जीडीएस भर्ती फर्जीवाड़ा: फर्जी दस्तावेज से नौकरी के 8 आरोपियों को सीबीआई ने किया अरेस्ट

Sandeep Kumar | Sept 30, 2026, 18:08 IST
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डाक विभाग भर्ती में फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले 8 गिरफ्तार
डाक विभाग भर्ती में फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले 8 गिरफ्तार

जबलपुर डाक विभाग फर्जी मार्कशीट मामले में सीबीआई ने आठ आरोपियों को पकड़ा है। इनमें पांच जबलपुर और तीन कटनी के हैं। आरोप है कि ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में फर्जी 10वीं अंकसूची लगाई गई थी। जीडीएस भर्ती फर्जीवाड़ा में अबतक 30 से ज्यादा संदिग्ध नियुक्तियां जांच के दायरे में हैं।

जबलपुर डाक विभाग फर्जी मार्कशीट मामले में सीबीआई ने आठ आरोपियों को पकड़ा है। इनमें पांच जबलपुर के और तीन कटनी के हैं। आरोप है कि इन्होंने ग्रामीण डाक सेवक भर्ती में फर्जी 10वीं की अंकसूची लगाई। सीबीआई की जांच अभी जारी है। इसलिए आरोपियों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

जीडीएस भर्ती फर्जीवाड़ा कैसे खुला?

दरअसल डाक विभाग ने 10वीं की अंकसूचियां संबंधित बोर्डों से सत्यापित कराईं। सत्यापन का मतलब है, जारी करने वाली संस्था से दस्तावेज की सच्चाई पूछना। जांच में सामने आया कि कुछ अंकसूचियां बोर्डों ने जारी ही नहीं की थीं। यहीं से पूरा खेल खुलना शुरू हुआ।

यह मामला जीडीएस पदों की भर्ती से जुड़ा है। जीडीएस का मतलब है ग्रामीण डाक सेवक (Gramin Dak Sevak)। जीडीएस भर्ती फर्जीवाड़ा (GDS recruitment scam) अब सीबीआई की जांच के केंद्र में है। एफआईआर यानी पहली औपचारिक सूचना रिपोर्ट। इसके बाद एजेंसी कानूनी तौर पर जांच आगे बढ़ाती है। सीबीआई ने भी एफआईआर दर्ज कर यही रास्ता अपनाया।

डाक विभाग ने पहले ही हटा दी सेवाएं

ये कर्मचारी डाक विभाग के अलग-अलग पदों पर काम कर रहे थे। दस्तावेजों के सत्यापन में गड़बड़ी सामने आई थी। इसके बाद विभाग ने आठ अभ्यर्थियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। यानी इन्हें नौकरी से हटा दिया गया। फिर सीबीआई ने मामला अपने हाथ में ले लिया। इस केस की जांच अब पूरी तरह सीबीआई के पास है।

फर्जी दस्तावेज से नौकरी का जाल

सोचिए एक बार। जो अंकसूची बोर्ड ने जारी नहीं की, कथित तौर पर उसी पर भर्ती हुई। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज से नौकरी पाई गई। सीबीआई की जांच में एक और बात सामने आई है। अलग-अलग अभ्यर्थियों ने अलग-अलग राज्यों के बोर्डों के नाम पर बने दस्तावेज इस्तेमाल किए।

दूसरे राज्यों के बोर्ड का कनेक्शन

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दस्तावेज बिहार, झारखंड और जम्मू-कश्मीर के बोर्डों से संबंधित हैं। फर्जी मार्कशीट (fake marksheet) का जाल कई राज्यों तक फैला बताया जा रहा है। इसलिए जांच सिर्फ जबलपुर और कटनी तक सीमित नहीं है। ये दोनों शहर वे जगहें हैं, जहां से आठ आरोपी पकड़े गए। सीबीआई कई राज्यों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।


जबलपुर से कटनी तक आठ आरोपी

जबलपुर डाकघर (Jabalpur post office) से जुड़े पांच आरोपियों का पोस्टिंग ब्योरा यह है। जानकारी के अनुसार मानवेंद्र सिंह कुंडम के डाकघर में पदस्थ थे। राजा बाबू अहिरवार और सौरभ शर्मा को पाटन भेजा गया।

प्रदीप कुमार की पोस्टिंग उमरिया-बरेला में थी। नयन कुमार शाहपुरा क्षेत्र के डाकघर में तैनात थे। ये सभी जबलपुर के अलग-अलग इलाके हैं।

बद्री प्रसाद यादव, देवेन्द्र सिंह चौहान और रमाकांत शर्मा भी विभाग में पदस्थ थे। इनके डाकघर का ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। कुल आठ में से तीन आरोपी कटनी से पकड़े गए हैं। कटनी डाक विभाग से जुड़ी अलग जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

जांच के दायरे में 30 से ज्यादा नियुक्तियां

30 से ज्यादा संदिग्ध नियुक्तियां अभी जांच के दायरे में हैं। आठ नाम छोटा आंकड़ा लग सकता है। लेकिन संदिग्ध नियुक्तियां इससे करीब चार गुना ज्यादा हैं। इनमें से कितनी फर्जी निकलेंगी, यह जांच पूरी होने पर साफ होगा।

नेटवर्क की तलाश में सीबीआई

अब सवाल उठता है कि ये दस्तावेज कहां बने और किसने बनाए? सीबीआई फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क की तलाश में है। डाक विभाग और बोर्ड से जुड़े संभावित लोगों की भूमिका भी सामने आई है। क्या भर्ती की कड़ी में और लोग भी शामिल थे? इसका जवाब जांच से ही मिलेगा।

सीबीआई तीन बातों की जांच कर रही है। पहली, फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार हुए। दूसरी, उनका इस्तेमाल कैसे हुआ। तीसरी, भर्ती प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी कहां हुई। एक फर्जी अंकसूची किसी योग्य युवा की जगह ले सकती है। अगर आरोप साबित हुए, तो यह ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी होगी। भर्ती की साख दस्तावेजों की सच्चाई पर टिकी होती है। फिलहाल सभी आठ आरोपी हैं, दोषी नहीं। दोष तय करना अदालत का काम है।
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