क्या एमपी में नहीं हुआ एसआईआर का असर? 58 लाख एक्स्ट्रा वोटर, गांव-शहर दोनों लिस्ट में नाम
Kaushiki | May 19, 2026, 09:50 IST
SIR
मध्यप्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी पकड़ाई है। विधानसभा और निकाय सूचियों में 58 लाख मतदाताओं का अंतर मिला है। कई वोटरों के नाम गांव और शहर दोनों सूचियों में हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश की विधानसभा और निकाय वोटर लिस्ट में 58 लाख मतदाताओं का अंतर मिला है।
- कई वोटरों के नाम गांव और शहर यानी पंचायत और नगरीय निकाय दोनों सूचियों में दर्ज हैं।
- एसआईआर (Special Summary Revision) के बाद भी डुप्लीकेट नाम स्थानीय निकायों की लिस्ट में बने हुए हैं।
- राज्य निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय चुनाव आयोग से अपडेटेड सूची मांगी पर पांच रिमाइंडर के बाद भी नहीं मिली।
- 2027 के जून-जुलाई में 413 नगरीय निकायों और करीब 23 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव होने हैं।
मध्य प्रदेश में 58 लाख वोटर ज्यादा कैसे?
यह फर्क अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करता है। चुनाव से पहले होने वाली पड़ताल में यह आंकड़ा सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 22 अप्रैल से जिला स्तर पर अलग से वोटर लिस्ट को खंगालने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी में यह बड़ा अंतर पकड़ाया।
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कौन हैं ये 58 लाख अतिरिक्त वोटर
दूसरा और बड़ा कारण है शिफ्टेड वोटर यानी ऐसे लोग जो गांव छोड़कर शहर में बस गए। लेकिन पंचायत की सूची से नाम नहीं कटवाया। इससे उनका नाम पंचायत और नगरीय निकाय दोनों सूचियों में बना हुआ है। यही वजह है कि कुल संख्या असल से कहीं ज्यादा दिखती है।
SIR के बाद भी क्यों नहीं सुधरी गड़बड़ी
दो आयोगों के बीच फंसा पेंच
दूसरी तरफ संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आर.पी. सिंह जादौन का कहना है कि केंद्रीय चुनाव आयोग की नीति के मुताबिक रिवीजन प्रक्रिया के दौरान सूची साझा नहीं की जाती।
आर.पी. सिंह जादौन ने स्पष्ट किया कि वास्तविक चुनाव के समय नियमों के अनुसार सूची उपलब्ध करा दी जाएगी। यानी दोनों आयोगों की अपनी-अपनी दलील है और इसी वजह से यह पेंच फंसा हुआ है।
कितने बड़े होंगे ये चुनाव
क्या होगा आगे
अगर केंद्रीय चुनाव आयोग (Voter List) से अपडेटेड सूची मिल जाए तो काम और आसान हो जाएगा। लेकिन जब तक यह पेंच नहीं सुलझता तब तक दोनों आयोगों के बीच का यह अंतर बना रहेगा।
यह खबर क्यों जरूरी है
ऐसे में अगर वोटर लिस्ट में 58 लाख अतिरिक्त नाम हैं तो यह चुनावी पारदर्शिता पर सीधा सवाल है। डुप्लीकेट वोटरों की मौजूदगी फर्जी मतदान की आशंका को जन्म देती है जो लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है।
यह खबर मध्यप्रदेश के करोड़ों मतदाताओं से जुड़ी है जिन्हें यह जानने का हक है कि उनके वोट की ताकत कहीं पतली तो नहीं हो रही। दो संवैधानिक संस्थाओं के बीच सूचना साझा न होने का यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही का भी सवाल है। डिजिटल और सामाजिक नैतिकता के नजरिए से यह पूरी तरह तथ्यात्मक और संतुलित खबर है।
FAQ
- मध्यप्रदेश की वोटर लिस्ट में 58 लाख एक्स्ट्रा वोटर कहां से आए?
केंद्रीय चुनाव आयोग की विधानसभावार सूची में मध्यप्रदेश में 5 करोड़ 39 लाख मतदाता हैं जबकि राज्य निर्वाचन आयोग की नगरीय निकाय और पंचायत सूची में यह संख्या 5 करोड़ 97 लाख है। इस 58 लाख के फर्क के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं। पहला, ऐसे मतदाता जिनका नाम एक ही निकाय में दो जगह दर्ज है। दूसरा, ऐसे लोग जिनका नाम जिले के दो अलग-अलग नगरीय निकायों की सूची में है। तीसरा, गांव से शहर शिफ्ट हुए लोग जिन्होंने पंचायत सूची से नाम नहीं कटवाया और इस तरह उनका नाम दोनों जगह बना हुआ है। - एसआईआर के बाद भी मध्य प्रदेश वोटर लिस्ट में गड़बड़ी क्यों रही?
एसआईआर यानी स्पेशल समरी रिवीजन विधानसभा चुनावों की सूची में डुप्लीकेट नाम हटाने के लिए किया गया था। लेकिन यह सफाई स्थानीय निकायों की वोटर लिस्ट में नहीं हुई क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग को एसआईआर के बाद की अपडेटेड सूची केंद्रीय चुनाव आयोग से नहीं मिली। आयोग ने पांच बार रिमाइंडर भेजे लेकिन केंद्रीय चुनाव आयोग की नीति के अनुसार रिवीजन प्रक्रिया के दौरान सूची साझा नहीं की जाती। इस वजह से दोनों सूचियों में अंतर बना रहा। - मध्यप्रदेश में अगले निकाय चुनाव कब होंगे और वोटर लिस्ट कब तक सुधरेगी?
मध्यप्रदेश में 413 नगरीय निकायों और करीब 23 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव अगले साल यानी 2026 के जून-जुलाई में होने हैं। वोटर लिस्ट सुधारने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने 22 अप्रैल से जिला स्तर पर अलग से सूची खंगालने और अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू की है। केंद्रीय चुनाव आयोग का कहना है कि वास्तविक चुनाव के समय नियमानुसार अपडेटेड सूची उपलब्ध करा दी जाएगी।
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