MP के सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट रोकने का प्लान अटका! मॉनिटरिंग ऐसी होगी तो परफॉर्मेंस कब सुधरेगी?
Atul Dwivedi | Sept 30, 2026, 19:18 IST
ड्रॉपआउट रोकने की तैयारी कागजों में, MP शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर सवाल
एमपी के सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति पर नजर रखने की योजना अटक गई है। शिक्षा विभाग ने 9वीं से 12वीं के छात्रों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग का आदेश जारी किया था। इसका उद्देश्य ड्रॉपआउट रोकना और स्कूलों की स्थिति सुधारना था। द सूत्र की पड़ताल में सामने आया कि Education Portal 3.0 पर अभी तक यह व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है।
मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों (MP school education department ) में लगभग 26 लाख छात्र पढ़ते हैं। 8400 हाईस्कूल और 5100 हायर सेकंडरी स्कूल प्रदेश में हैं। इन स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए शिक्षा विभाग एक व्यवस्था लेकर आया था।
उस व्यवस्था ने दम तोड़ दिया है। यहां शिक्षकों के बाद छात्रों के लिए भी ऑनलाइन मॉनिटरिंग का नियम निकाला गया था। शिक्षा विभाग ने आदेश दिया था कि रोज कितने छात्र स्कूल आ रहे हैं, इसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाए।
ये व्यवस्था 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए की गई थी। लेकिन द सूत्र की पड़ताल में पता चला है कि ये नियम फिलहाल फाइलों से बाहर नहीं आया है। जिस पोर्टल के जरिए छात्रों की मॉनिटरिंग होनी थी, उसमें तो अलग ही कहानी चल रही है।
दरअसल स्कूल शिक्षा विभाग( education department) 9वीं से 12वीं तक के छात्रों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग (Student attendance online ) करना चाहता है। इसके लिए एजुकेशन पोर्टल 3.0 (Education Portal 3.0 ) का इस्तेमाल करने की बात कही गई थी।
विभाग जानना चाहता है कि रोज कितने छात्र क्लास में उपस्थित हो रहे हैं। इसकी मॉनिटरिंग पूरी तरह ऑनलाइन की जानी है। इसके लिए शिक्षकों को हर दिन एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर जाकर ये दर्ज करना है कि उनकी क्लास में उस दिन कितने छात्र उपस्थित रहे।
इसके पीछे असली वजह स्कूलों में ड्रापआउट ( MP school dropout) की समस्या का पता लगाना है। सरकार जानना चाहती है कि मध्यप्रदेश के किन क्षेत्रों के स्कूलों में ड्रापआउट की समस्या सबसे ज्यादा है।
द सूत्र की पड़ताल में पता चला कि पोर्टल पर छात्र का नाम उसी वक्त दर्ज हो जाता है, जब वो स्कूल में एडमिशन लेता है। लेकिन छात्रों की उपस्थिति को लेकर एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर फिलहाल ऐसी कोई व्यवस्था है ही नहीं। ये भी पता चला कि कई जिलों में व्यवस्था शुरु करने की कोशिश तो हुई, लेकिन प्लान ने जल्द ही दम तोड़ दिया। हमें ये भी पता चला कि शिक्षा विभाग ने आदेश तो जारी कर दिया कि छात्रों की मॉनिटरिंग और संख्या ऑनलाइन दर्ज की जाए। लेकिन पोर्टल अभी अपडेट नहीं हुआ है। जिसकी वजह से मामला ठंडे बस्ते में है।
आदेश जारी करते वक्त हर 7 दिन में समीक्षा की बात कही गई थी। जिला शिक्षा अधिकारी को इसका जिम्मा दिया गया था। शिक्षक हर दिन छात्रों की संख्या ऑनलाइन दर्ज करते। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी उस डाटा की 7 दिन में समीक्षा करते। समीक्षा के दौरान देखा जाता कि....
1- किस क्षेत्र में बच्चे ज्यादा अनुपस्थित रहते हैं ?
2- किस स्कूल और किस क्लास में छात्रों की संख्या लगातार कम बनी हुई है ?
डाटा की समीक्षा के बाद जिला शिक्षा अधिकारी को मौके पर जाकर ये देखना था कि छात्र स्कूल क्यों नहीं आ रहा ? रिपोर्ट आने के बाद छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने का काम किया जाता। यानी सरकार चाहती है कि स्कूलों से ड्रापआउट कम हो। बच्चे स्कूल आएं लेकिन आलम ये है कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र 5 महीने में खत्म हो जाएगा।
दूसरी तरफ अभी तक पोर्टल ही ठीक से काम नहीं कर रहा है। ऐसे में सरकार कैसे पता करेगी कि किस स्कूल में ड्रापआउट ज्यादा है। लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने, इस आदेश के बाद कहा था कि रिजल्ट सुधारने के लिए ये सब हो रहा है। पोर्टल पर अभी छात्रों की संख्या दर्ज करवाएंगे। इसके बाद अटेंडेंस भी ऑनलाइन लगा करेगी।
उस व्यवस्था ने दम तोड़ दिया है। यहां शिक्षकों के बाद छात्रों के लिए भी ऑनलाइन मॉनिटरिंग का नियम निकाला गया था। शिक्षा विभाग ने आदेश दिया था कि रोज कितने छात्र स्कूल आ रहे हैं, इसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाए।
ये व्यवस्था 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए की गई थी। लेकिन द सूत्र की पड़ताल में पता चला है कि ये नियम फिलहाल फाइलों से बाहर नहीं आया है। जिस पोर्टल के जरिए छात्रों की मॉनिटरिंग होनी थी, उसमें तो अलग ही कहानी चल रही है।
ऐसी व्यवस्था क्यों ?
विभाग जानना चाहता है कि रोज कितने छात्र क्लास में उपस्थित हो रहे हैं। इसकी मॉनिटरिंग पूरी तरह ऑनलाइन की जानी है। इसके लिए शिक्षकों को हर दिन एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर जाकर ये दर्ज करना है कि उनकी क्लास में उस दिन कितने छात्र उपस्थित रहे।
इसके पीछे असली वजह स्कूलों में ड्रापआउट ( MP school dropout) की समस्या का पता लगाना है। सरकार जानना चाहती है कि मध्यप्रदेश के किन क्षेत्रों के स्कूलों में ड्रापआउट की समस्या सबसे ज्यादा है।
पड़ताल में क्या पता चला ?
हर 7 दिन में होनी थी समीक्षा
1- किस क्षेत्र में बच्चे ज्यादा अनुपस्थित रहते हैं ?
2- किस स्कूल और किस क्लास में छात्रों की संख्या लगातार कम बनी हुई है ?
छात्र स्कूल क्यों नहीं आ रहा
दूसरी तरफ अभी तक पोर्टल ही ठीक से काम नहीं कर रहा है। ऐसे में सरकार कैसे पता करेगी कि किस स्कूल में ड्रापआउट ज्यादा है। लोक शिक्षण संचालनालय के आयुक्त अभिषेक सिंह ने, इस आदेश के बाद कहा था कि रिजल्ट सुधारने के लिए ये सब हो रहा है। पोर्टल पर अभी छात्रों की संख्या दर्ज करवाएंगे। इसके बाद अटेंडेंस भी ऑनलाइन लगा करेगी।
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