एक्स आर्मी मैन के हाथ होगी बाघ और चीतों की सुरक्षा: रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की सुरक्षा चौकस करने नया प्रयोग

Sanjay Sharma | May 07, 2026, 23:10 IST
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Photograph: (the sootr)

एमपी के सबसे बड़े वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में जुलाई से चीते आने वाले हैं। इसीलिए प्रबंधन ने पूर्व सैनिकों को निगरानी सौंपने का प्रस्ताव तैयार किया है। जिला सैनिक कल्याण बोर्ड सागर से संपर्क हो चुका है। मुख्यालय की औपचारिक अनुमति का इंतजार है।

News in Short :

  • 2339 वर्ग किमी में फैला है रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व
  • 3 जिलों तक फैली है टाइगर रिजर्व की सीमाएं
  • 30 बाघों के साथ जुलाई से यहां होगा चीतों का भी बसेरा
  • वन अमले की कमी को दूर करने पूर्व सैनिकों का सहारा
  • टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय भेजा

News in Detail :

BHOPAL. मध्य प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व की सुरक्षा में वनकर्मियों की बाधा जल्द दूर होगी। चीतों को बसाने के प्रोजेक्ट के चलते वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने पूर्व सैनिकों को सुरक्षा सौंपने का प्रस्ताव बनाया है। इसके लिए मुख्यालय स्तर से अनुमति का इंतजार है। हांलाकि इस पर अनौपचारिक रूप से सहमति मिल गई है। तीन जिलों की सीमाओं में 2339 वर्ग किलोमीटर में फैले टाइगर रिजर्व में फिलहाल 30 से ज्यादा बाघ हैं। जुलाई में यहां चीतों को लाया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में प्रबंधन ने पहले से ही सुरक्षा इंतजामों को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।

जुलाई से नौरादेही चीतों का घर

केंद्र से स्वीकृति के बाद अब वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों का नया घर होगा। जुलाई में चीतों की आमद से पहले ही टाइगर रिजर्व प्रबंधन नौरादेही के कोर एरिया, बफर जोन सहित चप्पे- चप्पे को सुरक्षित कर रहा है। रिजर्व के पास वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए फिलहाल वनकर्मियों की काफी कमी है। यहां अभी भी उतना ही फॉरेस्ट स्टाफ है जितना अभयारण्य के समय था। ऐसी स्थिति को देखते हुए प्रबंधन ने पूर्व सैनिकों से मदद लेने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे मुख्यालय भेजा गया है।

बाघों के साथ चीतों की सुरक्षा अहम

नौरादेही अभयारण्य को 2018 में NTCA ने टाइगर रिजर्व की स्वीकृति दी थी। टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद अब यहां बाघों की संख्या भी बढ़ गई है, लेकिन सुरक्षा इंतजामों में कोई इजाफा नहीं हुआ है। रिजर्व की सुरक्षा और निगरानी के लिए अतिरिक्त वनकर्मी भी नहीं दिए गए हैं। प्रदेश में सबसे विस्तृत क्षेत्रफल और तीन जिलों के दर्जनों कस्बों से घिरा होने से यहां सुरक्षा संबंधी चुनौती भी ज्यादा हैं। यहां अब चीते भी आने वाले हैं इसलिए टाइगर रिजर्व प्रबंधन की चिंता और भी बढ़ गई है।

चीता प्रोजेक्ट का तीसरा पड़ाव

जुलाई माह में रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीते लाए जाने हैं। उनकी सुरक्षा की चुनौती को देखते हुए कई तैयारी की जा रही हैं। रिवर्ज एरिया में सबसे बड़ी चुनौती लकड़ी तस्कर और शिकारियों की है। इसको देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने जिला सैनिक कल्याण बोर्ड सागर से संपर्क किया है। बोर्ड के सामंजस्य के बाद देश की सुरक्षा में तैनात रहे पूर्व सैनिकों को टाइगर रिजर्व की निगरानी सौंपी जाएगी। प्रबंधन ने पेंच, कान्हा और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पूर्व में हुए प्रयोग की सफलता के बाद यह कदम उठाया है।

सेना के जवानों से बढ़ेगा हौंसला

टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह का कहना है वन और वन्यजीवों की सुरक्षा में पहले से वनकर्मी तैनात है। अब उनके सहयोग के लिए पूर्व सैनिक भी टाइगर रिजर्व की निगरानी संभालेंगे। सैनिकों के अनुशासन और मुस्तैद रहने के जज्बे से वनकर्मियों का हौंसला भी बढ़ेगा। रिजर्व की सुरक्षा में पूर्व सैनिकों के तैनात होने से वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों में भी खौफ होगा।

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