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Photograph: (THESOOTR)
राइट टाउन स्थित दिवंगत नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की प्रॉपर्टी विवाद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। दानपत्र, वसीयत और फर्जीवाड़े के आरोपों के बीच अब नगर निगम ने बड़ा कदम उठा लिया है। लीज रद्द कर जमीन को निगम के कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
News in Short
- जबलपुर नगर निगम ने प्लॉट क्रमांक 51, राइट टाउन की लीज निरस्त की।
- 24 घंटे का नोटिस दिया गया, कोई दावेदार दस्तावेज लेकर सामने नहीं आया।
- 2020-21 से लीज राशि जमा नहीं, कई शर्तों का उल्लंघन।
- बिना अनुमति दानपत्र और वसीयत को माना गया नियम विरुद्ध।
- करीब 25,047 वर्गफीट जमीन अब निगम के नियंत्रण में जाएगी।
News In Detail
क्या था पूरा मामला?
डॉ. हेमलता श्रीवास्तव जबलपुर की जानी-मानी नेत्र रोग विशेषज्ञ थीं। उनके पति और बेटे की मृत्यु के बाद राइट टाउन स्थित प्रेम मंदिर के पास की उनकी बेशकीमती जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ। बताया गया कि करीब 11 हजार वर्गफीट जमीन डॉ. सुमित जैन और प्राची जैन के नाम दानपत्र के जरिए ट्रांसफर की गई, जबकि लगभग 14 हजार वर्गफीट जमीन एक धार्मिक संस्था गायत्री परिवार के नाम वसीयत की गई।
इस दौरान उनकी लगातार बिगड़ती तबीयत के पीछे उनके अपनों के ही होने के आरोप लगे। प्रॉपर्टी का दान पत्र उसे समय बनवाया गया जब डॉक्टर हेमलता कोई बयान देने की हालत में ही नहीं थी। इसी बंटवारे को लेकर परिवार और अन्य पक्षों के बीच विवाद खड़ा हुआ और IMA सहित मीडिया के हस्तक्षेप के बाद मामला प्रशासन तक पहुंच गया।
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जांच में क्या सामने आया?
डॉ. हेमलता की मृत्यु के बाद प्रशासन ने जमीन पर दावा करने के लिए 24 घंटे का नोटिस चस्पा किया था, लेकिन तय समय सीमा में कोई भी पक्ष वैध दस्तावेज लेकर सामने नहीं आया। जबलपुर नगर निगम की जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2020-21 से लीज की राशि जमा नहीं की गई थी। साथ ही लीज की शर्त क्रमांक 3, 6, 7 और 8 का उल्लंघन पाया गया। बिना नगर निगम की अनुमति के दानपत्र और वसीयत के जरिए जमीन हस्तांतरित करने को नियमों के खिलाफ माना गया।
नगर निगम ने इसलिए रद्द की लीज
प्लॉट क्रमांक 51 की कुल जमीन 25,047 वर्गफीट है और यह नगर निगम की लीज पर थी। रिकॉर्ड में पट्टेधारी के रूप में डॉ. हेमलता के पति, ससुर और बेटे के नाम दर्ज थे। नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के निर्देश पर उपायुक्त शिवांगी महाजन की जांच रिपोर्ट के आधार पर लीज निरस्तीकरण का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। निगम का कहना है कि लीज शर्त क्रमांक 6 के तहत उसे जमीन पर दोबारा कब्जा लेने का अधिकार है, इसलिए अब जमीन को निगम अपने आधिपत्य में लेगा।
खुलेगा स्वास्थ्य विभाग का उप-कार्यालय
लगभग 50 करोड़ की यह संपत्ति अब वापस निगम के कब्जे में आ गई है। निगम ने यह भी तय कर लिया है कि अब इस प्रॉपर्टी का क्या करना है। निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने बताया कि इस भूमि पर अब संभाग क्रमांक 13, स्वास्थ्य विभाग का उप-कार्यालय खोला जाएगा और इस कार्यालय के माध्यम से जनहित के कार्य किए जाएंगे।
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अब आगे क्या?
नगर निगम की इस कार्रवाई के बाद जमीन से जुड़े सभी पुराने दावे स्वतः कमजोर हो गए हैं। अब यदि किसी पक्ष को दावा करना है तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे आना होगा। फिलहाल प्रशासन जमीन को अपने नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। करोड़ों की इस जमीन का विवाद अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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