MPPSC ने शुरू की नेगेटिव मार्किंग, आखिर गलत उत्तर पर कितने अंक काटे जाएंगे, द सूत्र खुलासा
Sanjay Gupta | Jan 01, 2026, 12:47 IST
mppsc negative marking 2026
MPPSC ने अपनी परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग लागू करने का फैसला कर लिया है। अब हर गलत उत्तर पर ⅓ अंक कटेंगे। यह बदलाव परीक्षा के कटऑफ को प्रभावित करेगा।
INDORE. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने एक अहम फैसला लिया है। अब सभी वस्तुनिष्ठ (आब्जेक्टिव बेस) परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग लागू करने की तैयारी कर ली गई है। पहले असिस्टेंट प्रोफेसर 2025 की भर्ती विज्ञापन में इसे लागू किया गया था। फिर राज्य सेवा परीक्षा के नोटिफिकेशन में भी इसे लागू कर दिया गया था।
यह पहली बार पीएससी में हो रहा है। अधिकांश उम्मीदवार इस फैसले का स्वागत करते दिख रहे हैं। वहीं बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर गलत उत्तर पर कितने अंक काटे जाएंगे। इसका भी खुलासा द सूत्र कर रहा है।
पीएससी ने यह सिस्टम यूपीएससी की प्री परीक्षा से लिया है। उसी तरह इसे लागू किया जा रहा है। इसके तहत हर गलत उत्तर पर ⅓ (एक तिहाई) अंक काटे जाएंगे। पीएससी में एक प्रश्न दो अंक का होता है।
एक तिहाई का मतलब है कि गलत उत्तर होने पर 0.66 अंक कट जाएंगे। औसतन तीन गलत उत्तरों पर एक प्रश्न के बराबर अंक कट जाएंगे। पीएससी सचिव राखी सहाय ने कहा कि इस सिस्टम से गुणवत्ता में और सुधार होगा। साथ ही, यूपीएससी तर्ज पर ही इसे लागू कर एक तिहाई अंक गलत उत्तर पर काटे जाएंगे।
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प्री परीक्षा में दो प्रश्न पत्र होते हैं, एक सामान्य अध्ययन का और दूसरा सी सैट। पहले सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र के आधार पर ही जो 100 सवालों का और 200 अंक का होता है, मेरिट तय होती है। इसी से कटऑफ बनता है। इसमें हर प्रश्न दो अंक का होता है।
अभी देखने में आता है कि अनारक्षित श्रेणी में कटऑफ 80 प्रतिशत होता है, जो काफी हाई जाता है। कारण यह है कि नेगेटिव मार्किंग नहीं होने पर यदि किसी उम्मीदवार को कोई जवाब नहीं भी आता तो वह उसे अटेम्प्ट कर उसका जवाब देता है।
इसमें कुछ सही हो जाते हैं, जिससे कटऑफ हाई जाता है। अब नेगेटिव मार्किंग होने से उम्मीदवार उन्हीं सवालों को हल करेगा, जो उसे आते होंगे। नेगेटिव मार्किंग होने से उसे गलत उत्तर पर नुकसान होगा। ऐसे में बेवजह कटऑफ हाई नहीं जाएगा।
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वहीं, पीएससी की भी जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह गलत प्रश्न न बनाए और उनकी आंसर की भी सही बनाए। क्योंकि ऐसा नहीं होने से मेहनती उम्मीदवारों को खामियाजा भुगतना पड़ेगा और उन्हें बेवजह नेगेटिव मार्किंग झेलनी होगी।
पीएससी पहले ही यह नियम लागू कर चुका है कि वह अब प्री के कटऑफ अंतिम रिजल्ट के बाद ही जारी करेगा। ऐसे में उम्मीदवारों को कटऑफ का भी पता अब नहीं चलता है। यह सिस्टम राज्य सेवा परीक्षा 2025 से ही लागू किया गया था।
हालांकि, इसी परीक्षा में हाईकोर्ट में याचिकाएं लगने के कारण पीएससी को कटऑफ पहले ही बताना पड़ा था। वहीं, यह हर बार नहीं होगा। ऐसे में उम्मीदवारों को सतर्क रहना होगा और पीएससी की भी जिम्मेदारी है कि वह सही प्रश्नपत्र बनाए और सही आंसर की तैयार करे।
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उधर, पीएससी ने एक और अहम बदलाव किया है। अब यदि किसी प्रश्न पर आपत्ति आती है, तो उसे हटाया जा सकता है। पहले, ऐसा होने पर बाकी प्रश्नों के अंक से मार्किंग की जाती थी। वहीं, अब उस हटाए गए प्रश्न के अंक सभी उम्मीदवारों को मिलेंगे। इसका मतलब है कि यदि कोई सवाल डिलीट होता है, तो उसका फायदा सभी को मिलेगा। इससे उम्मीदवारों को अधिक अंक मिल सकते हैं।
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यह पहली बार पीएससी में हो रहा है। अधिकांश उम्मीदवार इस फैसले का स्वागत करते दिख रहे हैं। वहीं बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर गलत उत्तर पर कितने अंक काटे जाएंगे। इसका भी खुलासा द सूत्र कर रहा है।
एक गलत उत्तर पर कटेंगे इतने अंक
एक तिहाई का मतलब है कि गलत उत्तर होने पर 0.66 अंक कट जाएंगे। औसतन तीन गलत उत्तरों पर एक प्रश्न के बराबर अंक कट जाएंगे। पीएससी सचिव राखी सहाय ने कहा कि इस सिस्टम से गुणवत्ता में और सुधार होगा। साथ ही, यूपीएससी तर्ज पर ही इसे लागू कर एक तिहाई अंक गलत उत्तर पर काटे जाएंगे।
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कटऑफ में आएगी कमी
अभी देखने में आता है कि अनारक्षित श्रेणी में कटऑफ 80 प्रतिशत होता है, जो काफी हाई जाता है। कारण यह है कि नेगेटिव मार्किंग नहीं होने पर यदि किसी उम्मीदवार को कोई जवाब नहीं भी आता तो वह उसे अटेम्प्ट कर उसका जवाब देता है।
इसमें कुछ सही हो जाते हैं, जिससे कटऑफ हाई जाता है। अब नेगेटिव मार्किंग होने से उम्मीदवार उन्हीं सवालों को हल करेगा, जो उसे आते होंगे। नेगेटिव मार्किंग होने से उसे गलत उत्तर पर नुकसान होगा। ऐसे में बेवजह कटऑफ हाई नहीं जाएगा।
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पीएससी को भी बरतना होगी सतर्कता
पीएससी पहले ही यह नियम लागू कर चुका है कि वह अब प्री के कटऑफ अंतिम रिजल्ट के बाद ही जारी करेगा। ऐसे में उम्मीदवारों को कटऑफ का भी पता अब नहीं चलता है। यह सिस्टम राज्य सेवा परीक्षा 2025 से ही लागू किया गया था।
हालांकि, इसी परीक्षा में हाईकोर्ट में याचिकाएं लगने के कारण पीएससी को कटऑफ पहले ही बताना पड़ा था। वहीं, यह हर बार नहीं होगा। ऐसे में उम्मीदवारों को सतर्क रहना होगा और पीएससी की भी जिम्मेदारी है कि वह सही प्रश्नपत्र बनाए और सही आंसर की तैयार करे।
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यह नियम भी पहले से लागू
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