नर्मदा का पानी एमपी के हिस्से में, फिर भी पूरी क्षमता का उपयोग क्यों नहीं?
Ramanand Tiwari | Sept 03, 2026, 21:24 IST
नर्मदा का पानी एमपी के हिस्से में
एमपी को नर्मदा जल बंटवारे में 18.25 एमएएफ पानी मिला था, लेकिन अभी करीब 10 एमएएफ का ही उपयोग हो रहा है। सरकार ने बाकी हिस्से को इस्तेमाल में लाने के लिए 2031 तक करीब 40 परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्य प्रदेश को 18.25 एमएएफ नर्मदा जल मिला है।
- अभी करीब 10 एमएएफ पानी उपयोग में लिया जा रहा है।
- नर्मदा जल उपयोग बढ़ाने पर सरकार काम कर रही है।
- मिशन के लिए करीब 40 परियोजनाएं तैयार हैं।
- 2031 तक पूरे जल उपयोग का लक्ष्य तय है।
नर्मदा का हिस्सा बड़ा
इसके बावजूद चार दशक से ज्यादा समय बाद भी राज्य अपने पूरे आवंटन को उपयोग में नहीं ला सका है। मौजूदा उपयोग करीब 10 एमएएफ बताया जा रहा है।
यही अंतर अब सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। पानी उपलब्ध होने के बावजूद उसका पूरा फायदा तभी मिलेगा, जब उसे सिंचाई नेटवर्क और जरूरी ढांचे के जरिए जमीन तक पहुंचाया जा सके।
अब परियोजनाओं की रफ्तार पर नजर
कागज पर यह पूरा प्लान बड़ा दिखाई देता है। लेकिन चुनौती यह है कि जिन परियोजनाओं से पानी का उपयोग बढ़ना है, वे तय समय में पूरी होकर वास्तव में पानी पहुंचाने की स्थिति में आएं।
150 परियोजनाओं का नेटवर्क
चार बड़े क्षेत्रों में काम का खाका
इंदौर क्षेत्र में 53 माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं में 24 पूरी होने की जानकारी दी गई है। 11 ओपन चैनल परियोजनाएं भी पूरी बताई गई हैं। इन योजनाओं के जरिए करीब 31.75 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य रखा गया है।
करोड़ों की परियोजनाएं, बड़ा दांव
मां रेवा माइक्रो लिफ्ट परियोजना से 45 हजार हेक्टेयर और धार माइक्रो लिफ्ट परियोजना से 38 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। इतने बड़े निवेश के बीच समय पर काम पूरा होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देरी का मतलब सिर्फ समय बढ़ना नहीं, बल्कि अपेक्षित सिंचाई लाभ का आगे खिसकना भी है।
नई योजनाएं भी कतार में
यानी सरकार पुराने प्रोजेक्ट के साथ नए इलाकों को भी नेटवर्क में जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नई योजनाएं पुराने अधूरे काम का बोझ बढ़ाती हैं या वास्तव में नर्मदा जल के उपयोग का अंतर कम करती हैं।
एनवीडीए के सदस्य इंजीनियर धन्नालाल वर्मा के मुताबिक करीब 40 परियोजनाओं पर काम चल रहा है और आठ के टेंडर जल्द आगे बढ़ेंगे। उनके अनुसार बड़ी अड़चन नहीं आई तो 2031 तक MP अपने 18.25 एमएएफ हिस्से के पूरे उपयोग की स्थिति में पहुंच सकता है।
2031 का लक्ष्य अब असली कसौटी
नतीजा पानी की बूंद से तय होगा
अगर परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं तो सिंचाई का दायरा बढ़ सकता है और उन क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है जहां अभी पानी की पहुंच सीमित है। लेकिन यदि टेंडर, निर्माण या दूसरी अड़चनों के कारण समय खिसका तो 2031 का लक्ष्य भी आगे जा सकता है।
इसलिए मिशन 2031 अब सिर्फ विकास परियोजनाओं का पैकेज नहीं है। यह सरकार की क्रियान्वयन क्षमता और जवाबदेही की परीक्षा भी है कि मध्यप्रदेश अपने हिस्से के नर्मदा जल को आखिर कब पूरी तरह जमीन तक पहुंचा पाता है।
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