समझें क्या है पूरा मामला
- MP SI भर्ती में उम्र गिनने की तारीख पर हाईकोर्ट में सवाल उठा।
- याचिकाकर्ता 23 सितंबर की जगह 1 जनवरी को आधार चाहते हैं।
- कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 1 जनवरी से उम्र गिनने की छूट दी।
- उन्हें इसी आधार पर भर्ती का फॉर्म भरने की अनुमति मिली है।
- कोर्ट ने सरकार और अन्य पक्षों से जवाब भी मांगा है।
SI भर्ती में 1 जनवरी से तय होगी उम्र
'द सूत्र' ने मध्य प्रदेश की सब इंस्पेक्टर भर्ती में उम्र सीमा का जो मुद्दा उठाया था वह विवाद जबलपुर हाईकोर्ट पहुंचा है। जस्टिस विशाल धगत की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी है। उन्हें 1 जनवरी 2026 के आधार पर उम्र गिनकर फॉर्म भरने की छूट मिली है। कोर्ट ने सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी किया है। उनसे इस मामले में जवाब मांगा गया है। फिलहाल यह राहत याचिकाकर्ताओं को मिली है। उनकी उम्मीदवारी मामले के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।
33 साल की उम्र सीमा बनी विवाद की वजह
याचिका के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम उम्र 33 साल है। आरक्षित वर्ग के लिए अधिकतम उम्र 38 साल बताई गई है। विवाद इसी अधिकतम उम्र की गणना से जुड़ा है। कई उम्मीदवार जनवरी में उम्र सीमा के भीतर हो सकते हैं। लेकिन सितंबर तक उनकी उम्र तय सीमा से ज्यादा हो सकती है। ऐसे उम्मीदवार मौजूदा व्यवस्था में आवेदन से बाहर हो सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने इसी अंतर को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
23 सितंबर की जगह 1 जनवरी क्यों मांगी गई
SI भर्ती 2026 के आवेदन 9 सितंबर से शुरू हुए हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 23 सितंबर 2026 है। याचिका में इसी तारीख को उम्र का आधार बताया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भर्ती वर्ष 2026 है। इसलिए उम्र की गणना 1 जनवरी 2026 से होनी चाहिए। उनका दावा है कि 2013 के राजपत्र में भी यही व्यवस्था बताई गई है। इसी आधार पर उन्होंने मौजूदा उम्र गणना को चुनौती दी है। अब हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम तौर पर राहत दी है।
ओवरएज होने वालों को सबसे ज्यादा असर
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने उम्र सीमा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि SI भर्ती नियमित रूप से जारी नहीं होती है। उम्मीदवार कई बार लंबे समय तक भर्ती का इंतजार करते हैं। इस दौरान कुछ उम्मीदवार अधिकतम उम्र सीमा पार कर जाते हैं। उन्होंने बताया कि दो, चार, आठ और नौ महीने का अंतर भी अहम है। ऐसे उम्मीदवार 1 जनवरी को पात्र हो सकते हैं। लेकिन 23 सितंबर को वे ओवरएज हो सकते हैं। इसी वजह से उम्र की तारीख को लेकर विवाद बढ़ा है।
दूसरी भर्तियों में 1 जनवरी का आधार होने का दावा
याचिकाकर्ताओं ने दूसरी भर्ती परीक्षाओं के नियम भी कोर्ट में रखे। उनके अनुसार अस्पताल सहायक भर्ती में 1 जनवरी 2026 को आधार बनाया गया है। ग्रुप-2 भर्ती में भी 1 जनवरी की तारीख बताई गई है। जेल प्रहरी और जेल अधीक्षक भर्ती का भी उदाहरण दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एक ही भर्ती वर्ष में तारीख अलग नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार समान पदों और समान भर्ती वर्ष में अलग नियम सवाल खड़े करते हैं। इसी अंतर को उनकी याचिका का मुख्य आधार बनाया गया है।
2013 के राजपत्र का भी दिया गया हवाला
अधिवक्ता दिनेश सिंह चौहान ने सुनवाई में 2013 के राजपत्र का हवाला दिया। उनका कहना है कि भर्ती वर्ष के आधार पर उम्र तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नियम बनने के समय उम्र गणना का आधार तय किया गया था। उनके अनुसार विभाग को उसी व्यवस्था के अनुसार भर्ती करनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने अपने अभ्यावेदन में भी यही मांग रखी थी। उन्होंने 19 अगस्त 2026 को संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया था। राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट के नोटिस के बाद सरकार देगी जवाब
कोर्ट ने इस मामले में सरकार और संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। अब सरकार को उम्र गणना की मौजूदा व्यवस्था पर जवाब देना होगा। MPESB और अन्य संबंधित पक्ष भी अपना पक्ष रख सकते हैं। इसके बाद कोर्ट इस मामले पर आगे सुनवाई करेगा। अभी कोर्ट ने केवल अंतरिम राहत दी है। इसलिए उम्र गणना का अंतिम नियम अभी तय नहीं हुआ है। अंतिम फैसला आने के बाद भर्ती की स्थिति पूरी तरह साफ होगी।
दूसरे उम्मीदवारों पर भी पड़ सकता है
इस मामले का असर उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर वे उम्मीदवार प्रभावित हो सकते हैं, जो अधिकतम उम्र के करीब हैं। याचिकाकर्ताओं ने समान स्थिति वाले उम्मीदवारों को भी राहत देने की मांग की है। हालांकि अभी आदेश की राहत याचिकाकर्ताओं से जुड़ी है। दूसरे उम्मीदवारों को स्वतः राहत मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। आगे कोर्ट के आदेश से इसकी स्थिति साफ हो सकती है।
पुलिस की दूसरी भर्तियों का भी उठ सकता है सवाल
अधिवक्ता चौहान ने पुलिस कांस्टेबल भर्ती का भी उदाहरण दिया है। उन्होंने ASI और LDC भर्ती का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि वहां भी उम्र गणना का सवाल उठ सकता है। हालांकि इन भर्तियों को लेकर इस मामले में कोई अंतिम आदेश नहीं हुआ है। हर भर्ती के नियम अलग से देखे जाएंगे। SI भर्ती में मिली अंतरिम राहत को दूसरी भर्तियों पर सीधे लागू नहीं माना जा सकता। इसके लिए अलग आदेश या नियम जरूरी होंगे।
अब आगे की सुनवाई पर टिकी नजर
फिलहाल इस मामले में याचिकाकर्ताओं को अहम अंतरिम राहत मिल गई है। वे 1 जनवरी 2026 को उम्र का आधार मानकर फॉर्म भर सकेंगे। उनकी उम्मीदवारी अंतिम कोर्ट फैसले के अधीन रहेगी। सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा गया है। अब अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आएगा। इसके बाद उम्र गणना के नियम पर स्थिति और साफ होगी। फिलहाल SI भर्ती में 1 जनवरी और 23 सितंबर की तारीखों का अंतर सबसे अहम मुद्दा बना है।
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