FCI के मानकों में फेल हुआ 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं, MP के किसानों का फंसा पैसा
Anjali Dwivedi | May 09, 2026, 16:47 IST
mp wheat procurement fci rejects wheat
मध्य प्रदेश में 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं रिजेक्ट होने से किसानों का भुगतान अटक गया है। उज्जैन खरीदी में सबसे आगे है, जबकि नर्मदापुरम में सबसे ज्यादा गेहूं मानकों पर फेल हुआ है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
News in short
- 17 हजार मीट्रिक टन गेहूं रिजेक्ट होने से प्रदेश के हजारों किसानों का पैसा अटक गया है।
- सबसे अधिक 3500 मीट्रिक टन गेहूं नर्मदापुरम जिले में रिजेक्ट किया गया।
- रिकॉर्ड 4.79 लाख मीट्रिक टन खरीदी के साथ उज्जैन प्रदेश में सबसे आगे है।
- रीवा संभाग में परिवहन की गति सबसे कम है, मऊगंज में मात्र 31 प्रतिशत ही उठाव हुआ है।
- अगले 15 दिनों में प्रदेश को 100 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य पूरा करना है।
News in detail
तकनीकी मानकों पर खरा न उतरने के कारण इस गेहूं की स्वीकार्यता (Acceptability) रुक गई है, जिसका सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ा है। जब तक यह गेहूं स्वीकार नहीं होता, तब तक किसानों के बैंक खातों में पैसा नहीं पहुंचेगा।
मानकों की कसौटी पर नर्मदापुरम फेल
इस पर अधिकारियों का कहना है कि यह गेहूं खराब नहीं है, लेकिन सरकारी मानकों को पूरा नहीं करता। अब इस रिजेक्टेड स्टॉक की दोबारा ग्रेडिंग कराई जा रही है ताकि इसे फिर से भेजा जा सके।
खरीदी के मामले में उज्जैन नंबर-1 पर
वहीं, राजधानी भोपाल ने खरीदे गए माल को सुरक्षित गोदामों तक पहुंचाने में बाजी मारी है। भोपाल में 92% गेहूं का परिवहन हो चुका है और यहां के 90% स्टॉक को एफसीआई ने हरी झंडी दे दी है।
सर्वर और मैपिंग की दूर हुई बाधा
इसके साथ ही तौलकांटों की संख्या बढ़ाने और देर रात तक तुलाई होने से व्यवस्था में सुधार दिखा। इससे अब तक 54 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीदी (गेहूं का समर्थन मूल्य) संभव हो पाई है।
परिवहन के मामले में रीवा संभाग पीछे
दूसरी ओर, राजगढ़, उज्जैन, मंदसौर और हरदा जैसे जिले मिसाल बनकर उभरे हैं, जहां का एक दाना भी रिजेक्ट नहीं हुआ। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती 100 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य को अगले 15 दिनों में पूरा करने की है।
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