MPPSC के FSO में केवल दो सामान्य चयनित, फिर गर्माई ओबीसी और सामान्य वर्ग आरक्षण की बहस

Sanjay Gupta | Jun 23, 2026, 14:30 IST
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FSO रिजल्ट से फिर OBC vs सामान्य
FSO रिजल्ट से फिर OBC vs सामान्य

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने 17 साल बाद हुई फूड सेफ्टी ऑफिसर का रिजल्ट जारी कर दिया है। अनारक्षित की सीट मेरिट के आधार पर केवल दो ही सामान्य को मिली है। इसके बाद सामान्य वर्ग का गुस्सा फूट रहा है और कह रहे हैं कि फिर ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी क्यों देना चाहिए।

मध्यप्रदेश में फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट को अब जल्द 101 नए फूड सेफ्टी ऑफिसर मिल जाएंगे। एमपी में 17 साल बाद यह परीक्षा कुल 123 पदों के लिए हुई थी। इसके रिजल्ट पर लगी रोक हाईकोर्ट ने बीते सप्ताह हटाई थी। इसके बाद इसका रिजल्ट सोमवार, 23 जून की शाम को जारी किया गया है। वहीं, रिजल्ट में 22 अनारक्षित सीटों में से केवल दो सामान्य वर्ग के चयनित हुए हैं। इसके बाद सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट रहा है।

बिना आरक्षण वाले सामान्य के हाथ इस तरह दो पद

अनारक्षित कैटेगरी में कुल 30 पद थे। इसमें दिव्यांग कैटेगरी और एक्स सर्विसमैन को छोड़ दें तो अनारक्षित पुरुष के 12 पदों का और अनारक्षित महिला कैटेगरी में 10 पदों का रिजल्ट जारी हुआ है। लेकिन इसमें बिना किसी आरक्षण वाले सामान्य के हाथ केवल दो पद लगे हैं।

अनारक्षित 12 पद मेल में यह हुआ

इसमें आठ पद ओबीसी कैटेगरी के पास, दो ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में, एक एससी कैटेगरी के पास और एक पद सामान्य कैटेगरी के अभ्यर्थी के पास गया है।

अनारक्षित 10 पद फीमेल में यह हुआ

वहीं दस पद फीमेल वाले जो रिजल्ट आए हैं, इसमें पांच पद ओबीसी कैटेगरी, चार ईडब्ल्यूएस व एक पद सामान्य महिला को मिला है।

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अब क्या बोल रहे सामान्य वर्ग अभ्यर्थी

सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी कह रहे हैं कि अभी यह हाल है जब 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण होगा तो फिर तो सामान्य वर्ग के हाथ कुछ नहीं आएगा। ओबीसी, एसटी, एससी सभी कैटेगरी में उनकी सीट तय है। इसमें कोई अन्य कैटेगरी या सामान्य वाला नहीं जा सकता है।

साथ ही, अभ्यर्थी कहा कि कहने को सामान्य वर्ग के लिए 50 फीसदी सीट कही जाती है लेकिन यह अनारक्षित कैटेगरी की होती है। इसमें मेरिट के आधार पर किसी भी कैटेगरी का अभ्यर्थी सीट ले सकता है। ऐसे में फिर ओबीसी आरक्षण में बढ़ोतरी की मांग नहीं होना चाहिए।



लेकिन ईडब्ल्यूएस भी तो सामान्य वर्ग है

लेकिन वहीं अन्य अभ्यर्थियों का कहना है कि सामान्य वर्ग में गरीब वर्ग को 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस आरक्षण मिलता है। इसमें तो कोई अन्य कैटेगरी वाला प्रवेश नहीं करता है। वहीं अनारक्षित में ईडब्ल्यूएस वाला भी मेरिट से जगह बनाता है। ऐसे में सामान्य वर्ग को प्रतिनिधित्व मिलता है। जैसे इसी परीक्षा में अनारक्षित कैटेगरी के कुल 22 पदों में ईडब्ल्यूएस वाले छह पद लेकर गए हैं। इसमें मेल कैटेगरी में दो और फीमेल कैटेगरी में चार पद गए हैं।

उधर ओबीसी वालों का कहना है कि मध्यप्रदेश में 50 फीसदी से अधिक जनसंख्या ओबीसी की है तो फिर इतना आरक्षण उन्हें मिलना चाहिए। मप्र शासन भी सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट में यही तर्क दे रही है।

मप्र में क्या चल रहा है विवाद

मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर विवाद साल 2019 से चल रहा है। जब कमलनाथ सरकार ने ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी किया था। वहीं, इसके बाद मामले हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक गए और अंतरिम आदेश के तहत ओबीसी आरक्षण 14 फीसदी से अधिक देने पर रोक लगी।

मामला अंतिम सुनवाई के लिए अब हाईकोर्ट जबलपुर में चल रहा है। वहीं मप्र शासन ने सितंबर 2022 में ओबीसी विवाद के चलते रिजल्ट होल्ड होने के कारण 87-13 फीसदी फॉर्मूला जारी किया है। साथ ही, ओबीसी को 14 फीसदी आरक्षण रखते हुए 87 फीसदी रिजल्ट जारी किया, बाकी 13 फीसदी पद होल्ड कर दिए।

यह होल्ड पद का रिजल्ट ओबीसी विवाद खत्म होने पर जारी होगा। यदि ओबीसी के हक में फैसला जाता है तो यह उन्हें मिल जाएंगे और 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण मान्य नहीं हुआ तो यह अनारक्षित के पास चले जाएंगे। अभी तक हजारों पद इस तरह पीएससी, ईएसबी में होल्ड पर चले गए हैं और लाखों युवा इंतजार में हैं।

FSO में अभी इतने पद का ही रिजल्ट क्यों आया

मप्र में ओबीसी आरक्षण के चलते 87-13 फीसदी फॉर्मूले से रिजल्ट आ रहे हैं। इसमें 87 फीसदी मूल रिजल्ट को ही जारी किया जा रहा है। इस कैटेगरी में 109 पद थे और बाकी 14 पद 13 फीसदी कोटे में होल्ड हुए हैं।

वहीं 109 पद में से चयन सूची 101 पद की ही जारी हुई है। बताया जा रहा है कि एक्स सर्विसमैन कोटे के छह पद रिक्त रहे हैं। वहीं दो पद संभवतः हाईकोर्ट के आदेश के तहत रोके गए हैं।

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा था कि यदि याचिकाकर्ता चयन अंक के दायरे में आते हैं तो यह याचिका जारी रहेगी। आयोग याचिकाकर्ताओं के रिजल्ट बंद लिफाफे में पेश करेगा। माना जा रहा है कि दो याचिकाकर्ता इस दायरे में आए होंगे, इसलिए दो पद रोके गए हैं।

कब हुई थी यह परीक्षा

यह परीक्षा 14 दिसंबर 2025 को हुई थी। रिजल्ट 21 जनवरी को घोषित हुआ और फिर 15 से 24 अप्रैल तक इंटरव्यू हुए। लेकिन इसके बाद हाईकोर्ट में उम्र छूट को लेकर चल रहे केस के चलते रिजल्ट होल्ड हो गया।

आयोग ने इसमें आवेदन लगाकर रिजल्ट घोषित करने की मंजूरी मांगी, जो बीते सप्ताह जबलपुर हाईकोर्ट से मिल गई। इसके बाद याचिकाकर्ताओं का रिजल्ट होल्ड कर यह रिजल्ट आयोग ने जारी कर दिया है।

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