एमपी में पहली बार नर्मदा नदी प्रदूषित, पानी में बढ़ा बायो-केमिकल ऑक्सीजन
Aman Vaishnav | Mar 12, 2026, 09:40 IST
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मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी अब प्रदूषण की चपेट में आ गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हनुवंतिया के पास नदी को प्रदूषित घोषित किया है। यहां पानी में ऑक्सीजन की कमी और बैक्टीरिया की मात्रा काफी बढ़ गई है।
NEWS IN SHORT
- पिछले 17 सालों में पहली बार नर्मदा नदी का एक हिस्सा प्रदूषित पाया गया है।
- खंडवा जिले के हनुवंतिया टापू के पास पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है।
- यहां बीओडी का स्तर 7.4 मिलीग्राम प्रति लीटर तक दर्ज किया गया है।
- मध्य प्रदेश की कुल 18 नदियां अब प्रदूषित नदियों की श्रेणी में शामिल हैं।
- गुजरात में नर्मदा का प्रदूषित हिस्सा अब पूरी तरह साफ हो चुका है।
News In Detail
यहां पानी में बायो-केमिकल ऑक्सीजन (बीओडी) डिमांड 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा है। यानी पानी में बैक्टीरिया, सीवेज, मरी हुई मछलियां और छोटे कीड़े हैं। ये सड़ांध युक्त पानी में पैदा होते हैं। सीपीसीबी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक हनुवंतिया और आसपास के इलाके को अब प्रायोरिटी श्रेणी-IV में रखा गया है। क्योंकि यहां बीओडी का स्तर 7.4 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच चुका है। इससे यह प्रदूषित नदी क्षेत्र के तहत आ गया है।
वहीं गुजरात की सीमा में नर्मदा का गरुड़ेश्वर से लेकर भरूच तक का हिस्सा जो पहले भारी प्रदूषण का शिकार था। अब प्रदूषण से बाहर आ गया है।
मध्यप्रदेश में 18 नदियां प्रदूषित
हालांकि 11 नदी खंडों में सुधार किया गया है। इनमें गोहद, कोलार, चंबल, बिछिया, चौपन, और वैनगंगा के कुछ हिस्से शामिल हैं। इन्हें अब पॉल्यूटेड रिवर स्ट्रेच से बाहर कर दिया गया है।
सीपीसीबी के रीजनल डायरेक्टर डॉ. एके विद्यार्थी का कहना है कि हम हर दो साल में नदियों के पानी की गुणवत्ता की समीक्षा करते हैं, ताकि सरकार इसके सुधार के लिए उचित कदम उठा सके।
प्रदूषण बढ़ने का एक और कारण
हनुवंतिया इंदिरा सागर डैम में पानी का बहाव रुक जाता है। इससे नदियों की साफ करने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) बढ़ सकता है। इसके अलावा यहां पर्यटकों की ज्यादा आवाजाही के कारण इंसान का हस्तक्षेप भी बढ़ा है। ये प्रदूषण बढ़ने का एक और कारण बनता है।
2025 में आई एक और नई रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार पहली रिपोर्ट 2009 में आई थी। सीपीसीबी (सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड) ने नदी के पानी की गुणवत्ता की निगरानी करने के आधार पर, साल 2009 से देश की प्रदूषित नदियों के हिस्सों (पीआरएस) की पहचान करना शुरू किया था। अब तक 2009, 2015, 2018 और 2022 में रिपोर्ट आ चुकी हैं। हाल ही में 2025 के अंत में एक और नई रिपोर्ट आई है।
पानी की गुणवत्ता की जांच
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