छात्राओं की साइकिल चोरी कर UP में बेचने वाले थे सिंगरौली प्रिंसिपल, FIR के बाद निलंबित
Sanjeet kumar dhurwey | Jul 18, 2025, 24:01 IST
Photograph: (the sootr)
सिंगरौली के प्रभारी प्रिंसिपल जयकांत कुमार को 23 साइकिलें चुराकर उत्तर प्रदेश बेचने के प्रयास के कारण सस्पेंड कर दिया गया है। FIR दर्ज करने के बाद जांच जारी है।
सिंगरौली के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खटाई के प्रभारी प्रिंसिपल जयकांत कुमार को साइकिल चोरी और बेचने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है। उन्होंने शैक्षणिक सत्र 2023- 24 में सरकारी योजना के तहत मिलने वाली 23 साइकिलें चुराई थीं। उन्हें उत्तर प्रदेश में बेचने के लिए भेजने की कोशिश की।
इस मामले को लेकर पुलिस ने 8 जुलाई को उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया था। जब वह छात्राओं को देने वाली साइकिल की चोरी कर मिनी ट्रक में लोड करा रहे थे। इस मामले में एफआईआर के बाद अब निलंबन की कार्रवाई की गई है। सिंगरौली कलेक्टर की अनुशंसा पर रीवा कमिश्नर बाबू सिंह जामोद ने आरोपी प्रभारी प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया है।
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गायब की गई 23 साइकिल की कुल कीमत 1 लाख 3 हजार 500 रुपए है। चितरंगी थाने में प्रभारी प्रिंसिपल के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत गंभीर कदाचरण का मामला दर्ज किया गया है।
कलेक्टर जिला सिंगरौली की अनुशंसा पर रीवा कमिश्नर के द्वारा जयकांत कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन की अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सिंगरौली में अटैच किया गया है। बता दें कि नियम के अनुसार हर निलंबित कर्मचारी को यह भत्ता दिया जाता है।
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मध्य प्रदेश में स्कूल चले हम अभियान के तहत कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे। बच्चों के गांव में स्कूल न होने पर पढ़ाई छूट जाती थी। इसके समाधान के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना की शुरुआत की थी। यह योजना वर्ष 2004 में शुरू की गई थी।
इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में बच्चों की पढ़ाई में परिवहन का अभाव बाधा न बने, इसके लिए इसकी शुरुआत की थी। इस योजना के माध्यम से अपने गांव से दूर पढ़ने के लिए बच्चों को साइकिल वितरण की शुरुआत की गई।
शुरुआत में साइकिल की राशि 4 हजार 500 रुपए प्रदान किए गए थे। इसके बाद बच्चों को साइकिल वितरण की जाने लगी। यह साइकिल उन बच्चों को दी जाती है, जिनके घर से स्कूल कम से कम 1 किलोमीटर से ज्यादा दूर है या फिर दूसरे गांव में हैं।
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इस मामले को लेकर पुलिस ने 8 जुलाई को उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया था। जब वह छात्राओं को देने वाली साइकिल की चोरी कर मिनी ट्रक में लोड करा रहे थे। इस मामले में एफआईआर के बाद अब निलंबन की कार्रवाई की गई है। सिंगरौली कलेक्टर की अनुशंसा पर रीवा कमिश्नर बाबू सिंह जामोद ने आरोपी प्रभारी प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया है।
Singroli Principal suspended
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साइकिल चोरी में था प्रिंसिपल का हाथ
साइकिल वितरण योजना मप्र के तहत एमपी सरकार 6वीं और 9वीं कक्षा के बच्चों को स्कूल आने-जाने के लिए नि:शुल्क साइकिलें वितरित करती है। 2023 में खटाई स्कूल में कुल 134 साइकिलें दी गई थीं। इन साइकिल्स में से 23 गायब हो गईं। इनको प्रभारी प्रिंसिपल ने चोरी करके अपनी परिचित सीता देवी के घर में रखवा दी थीं।
5 पॉइंट्स में समझें साइकिल चोरी की पूरी खबरसाइकिल चोरी और बेचने का आरोप: सिंगरौली के खटाई स्कूल के प्रभारी प्रिंसिपल जयकांत कुमार को 2023-24 में 23 साइकिलें चुराने और उन्हें उत्तर प्रदेश बेचने के प्रयास में पकड़ा गया है।साइकिल वितरण योजना में गड़बड़ी: मध्यप्रदेश सरकार 6वीं और 9वीं के छात्रों को नि:शुल्क साइकिलें देती है, लेकिन इनमें से 23 साइकिलें गायब हो गईं, जिन्हें जयकांत कुमार ने चोरी करवाई थी। एफआईआर और कानूनी कार्रवाई: चितरंगी थाने में प्रभारी प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत कदाचरण का मामला दर्ज किया गया है। निलंबन की कार्रवाई: कलेक्टर सिंगरौली ने जयकांत कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। साइकिल की कीमत: चुराई गई 23 साइकिलों की कुल कीमत 1 लाख 3 हजार 500 रुपए हैं, और इस मामले की जांच जारी है। | |
थाने में प्रिंसिपल के खिलाफ क्यों हुई एफआईआर?
निलंबन के दौरान किसे मिलता है भत्ता?
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मप्र नि:शुल्क साइकिल वितरण योजना क्या है?
इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में बच्चों की पढ़ाई में परिवहन का अभाव बाधा न बने, इसके लिए इसकी शुरुआत की थी। इस योजना के माध्यम से अपने गांव से दूर पढ़ने के लिए बच्चों को साइकिल वितरण की शुरुआत की गई।
शुरुआत में साइकिल की राशि 4 हजार 500 रुपए प्रदान किए गए थे। इसके बाद बच्चों को साइकिल वितरण की जाने लगी। यह साइकिल उन बच्चों को दी जाती है, जिनके घर से स्कूल कम से कम 1 किलोमीटर से ज्यादा दूर है या फिर दूसरे गांव में हैं।
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