नर्मदा तट पर अतिक्रमण: मंत्री ने त्रुटिपूर्ण बताया तो वन विभाग ने फिर जारी कर दिया वही आदेश
Sanjay Sharma | Nov 11, 2025, 18:28 IST
Photograph: (thesootr)
नर्मदा तट पर अतिक्रमण हटाने के अभियान के खिलाफ आदिवासी समुदाय का विरोध बढ़ गया है। मंत्री नागर सिंह चौहान ने वन विभाग के आदेश को त्रुटिपूर्ण बताया, जिससे आदिवासी और कांग्रेस सक्रिय हो गए। संशोधित आदेश में भी अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
BHOPAL. नर्मदा तट के जंगलों को अतिक्रमणमुक्त करने की मुहिम का विरोध तेज हो गया है। आलीराजपुर विधायक और बीजेपी सरकार के मंत्री नागर सिंह चौहान ने वन विभाग के आदेश को त्रुटिपूर्ण बताया। इसके बाद अब नर्मदा पट्टी के गांवों में आदिवासी समुदाय में बैठकों का दौर चल पड़ा है।
वन विभाग के संशोधित आदेश में भी अतिक्रमण हटाने के निर्देशों ने आदिवासियों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है। वहीं सरकार के इस विरोध में आदिवासी विकास परिषद और कांग्रेस भी ग्रामीणों के साथ आ गई है।
सरकार द्वारा नर्मदा नदी को संरक्षित रखने प्रदेश में अविरल नर्मल नर्मदा अभियान चलाया जा रहा है। नदी तटों से मिट्टी के कटाव को रोकने, जल ग्रहण क्षेत्र और पर्यावरण को सहेजने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत नर्मदा के किनारों पर पौधरोपण जैसे कामों को वन समितियों के माध्यम से कराया जा रहा है।
वन विभाग द्वारा नदी के दोनों ओर 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित जंगलों को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। यानी जंगलों से ऐसे निर्माण और बसाहटों को हटाया जाना है जो दिसम्बर 2005 के बाद अस्तित्व में आई हैं।
ये खबर भी पढ़ें...
वन अधिकार पत्र के आवेदन लंबित हैं तो जंगल से बेदखल नहीं होंगे आदिवासी परिवार
वन विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल ने 21 अगस्त 2025को पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख के नाम पर आदेश जारी किया था। आदेश में नर्मदा तटों के जंगलों को अतिक्रमण करने का उल्लेख है। इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से दिसम्बर 2005 के बाद के कब्जों की पहचान कर उन्हें हटाया जाना है। जंगल में कब्जा कर बनाए गए भवनों को पुलिस और प्रशासन की मदद से हटाने निर्देशित किया गया है। एसीएस के आदेश पर अब वन विभाग ने अमल शुरू कर दिया है।
आलीराजपुर डीएफओ मयंक सिंह ने 28 अगस्त को एसीएस के आदेश के संदर्भ में उमराली और मथवाड़ के परिक्षेत्र अधिकारियों को सिमलानी, ककराना, झंडाना, सुगठ, सकरजा, खोडम्बा, आकिड्या, जलसिंधी पंचायत के अंतर्गत वनभूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने के निर्देश दिए हैं।
टास्क फोर्स के सहयोग से वन भूमि को कब्जामुक्त करने की कार्रवाई को लेकर शुरूआत से ही आदिवासी समुदाय द्वारा विरोध किया जा रहा है। इसके चलते 7 नवम्बर को वन मुख्यालय द्वारा संशोधित आदेश भी जारी किया गया है। हांलाकि इस आदेश में केवल वन अधिकार पत्र के प्रकरण लंबित होने के मामलों में ही कार्रवाई से रियायत दी गई है।
ये खबर भी पढ़ें...
एमपी में ट्राइबल प्राइड डे मनाएगी बीजेपी, राष्ट्रीय पर्व का देगी दर्जा
वन भूमि से बेदखली को लेकर आलीराजपुर जिले में दर्जन भर गांव, मजरों और फलियों में आदिवासी समुदाय लामबंद हो गया है। उनके विरोध को देखते हुए सरकार के मंत्री और आलीराजपुर विधायक नागर सिंह चौहान ने मोबाइल पर वीडियो संदेश जारी किया है। इस वीडियो में उन्होंने भी वन भूमि से आदिवासियों की बेदखली के आदेश को त्रुटिपूर्ण बताया है। उन्होंने इस मामले में सीएम डॉ.मोहन यादव से चर्चा कर हस्तक्षेप करने और कार्रवाई रुकवाने का आश्वासन भी दिया है।
![tribal-community]()
आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने भी आदिवासी समुदाय के फलियों में पहुंच रहे हैं। दूसरे आदिवासी संगठन भी इस मामलें में सक्रिय हो गए हैं। महेश पटेल का कहना है सरकार आदिवासी समुदाय के विरोध में मुहिम चला रही है। उन्होंने नर्मदा तट की जमीनों को आदिवासियों से खाली कराते हुए अडानी- अंबानी को सौंपने की आशंका भी जताई है।
महेश पटेल का कहना है कि वन विभाग के पुराने आदेश को मंत्री नागर सिंह चौहान ने त्रुटिपूर्ण बताया था, लेकिन अब दूसरा आदेश जारी किया गया है उसमें भी आदिवासियों को अतिक्रमणकारी बताया गया है। इससे सरकार और जनप्रतिनिधियों की बातों में विरोधाभास स्थिति को उजागर कर रहा है।
आलीराजपुर में नर्मदा तट के 5 किलोमीटर दायरे के जंगलों से कब्जे हटाने के अभियान के विरोध में कांग्रेस भी उतर आई है। कांग्रेस ने 12 नवम्बर को आलीराजपुर के डाबड़ी में आंदोलन का आव्हान किया है। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कुक्षी विधायक सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल, विधायक सेना महेश पटेल के अलावा आदिवासी संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हो रहे हैं।
वन विभाग के संशोधित आदेश में भी अतिक्रमण हटाने के निर्देशों ने आदिवासियों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है। वहीं सरकार के इस विरोध में आदिवासी विकास परिषद और कांग्रेस भी ग्रामीणों के साथ आ गई है।
5 किमी के दायरे को कब्जा मुक्त कराना
वन विभाग द्वारा नदी के दोनों ओर 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित जंगलों को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। यानी जंगलों से ऐसे निर्माण और बसाहटों को हटाया जाना है जो दिसम्बर 2005 के बाद अस्तित्व में आई हैं।
ये खबर भी पढ़ें...
वन अधिकार पत्र के आवेदन लंबित हैं तो जंगल से बेदखल नहीं होंगे आदिवासी परिवार
एसीएस के आदेश पर वन विभाग का अमल
वन विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल ने 21 अगस्त 2025को पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख के नाम पर आदेश जारी किया था। आदेश में नर्मदा तटों के जंगलों को अतिक्रमण करने का उल्लेख है। इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से दिसम्बर 2005 के बाद के कब्जों की पहचान कर उन्हें हटाया जाना है। जंगल में कब्जा कर बनाए गए भवनों को पुलिस और प्रशासन की मदद से हटाने निर्देशित किया गया है। एसीएस के आदेश पर अब वन विभाग ने अमल शुरू कर दिया है।
आदिवासी समुदाय लगातार कर रहा विरोध
टास्क फोर्स के सहयोग से वन भूमि को कब्जामुक्त करने की कार्रवाई को लेकर शुरूआत से ही आदिवासी समुदाय द्वारा विरोध किया जा रहा है। इसके चलते 7 नवम्बर को वन मुख्यालय द्वारा संशोधित आदेश भी जारी किया गया है। हांलाकि इस आदेश में केवल वन अधिकार पत्र के प्रकरण लंबित होने के मामलों में ही कार्रवाई से रियायत दी गई है।
ये खबर भी पढ़ें...
एमपी में ट्राइबल प्राइड डे मनाएगी बीजेपी, राष्ट्रीय पर्व का देगी दर्जा
बेदखली का आदेश त्रुटिपूर्ण है: विधायक
सरकार-जनप्रतिनिधियों की बातों में अंतर: पटेल
tribal-community
आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने भी आदिवासी समुदाय के फलियों में पहुंच रहे हैं। दूसरे आदिवासी संगठन भी इस मामलें में सक्रिय हो गए हैं। महेश पटेल का कहना है सरकार आदिवासी समुदाय के विरोध में मुहिम चला रही है। उन्होंने नर्मदा तट की जमीनों को आदिवासियों से खाली कराते हुए अडानी- अंबानी को सौंपने की आशंका भी जताई है।
महेश पटेल का कहना है कि वन विभाग के पुराने आदेश को मंत्री नागर सिंह चौहान ने त्रुटिपूर्ण बताया था, लेकिन अब दूसरा आदेश जारी किया गया है उसमें भी आदिवासियों को अतिक्रमणकारी बताया गया है। इससे सरकार और जनप्रतिनिधियों की बातों में विरोधाभास स्थिति को उजागर कर रहा है।
12 नवम्बर को आंदोलन का आव्हान
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA