मेडिकल कॉलेज में नाम बताने से नहीं मिलेगी एनआरआई कोटे की सीट, बदल गए नियम
Aman Vaishnav | Jul 07, 2026, 09:37 IST
नाम बताने से नहीं मिलेगी एनआरआई कोटे की सीट
मेडिकल काउंसलिंग 2026 में NRI कोटे से मेडिकल सीटों पर एडमिशन के नियम सख्त हो गए हैं। अब सिर्फ रिश्तेदार का नाम बताना काफी नहीं होगा, बल्कि कानूनी अभिभावक होने का सबूत देना होगा।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने एनआरआई कोटे के नियम कड़े किए हैं।
- अब सिर्फ किसी एनआरआई रिश्तेदार का नाम बताना काफी नहीं होगा।
- छात्र को यह भी साबित करना होगा कि वह व्यक्ति उसका कानूनी अभिभावक है।
- इसके लिए शपथ-पत्र और खास कानूनी प्रमाण देने होंगे।
- मध्य प्रदेश में यह नियम लागू होगा या नहीं, इस पर अभी स्थिति साफ नहीं है।
क्यों बदले गए नियम
इसके अलावा नीट-पीजी में भी 48 डॉक्टरों ने फर्जी एनआरआई प्रमाण पत्र लगाए थे। इन मामलों के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने सख्ती बढ़ाने का फैसला लिया है। फर्जी प्रमाण पत्र
अब कैसे मिलेगा फायदा
तीसरी स्थिति में चाचा-चाची, मामा-मामी, दादा-दादी, नाना-नानी या चचेरे-ममेरे भाई-बहन भी आधार बन सकते हैं। लेकिन शर्त यह है कि वह व्यक्ति खुद एनआरआई हो, विदेश में सामान्य रूप से रहता हो, और असल में छात्र का कानूनी अभिभावक हो।
यह नियम ओसीआई (OCI – Overseas Citizen of India) श्रेणी और भारतीय से एनआरआई श्रेणी में राष्ट्रीयता बदलने वाले छात्रों पर भी लागू होगा। यानी हर मामले की गहराई से जांच होगी।
मध्य प्रदेश में असमंजस की स्थिति
उनके मुताबिक मध्य प्रदेश में काउंसलिंग अभी भी 2018 के पुराने नियमों से होती है। अगर नए नियम जारी हुए हैं तो पहले गजट में संशोधन करना जरूरी होगा। इसके बाद ही राज्य में यह व्यवस्था लागू हो पाएगी।
कितनी सीटें और कितनी फीस
इन सीटों पर एडमिशन लेना काफी महंगा भी है। एक सीट की सालाना फीस करीब 30 लाख रुपए तक होती है। इतनी बड़ी रकम की वजह से ही फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए एडमिशन के मामले सामने आते रहे हैं।
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