नेहा जैन की हाईकोर्ट में बड़ी जीत: हटाने का सरकारी आदेश रद्द, देवरी नगर पालिका अध्यक्ष पद पर बहाली

Neel Tiwari | Mar 11, 2026, 16:44 IST
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Photograph: (the sootr)

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने देवरी नगर पालिका अध्यक्ष नेहा जैन को हटाने का सरकारी आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने निर्वाचित जनप्रतिनिधि की बहाली का बड़ा फैसला सुनाया।

News in Short

  • देवरी नगर पालिका अध्यक्ष नेहा जैन को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली।
  • राज्य सरकार द्वारा 25 अगस्त 2025 को जारी हटाने का आदेश कोर्ट ने रद्द किया।
  • कोर्ट ने कहा-धारा 41-A का उपयोग केवल गंभीर और प्रमाणित मामलों में ही किया जा सकता है।
  • एसी खरीदी सहित कई आरोपों को अदालत ने संदेह आधारित माना।
  • रिकॉल मतदान में भी नेहा जैन को जनता का समर्थन मिला था।

News in Detail

Jabalpur/Sagar. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने सागर जिले की देवरी नगर पालिका की राजनीति से जुड़े चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने राज्य सरकार द्वारा जारी उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत निर्वाचित अध्यक्ष नेहा जैन को पद से हटा दिया गया था।

अदालत ने कहा कि किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि को हटाने की शक्ति असाधारण होती है और इसका उपयोग केवल ठोस और पुख्ता सबूतों के आधार पर ही किया जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं और कई आरोप केवल संदेह के आधार पर लगाए गए थे, इसलिए सरकार की कार्रवाई टिक नहीं सकती।



क्या था पूरा मामला

देवरी नगर पालिका की अध्यक्ष नेहा जैन को 25 अगस्त 2025 को राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 41-A के तहत पद से हटा दिया था। सरकार का आरोप था कि उनके कार्यकाल में कई प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। नेहा जैन ने इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की शरण ली। उनका कहना था कि कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पार्षदों ने उनके कामकाज में लगातार बाधाएं पैदा कीं और इसी के आधार पर उन्हें हटाने की साजिश रची गई।

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सरकार ने लगाए थे चार प्रमुख आरोप

राज्य सरकार की जांच में देवरी नपा अध्यक्ष नेहा जैन के खिलाफ चार आरोप तय किए गए थे। पहला आरोप था कि उन्होंने बिना सक्षम अनुमति के 13 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी और उन्हें भुगतान किया। दूसरा आरोप यह था कि उन्होंने नगर पालिका अधिनियम के तहत बनने वाली प्रेसीडेंट-इन-काउंसिल (PIC) का गठन नहीं किया, जिससे प्रशासनिक काम प्रभावित हुए। तीसरा आरोप वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा था, जिसमें सीसी रोड और गुमटी निर्माण में 30 लाख रुपए के गबन की बात कही गई, हालांकि जांच में यह आरोप साबित नहीं हो पाया। चौथा आरोप एयर कंडीशनर खरीदी में गड़बड़ी का था, जिसमें बाजार दर से अधिक भुगतान और दस्तावेजों में ओवरराइटिंग का आरोप लगाया गया था।

हाईकोर्ट में क्या रखी गईं दलीलें

नेहा जैन की ओर से अदालत में कहा गया कि कर्मचारियों की नियुक्तियां अकेले उनके निर्णय से नहीं बल्कि परिषद की सहमति से हुई थीं। PIC का गठन न होने के पीछे भी पार्षदों का असहयोग जिम्मेदार था, क्योंकि कई बार बैठक बुलाने के बावजूद सदस्य उपस्थित नहीं हुए। एयर कंडीशनर खरीदी को लेकर यह भी बताया गया कि सभी एसी सरकारी जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदे गए थे, जहां पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी होती है। इसलिए भ्रष्टाचार का आरोप टिक नहीं सकता।

हाईकोर्ट ने क्यों रद्द किया सरकार का आदेश

हाईकोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद कहा कि धारा 41-A के तहत किसी निर्वाचित अध्यक्ष को हटाने की शक्ति असाधारण है और इसे बहुत सावधानी से प्रयोग किया जाना चाहिए। अदालत ने पाया कि कई आरोपों के समर्थन में पुख्ता प्रमाण नहीं हैं और कुछ निष्कर्ष केवल संदेह के आधार पर निकाले गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि संदेह चाहे कितना भी मजबूत क्यों न हो, उसे प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर सरकार द्वारा जारी हटाने का आदेश अस्थिर और असंगत माना गया और उसे रद्द कर दिया गया।

रिकॉल मतदान में भी मिला जनता का समर्थन

इस पूरे विवाद के दौरान नेहा जैन के खिलाफ रिकॉल प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। 21 जनवरी 2026 को घोषित परिणामों के अनुसार कुल 13,367 मतों में से 6,085 मत ही उन्हें वापस बुलाने के पक्ष में पड़े, जबकि 7,282 मत उनके समर्थन में रहे। आधे से कम मत रिकॉल के पक्ष में होने के कारण वे पद पर बनी रहीं। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि नगर के मतदाताओं का समर्थन उनके साथ बना हुआ है।

अब नेहा जैन ही संभालेंगी अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी

मामले की अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने 20 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे 11 मार्च को जारी किया गया। नेहा जैन को कोर्ट ने पहले ही अंतरिम राहत दी हुई थी और अब हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद नेहा जैन दोबारा देवरी नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालेंगी। इस फैसले को स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों की रक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है।

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