फा की बात कर रही है। ऐसे समय में हमारे जिलों में डिजिटल पढ़ाई 16% होना शर्मनाक है। सरकार के दावों और ज़मीनी हकीकत में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।

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