अब न्याय में भाषा बाधा नहीं, देशभर की अदालतों में बनेंगे बहुभाषी डिजिटल प्लेटफॉर्म
Aman Vaishnav | Feb 08, 2026, 14:47 IST
national judicial conference bhopal cji surya kant
भोपाल के राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की दो दिन चलने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस शुरू हो गई है। इस कॉन्फ्रेंस में न्यायपालिका लोगों को अपनी मातृभाषा में न्याय दिलाने के लिए कदम उठा रही है।
भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (एनजेए) में शनिवार 7 फरवरी को हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की दो दिन चलने वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस शुरू हो गई है। इसका उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने किया। दिल्ली के बाद भोपाल ऐसा दूसरा शहर है जहां सुप्रीम कोर्ट के 9 न्यायधीश और हाई कोर्ट के 25 चीफ जस्टिस एक साथ इकट्ठा हुए हैं।
न्यायपालिका अब आम लोगों को उनकी अपनी भाषा में न्याय दिलाने के लिए कदम उठा रही है। सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और अन्य वरिष्ठ जजों ने इसका नेतृत्व किया।
इस दौरान यह बात सामने आई कि बड़ी आबादी भाषा की दिक्कतों के कारण न्यायिक प्रक्रिया से नहीं जुड़ पाती है। इसे सुधारने के लिए कोर्ट के डिजिटल सिस्टम को बहुभाषी बनाया जाएगा, जिससे याचिकाकर्ता अपनी मातृभाषा में केस से जुड़ी सारी जानकारी समझ सकेंगे।
पहले दिन की चर्चा का मुख्य विषय था कि न्यायपालिका में तकनीक और एआई का कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों, जिनमें जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल थे सभी ने अपने विचार रखे। कहा कि लंबित मुकदमों को जल्दी सुलझाने में एआई मदद कर सकता है।
एआई का इस्तेमाल मुकदमों की प्रक्रिया को तेज करने के लिए किया जाना चाहिए। साथ ही ये भी कहा कि फैसले लेने में एआई का कोई रोल नहीं होना चाहिए। फैसले हमेशा न्यायाधीशों के विवेक के आधार पर ही लिए जाने चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत का कहना है कि भारत जैसे बड़े देश में न्यायपालिका के लिए यह जरूरी है कि वह जल्दी से जल्दी मुकदमे सुलझाए।
उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें इंफोर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT), डिजिटल डिवाइस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना चाहिए।
ये सभी चीजें न्यायपालिका के काम को और तेज कर सकती हैं। इसके अलावा, मौजूदा नीतियों में सुधार के साथ-साथ न्यायपालिका के कामकाज का समय-समय पर मूल्यांकन भी जरूरी है।
कॉन्फ्रेंस की थीम थी - "एकीकृत, कुशल और जन-केंद्रित न्यायपालिका।" इस कॉन्फ्रेंस में देशभर के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों ने डिजिटल नवाचार के जरिए भाषाई और भौगोलिक बाधाओं को कैसे तोड़ा जा सकता है, इस पर चर्चा की। पहले दिन में जस्टिस जेके महेश्वरी, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस पी. नरसिम्हा, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस जॉय माल्या बागची और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली ने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी राय रखी।
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के इस्तेमाल और इसके विकास के लिए एक समिति बनाई है। इस समिति का पुनर्गठन दिसंबर 2025 में किया गया था। यह समिति सुप्रीम कोर्ट और निचली अदालतों में एआई टूल्स के इस्तेमाल के लिए एक योजना तैयार करेगी। सुप्रीम कोर्ट के जज, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा, इस समिति के अध्यक्ष हैं।
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत सीजेआई का पदभार संभालने के बाद पहली बार मध्य प्रदेश के आधिकारिक दौरे पर आए हैं। लंबे समय बाद भोपाल में जजों का इतना बड़ा समागम हो रहा है जो प्रशासनिक और न्यायिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
इस बार सम्मेलन का मुख्य विषय एकीकृत, कुशल और जन-केंद्रित न्यायपालिका रखा गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न्याय व्यवस्था को आम आदमी के लिए और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाना है। बदलते सामाजिक परिवेश में अदालतों की भूमिका और नागरिकों की उम्मीदों के बीच तालमेल बिठाने पर न्यायाधीश विचार-विमर्श करेंगे।
भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (NJA) देश में न्यायिक प्रशिक्षण और शोध का एक प्रमुख संस्थान है। यहां होने वाली इस बातचीत से निकलने वाले निष्कर्षों को भविष्य में देश के न्यायिक सुधारों की बुनियाद माना जा रहा है।
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आसान भाषा में जारी होंगे आदेश
इस दौरान यह बात सामने आई कि बड़ी आबादी भाषा की दिक्कतों के कारण न्यायिक प्रक्रिया से नहीं जुड़ पाती है। इसे सुधारने के लिए कोर्ट के डिजिटल सिस्टम को बहुभाषी बनाया जाएगा, जिससे याचिकाकर्ता अपनी मातृभाषा में केस से जुड़ी सारी जानकारी समझ सकेंगे।
- टेक्नोलॉजी से अब न्याय प्रक्रिया और ज्यादा पारदर्शी होगी।
- विवाद निपटाने में डिजिटल सपोर्ट मिलेगा, खासकर छोटे मामलों में।
- अब न्याय को भाषा और भौगोलिक सीमाओं से बाहर किया जाएगा।
- केस स्टेटस, आदेश और नोटिस अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध होंगे।
- वर्चुअल सुनवाई में रियल-टाइम अनुवाद तकनीक पर काम किया जा रहा है।
- दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को डिजिटल भाषा सहायता मिलेगी।
पहले दिन की चर्चा का विषय
एआई का इस्तेमाल मुकदमों की प्रक्रिया को तेज करने के लिए किया जाना चाहिए। साथ ही ये भी कहा कि फैसले लेने में एआई का कोई रोल नहीं होना चाहिए। फैसले हमेशा न्यायाधीशों के विवेक के आधार पर ही लिए जाने चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा...
उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें इंफोर्मेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT), डिजिटल डिवाइस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना चाहिए।
ये सभी चीजें न्यायपालिका के काम को और तेज कर सकती हैं। इसके अलावा, मौजूदा नीतियों में सुधार के साथ-साथ न्यायपालिका के कामकाज का समय-समय पर मूल्यांकन भी जरूरी है।
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ये है कॉन्फ्रेंस की थीम
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के इस्तेमाल और इसके विकास के लिए एक समिति बनाई है। इस समिति का पुनर्गठन दिसंबर 2025 में किया गया था। यह समिति सुप्रीम कोर्ट और निचली अदालतों में एआई टूल्स के इस्तेमाल के लिए एक योजना तैयार करेगी। सुप्रीम कोर्ट के जज, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा, इस समिति के अध्यक्ष हैं।
CJI सूर्यकांत का पहला दौरा
जन-केंद्रित न्यायपालिका
न्यायिक सुधारों का केंद्र
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