एमपी मतदाता सूची से हटे 28 लाख नाम, अब नई वोटर लिस्ट से होंगे चुनाव
Kaushiki | Jul 30, 2026, 10:50 IST
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मध्य प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष अभियान के तहत मतदाता सूची से 28 लाख फर्जी मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। अकेले भोपाल से 1.25 लाख नाम कटे हैं। अब नई और सही वोटर लिस्ट के आधार पर ही आने वाले समय में निकाय चुनाव कराए जाएंगे।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश में स्टेट इलेक्शन कमीशन ने बड़ा डोर-टू-डोर सर्वे कराया है।
- इस विशेष अभियान में प्रदेशभर से 28 लाख फर्जी मतदाता पाए गए है।
- भोपाल जिले से अकेले 1.25 लाख अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए है।
- इस लिस्ट में मृत और दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके लोग शामिल थे।
- अब नई वोटर लिस्ट से ही आने वाले निकाय और पंचायत चुनाव होंगे।
मध्य प्रदेश में बड़ा सर्वे अभियान
इस दौरान अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं का फिजिकल वेरिफिकेशन किया है। जांच में प्रदेशभर से 28 लाख फर्जी नाम सामने आए। इन सभी नामों को अब मतदाता सूची से हटा दिया गया है। आयोग का मकसद पूरी तरह से निष्पक्ष चुनाव कराना है।
भोपाल में हटे 1.25 लाख फर्जी नाम
कई लोग स्थाई रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके थे। फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान ये लोग मौके पर नहीं पाए गए। इसके बाद नियमानुसार इनके नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का आंकड़ा
यानी पंचायत क्षेत्रों का मतदाता आधार शहरी क्षेत्रों से करीब ढाई गुना ज्यादा है। ग्रामीण इलाकों में पुरुष मतदाताओं की संख्या महिलाओं से करीब 12 लाख ज्यादा है।
एक साल में कितने वोटर घटे
इन दोनों आंकड़ों की तुलना करने पर एक साल में करीब 28 लाख वोटर कम हो गए। इनमें शहरी क्षेत्र में 13.45 लाख और गांवों में 14.80 लाख मतदाता घटे हैं। आयोग के मुताबिक मृत्यु, स्थानांतरण और दोहरी प्रविष्टियों की वजह से भी कई नाम सूची से हटाए गए हैं।
शहरों में साढ़े छह लाख महिला वोटर कम हुईं
अंतिम सूची में यह संख्या घटकर करीब 78.74 लाख रह गई है। यानी शहरी क्षेत्रों में करीब 6.90 लाख महिला मतदाता कम हुई हैं। इसी दौरान थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या भी घटकर 937 रह गई है।
एसआइआर के बाद फिर बढ़े मतदाता
इसमें 2.79 करोड़ पुरुष और 2.60 करोड़ महिला मतदाता शामिल थीं। लेकिन अब राज्य निर्वाचन आयोग की सूची में 5.67 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं। एसआइआर के आंकड़ों से तुलना करें तो करीब 27.40 लाख मतदाता फिर से बढ़ गए हैं।
23 अप्रैल से 30 जुलाई तक चला अभियान
टीमों ने मौके पर जाकर हर एक नागरिक का डेटा जांचा। जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, उनका नाम तुरंत हटाए गए। फर्जी एंट्री रोकने के लिए यह कदम बहुत कारगर साबित हुआ है।
केंद्र और राज्य की सूची में बड़ा अंतर
नई वोटर लिस्ट से होंगे आगामी चुनाव
आयोग द्वारा जारी अंतिम प्रकाशित सूची ही ऑथॉरिजेड मानी जाएगी। इसमें केवल उन्हीं लोगों के नाम हैं जिनका वेरिफिकेशन सही मिला है। नए 18 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं को भी जोड़ा गया है।
FAQ
- मध्य प्रदेश की मतदाता सूची से कितने फर्जी नाम हटाए गए हैं?
राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष डोर-टू-डोर सत्यापन अभियान के तहत मध्य प्रदेश की वोटर लिस्ट से लगभग 28 लाख फर्जी और अपात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इनमें से अकेले भोपाल जिले से 1.25 लाख नाम बाहर किए गए हैं। - मतदाता सूची से किन लोगों के नाम हटाए गए हैं?
इस सर्वे के दौरान ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या जो स्थाई रूप से किसी दूसरी जगह रहने चले गए थे। भौतिक सत्यापन में मौके पर न पाए जाने वाले अपात्र लोगों को सूची से बाहर किया गया है। - अब मध्य प्रदेश में होने वाले स्थानीय चुनाव किस वोटर लिस्ट से होंगे?
आने वाले समय में होने वाले नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद और ग्राम पंचायत चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी की गई इसी नई और अंतिम प्रकाशित वोटर लिस्ट के आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराए जाएंगे।
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