MP में पेड़ कटाई अब पड़ सकती है भारी, बिना अनुमति कटाई यानी कोर्ट की अवमानना

Neel Tiwari | Feb 18, 2026, 23:40 IST
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mp tree cutting without
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर सख्त रोक लगाते हुए बिना अनुमति कटाई को कोर्ट की अवमानना माना। कोर्ट ने 4000 से अधिक पेड़ों की अनुमति पर सवाल उठाया, अवमानना याचिका दायर करने की तैयारी की जा रही है।

News in short

  • चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में सुनवाई।
  • सरकार ने कहा- 9 मार्च को National Green Tribunal में सुनवाई तय, इसलिए स्थगन की मांग।
  • अधिवक्ता हरप्रीत गुप्ता ने आरोप लगाया 4000 से अधिक पेड़ों की अनुमति बिना एनजीटी कमेटी स्वीकृति।
  • पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे की PIL को स्वतः संज्ञान याचिका के साथ जोड़कर 18 मार्च 2025 तय।
  • हाईकोर्ट की साफ टिप्पणी: बिना अनुमति कटाई पर पूर्ण रोक।

News in detail

जबलपुर हाईकोर्ट की तरफ से लगाई गई रोक के बाद भी मध्य प्रदेश में पेड़ों की कटाई अब जिम्मेदारों को भारी पड़ सकती है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने साफ कर दिया कि बिना अनुमति पेड़ कटाई पर रोक प्रभावी है। अब अवमानना याचिका दायर करने की तैयारी है। अगली सुनवाई 18 मार्च 2025 को होगी।

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क्या बोले चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ?

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कहा कि पूरे मध्यप्रदेश में पेड़ों की कटाई पर रोक लागू है। यह रोक शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में है। कोर्ट ने कहा कि अगर आदेश का उल्लंघन हो रहा है, तो संबंधित पक्ष एनजीटी के समक्ष जाएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप करने वाले अधिवक्ता अवमानना याचिका दायर करेंगे।

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4000 से अधिक पेड़ों की कटाई अनुमति पर सवाल

हस्तक्षेपकर्ता अधिवक्ता हरप्रीत गुप्ता ने 2 फरवरी के समाचारों का हवाला दिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद 4000 पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई। उनका आरोप था कि यह अनुमति एनजीटी की स्वीकृति के बिना दी गई, जो कोर्ट के आदेश की अवहेलना है।

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अब दायर होगी अवमानना याचिका

अधिवक्ता गुप्ता ने दलील दी कि एनजीटी दिल्ली स्तर पर नीति निर्माण की प्रक्रिया में है। इसमें समय लग सकता है और तब तक हजारों पेड़ काट दिए जाएंगे। इस पर कोर्ट ने मौखिक रूप से सुझाव दिया कि यदि आदेश का उल्लंघन हो रहा है, तो अवमानना याचिका दायर की जाए। अब अधिवक्ता हरप्रीत गुप्ता द्वारा कोर्ट की अवमानना का मामला दायर करने की तैयारी की जा रही है।

5 साल में 408 वर्ग किमी वन क्षेत्र खत्म

पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे की जनहित याचिका को स्वतः संज्ञान याचिका के साथ टैग किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखा। याचिका में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में मध्य प्रदेश में 408 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र समाप्त हो चुका है। यह गंभीर नुकसान है।

1.24 लाख पेड़ों पर खतरा

याचिका में बताया गया कि महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के तहत घने जंगलों से गुजरने वाले हिस्से में 1.24 लाख पेड़ काटे जा सकते हैं। यह परियोजना विकास के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन पर्यावरणीय दृष्टिकोण से यह चिंता का विषय है।

528.59 लाख हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में

याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 528.59 लाख हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण की चपेट में है। केंद्र सरकार द्वारा 21 अगस्त 2025 को राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, यह आंकड़ा देश में सर्वाधिक है। मध्य भारत में मध्य प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य बताया गया है जहां वन क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है।

2026 में 15 लाख पेड़ कटने का अनुमान

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि केवल वर्ष 2026 में विकास परियोजनाओं के नाम पर 15 लाख पेड़ काटे जाने की संभावना है। इनमें 100 वर्ष से अधिक पुराने पेड़ भी शामिल हैं। यह स्थिति न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए पर्यावरणीय आपदा का संकेत मानी जा रही है।

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18 मार्च 2025 को अगली सुनवाई

डिविजनल बेंच ने पूरे मामले को स्वतः संज्ञान याचिका के साथ जोड़ते हुए 18 मार्च 2025 की तारीख अगली सुनवाई के लिए तय की है। अब नजर इस बात पर है कि क्या अवमानना याचिका दायर होती है। एनजीटी स्तर पर क्या रुख सामने आता है। मध्य प्रदेश में विकास बनाम पर्यावरण की यह जंग फिलहाल अदालत की चौखट पर है। अब आने वाली तारीख इस बहस को क्या नई दिशा देती है यह देखना होगा।

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