हनी ट्रैप की गुलाबी डायरी से निकले BJP के पूर्व विधायक, अफसर और ठेकेदार के नाम

मध्यप्रदेश की राजनीति में खलबली मचाने वाले हनी ट्रैप की मास्टरमाइंड के पास गुलाबी कवर की एक डायरी थी। इसमें बड़े अफसरों-नेताओं के नाम और उनसे उगाही गई रकम आदि की डिटेल है। पहली बार सिर्फ द सूत्र ही इस गुलाबी डायरी का खुलासा कर रहा है। पढ़िए पार्ट 2

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Marut raj
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हनी ट्रैप
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संजय गुप्ता, INDORE. हनी ट्रैप मामले में दस फरवरी (शनिवार) को सुनवाई होने जा रही है। गुलाबी डायरी के राज का खुलासा करने के बाद द सूत्र अब बता रहा है कि पुलिस जांच के दौरान हुए कई लोगों के बयानों से तत्कालीन बीजेपी के एक विधायक के साथ ही दवा कारोबारी, शराब ठेकेदार के नाम चालान में आए हैं, जिनके वीडियो बनाए गए हैं। वहीं यह भी साफ हो गया है कि गैंग की मास्टरमाइंड के कई बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों खासकर आईएएस से प्रगाढ़ संबंध थे और उसके मिनाल रेसीडेंसी स्थित घर पर भी बड़े-बडे़ रसूखदार लोगों का आना-जाना था। एक बयान में यह भी साफ आया है कि नेताओं में अधिकांश बीजेपी नेता थे, जिनसे उनके संबंध थे। 

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इस नेता का नाम आया चालान में

गैंग में शामिल एक महिला ने बताया कि रुपए की लालच में वह इंदौर हनी ट्रैप मास्टरमाइंड के साथ हो गई थी और इनके कहने पर मैहर के तत्कालीन विधायक नारायण त्रिपाठी के साथ वीडियो बनाए थे। इसके लिए गिरोह ने उसे 15 हजार रुपए दिए थे। यह वीडियो पुलिस के पास भी था, जिसे महिला को दिखाया गया और महिला ने पुष्टि करते हुए पुलिस को बयान दिया था कि यह त्रिपाठी ही है और इन्हीं के साथ वीडियो बनाया गया था। 

इन शराब ठेकेदार, दवा कारोबारी के भी आए नाम

वहीं कुछ और बयानों में यह आया कि सागर के शराब ठेकेदार गोलू रिछारिया के साथ भी संबंध बनाने के लिए कहा गया था और वीडियो बनाने के लिए अपना मोबाइल गैंग ने दिया था। बाद में यह मोबाइल गैंग को लौटा दिया गया और महिला ने बताया कि वह डर गई थी, इसलिए गोलू को भी बोल दिया था कि कोई मेरे नाम से ब्लैकमेल करे कि आपत्तिजनक वीडियो है तो बातों में मत आना। इसी तरह भोपाल के दवा कारोबारी जयपाल सचदेवा के साथ भी वीडियो बनाए गए थे। इसके लिए गैंग ने 12 हजार रुपए का भुगतान किया था। 

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बड़े रसूखदार लोगों के साथ, आईएएस अधिकारियों के पास था आना-जाना

पुलिस द्वारा हनी ट्रैप का राज मामले में अब तक हुई पूछताछ के दौरान यह कई बार सामने आया है कि महिलाओं को आईएएस अधिकारियों के पास भेजने के लिए उकसाया जाता था। मास्टमाइंड के कई अधिकारियों और रसूखदार लोगों से संबंध थे। इनके जरिए वह ट्रांसफर-पोस्टिंग का काम कराने के साथ ही ठेके, प्रोजेक्ट लेने, दिलाने का काम करते थे। घर पर भी रसूखदार लोगों का आना-जाना लगा रहता था। 

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गैंग के मास्टरमाइंड खुद की जगह अन्य महिलाओं से बनवाते थे वीडियो

गैंग की मास्टमाइंड इतनी चालाक थी कि यह अपने वीडियो नहीं बनाकर अन्य महिलाओं के साथ ही बडे लोगों के वीडियो बनाती थी, क्योंकि यह अपने वीडियो दिखाकर ब्लैकमेल करेगी तो इन्हें आशंका थी कि फिर इनकी बडे़ लोगों के पास एंट्री बंद हो जाएगी। इसलिए यह महिलाओं को फुसलाकर या उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर अपने साथ शामिल करती थी और उन्हें अधिकारियों व रसूखदार लोगों के पास भेजा करती थी। निगम इंजीनियर हरभजन सिंह जिनकी शिकायत पर ही मामला खुला था, उनसे भी अपने भाई के लिए जेएनएनयूआरएम में पेटी कांट्रेक्ट का काम लिया था। 

बडे़ लोगों के पास जाने के बदले में देती थी 10 से 15 हजार रुपए

यह मजबूर महिलाओं को अधिकारियों, नेताओं व रसूखदार लोगों के पास भेजती थी। इन्हें गैंग अपना मोबाइल खासकर आईफोन दिया करती थी, जिसमें साइड में कैमरा था, बताया जाता था कि इसे कैसे रखना है और ऑन कैसे करना है। फिर जैसे ही वह वीडियो बनाकर बाहर निकलती तो उससे मोबाइल ले लिया जाता और इस वीडियो को लैपटॉप या पैन ड्राइव में स्टोर कर लिया जाता। इस काम के बदले में दस से लेकर 15 हजार रुपए तक दिए जाते थे। ऐसे दर्जनों वीडियो इन मोबाइल व इसकी मेमोरी कार्ड, लैपटॉप और पैन ड्राइव में भरे पड़े हैं।

(गुलाबी डायरी में छिपे कुछ और नाम पार्ट 3 में पढ़िए)

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