एमपी की बेटी नीरू ढांडा ने रचा इतिहास: एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर तोड़ा 48 साल पुराना रिकॉर्ड, भारत को दिलाया पहला व्यक्तिगत स्वर्ण
Sumit Kumar | Sept 29, 2026, 15:26 IST
मध्यप्रदेश की बेटी नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में महिला ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
मध्यप्रदेश की बेटी नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रच दिया। मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी से जुड़ी नीरू ने महिला ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को पहला व्यक्तिगत स्वर्ण दिलाया। महू ट्रेनिंग सेंटर से निकली नीरू ने 48 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। नीरू ढांडा की यह उपलब्धि मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी और भारतीय शूटिंग के लिए बड़ी सफलता है।
महू की ट्रेनिंग से एशियन गेम्स के गोल्ड तक पहुंची नीरू
नीरू मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी से भी जुड़ी रही हैं। महू और भोपाल की शूटिंग सुविधाओं ने उनके खेल को नई दिशा दी। यहां लगातार अभ्यास और विशेषज्ञ प्रशिक्षण के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
एशियन गेम्स में उनकी जीत को मध्यप्रदेश के लिए भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जैसे ही नीरू के गोल्ड जीतने की खबर सामने आई, प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई।
फाइनल में 30 में से लगाए 28 सटीक निशाने
इस मुकाबले में नीरू ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने फाइनल में 30 में से 28 निशाने सटीक लगाए। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने एशियाई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।
इससे पहले एशियाई रिकॉर्ड 24 निशानों का था। नीरू ने इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
फाइनल में चीन की सुन युनोंग ने 26 अंक के साथ रजत पदक जीता। वहीं कुवैत की हाजर अब्दुलमलिक ने 21 अंक हासिल कर कांस्य पदक जीता।
टीम इवेंट में भी जीता सिल्वर
महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में नीरू ने आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ मिलकर सिल्वर मेडल जीता।
इस तरह नीरू ने एक ही एशियन गेम्स में दो पदक अपने नाम किए। एक सिल्वर और एक गोल्ड के साथ वह भारत की सफल खिलाड़ियों में शामिल हो गईं।
किसान परिवार से निकलीं गोल्डन गर्ल
नीरू के पिता किसान हैं और मां गृहिणी हैं। साधारण परिवार से आने वाली नीरू के लिए शूटिंग जैसे महंगे खेल में आगे बढ़ना आसान नहीं था।
परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद उनके माता-पिता ने उनके सपनों का साथ दिया। मेहनत और परिवार के भरोसे ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया।
भाई की सफलता से मिली शूटिंग की प्रेरणा
लक्ष्य की सफलता देखकर नीरू को भी शूटिंग में रुचि हुई। शुरुआत में उन्होंने लक्ष्य की बंदूक से अभ्यास किया।
इससे पहले वह परिवार की डबल बैरल बंदूक से टिन के डिब्बों पर निशाना लगाने की प्रैक्टिस करती थीं। धीरे-धीरे उनका जुनून खेल में बदल गया।
इसके बाद उन्होंने मध्यप्रदेश स्टेट शूटिंग अकादमी के ट्रायल में सफलता हासिल की और यहीं से उनके करियर को नई दिशा मिली।
एशियन गेम्स से पहले बीमारी से लड़ीं नीरू
एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले भोपाल में वह गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती हुई थीं। कई दिनों तक वह ट्रेनिंग से दूर रहीं।
इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। कोच मंशर सिंह के प्रोत्साहन और अपने आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने वापसी की और इतिहास बना दिया।
वर्ल्ड कप में भी बना चुकी हैं रिकॉर्ड
जुलाई 2026 में इटली के लोनाटो में हुए ISSF वर्ल्ड कप में उन्होंने महिला ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था।
वह ISSF वर्ल्ड कप में महिला ट्रैप का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। उन्होंने क्वालिफिकेशन में 121/125 का स्कोर किया था।
फाइनल में 30 में से 27 निशाने लगाकर उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया था।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और खेल मंत्री ने दी बधाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीरू की उपलब्धि देश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है।
मध्यप्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने भी नीरू के जीतने पर गदगद हैं। उन्होंने बधाई देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी की खिलाड़ी ने रिकॉर्ड प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाया है।
MP की तीन खिलाड़ियों ने दिखाया दम
नीरू ढांडा के अलावा आशिमा अहलावत और मनीषा कीर ने भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया।
महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में भारतीय टीम ने सिल्वर मेडल जीता है। इससे मध्यप्रदेश की शूटिंग प्रतिभा को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
अब नजर 2028 ओलंपिक पर
महू की शूटिंग रेंज से शुरू हुआ नीरू का सफर अब एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक तक पहुंच चुका है। उनकी सफलता मध्यप्रदेश और देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन गई है।
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