नेहा जैन फिर देवरी नगर पालिका अध्यक्ष: जनता का फैसला, 1197 वोटों से बंपर जीत

Sanjay Dhiman | Jan 21, 2026, 17:05 IST
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Neha Jain again Deori Municipality President
Photograph: (the sootr)

नेहा जैन ने देवरी नगर पालिका अध्यक्ष पद पर फिर कब्जा किया। 19 जनवरी को खाली कुर्सी-भरी कुर्सी मतदान के बाद, मतगणना में उन्हें 1197 वोटों से जीत मिली।

NEWS IN SHORT

  • बड़ी जीत: नेहा जैन ने 1197 वोटों से देवरी नगर पालिका अध्यक्ष पद पर कब्जा बरकरार रखा।
  • जनता का फैसला: 'भरी कुर्सी-खाली कुर्सी' चुनाव में जनता ने नेहा जैन को दोबारा अपना समर्थन दिया।
  • कड़ी सुरक्षा: मतगणना दो राउंड में हुई और पुलिस बल की निगरानी में नतीजे घोषित किए गए।
  • विरोध दरकिनार: भाजपा से निष्कासन और विधायक के विरोध के बावजूद नेहा जैन ने शानदार जीत दर्ज की।
  • विकास का वादा: जीत के बाद नेहा ने इसे जनता की जीत बताकर विकास कार्य जारी रखने की बात कही।

NEWS IN DETAIL

Devaree. सागर जिले की देवरी नगर पालिका में एक बार फिर जनता ने अपना फैसला सुनाया है। 19 जनवरी को हुए भरी कुर्सी-खाली कुर्सी चुनाव के बाद, बुधवार को हुई मतगणना में नेहा अलकेश जैन ने शानदार वापसी की है। उन्होंने 1197 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपना अध्यक्ष पद बरकरार रखा। यह चुनाव राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा में रहा और अब जनता के फैसले ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है।

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कड़ी सुरक्षा के बीच हुई मतगणना

देवरी के शासकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मतगणना का काम बेहद कड़ी सुरक्षा में हुआ। पूरे परिसर में चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे थे, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। साथ ही, भारी पुलिस बल भी तैनात था, जिससे कोई अप्रिय घटना न हो।

मतगणना दो राउंड में पूरी हुई। पहले राउंड से ही 'भरी कुर्सी' यानी नेहा जैन को बढ़त मिलनी शुरू हो गई थी। पहले राउंड में नेहा जैन को 4036 वोट मिले, जबकि 'खाली कुर्सी' को 3130 वोट मिले। यह बढ़त दूसरे राउंड में भी जारी रही और आखिरकार नेहा जैन की जीत पक्की हो गई। जनता ने एक बार फिर उन पर अपना भरोसा जताया।

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अविश्वास प्रस्ताव के बाद फिर से कुर्सी संभाली

नेहा जैन जब पहली बार अध्यक्ष बनी थीं, उसके कुछ समय बाद ही पार्षदों के बीच खींचतान शुरू हो गई थी। उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और उन्हें पद से हटा दिया गया था। लेकिन, कोर्ट से स्टे मिलने के बाद वे फिर से अध्यक्ष पद पर लौट आई थीं। यह घटनाक्रम काफी नाटकीय रहा और इसने देवरी की राजनीति में हलचल मचा दी थी।

भाजपा से निष्कासन और नया विवाद

इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी ने नेहा जैन और उनके पति अलकेश जैन को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निकाल दिया। इसके बाद पार्षदों ने फिर से अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस बार निर्वाचन आयोग ने अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने के लिए 'भरी कुर्सी-खाली कुर्सी' चुनाव कराने का ऐलान किया। यह एक अनोखा चुनाव था, जिसमें जनता को सीधा फैसला लेना था कि वे मौजूदा अध्यक्ष को चाहते हैं या नहीं।

नेहा जैन बोलीं: "यह जनता का चुनाव था, जनता ने ही जीता"

चुनाव जीतने के बाद देवरी नपा अध्यक्ष नेहा जैन बेहद खुश नजर आईं। उन्होंने कहा, "यह चुनाव देवरी की जनता का था। मैं शुरू से कह रही थी कि चुनाव मैं नहीं लड़ रही, हमारी जनता लड़ रही है। यह जीत भी जनता की है।" उन्होंने यह भी कहा कि वे जनता के इस विश्वास को पूरी जिम्मेदारी से निभाएंगी। देवरी के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उनके पति अल्केश जैन ने भी जनता का धन्यवाद किया और विकास के वादे को दोहराया।

69.29% मतदान: जनता ने दिखाई पूरी दिलचस्पी

देवरी नगर पालिका में 19 जनवरी को मतदान हुआ था। 15 वार्डों के लिए कुल 30 मतदान केंद्र बनाए गए थे। इस चुनाव में कुल 69.29 प्रतिशत मतदान हुआ, जो यह दर्शाता है कि देवरी की जनता ने अपने नगर पालिका अध्यक्ष को चुनने में पूरी दिलचस्पी दिखाई।

  • पुरुष मतदाता: 7242
  • महिला मतदाता: 6095
  • कुल मतदान: 13,337
नगर पालिका क्षेत्र में कुल 19,248 मतदाता पंजीकृत हैं।

दूसरी बार जीती 'भरी कुर्सी': देवरी का अनोखा इतिहास

देवरी नगर पालिका में यह दूसरी बार हुआ है, जब 'भरी कुर्सी-खाली कुर्सी' का चुनाव हुआ। इससे पहले 2007 में भी ऐसा ही चुनाव हुआ था, तब अनिल जैन दोबारा अध्यक्ष चुने गए थे। अब 2025 में एक बार फिर जनता ने 'भरी कुर्सी' यानी नेहा जैन के पक्ष में फैसला सुनाया है। यह देवरी की राजनीतिक संस्कृति का एक दिलचस्प पहलू है।

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विधायक और पार्षदों की साख दांव पर

इस चुनाव में देवरी बीजेपी विधायक बृजबिहारी पटेरिया और 13 पार्षदों की साख दांव पर थी। ये सभी नेहा जैन के विरोध में थे और उन्होंने 'खाली कुर्सी' के पक्ष में प्रचार किया था। लेकिन, चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया कि जनता ने 'भरी कुर्सी' (नेहा जैन) को ही अपना समर्थन दिया। इस परिणाम से देवरी में भाजपा की राजनीति और उनकी रणनीति पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जनता के इस फैसले ने साफ संकेत दिया है कि स्थानीय मुद्दों पर जनता की राय सबसे ऊपर है।

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