नई भुगतान व्यवस्था ने रोकी मध्य प्रदेश की पुरानी चाल, बजट होने के बाद भी खाते खाली

मध्य प्रदेश ने पिछले बजट में केंद्रीय मदद की उम्मीद पर कई लोकलुभावन योजनाएं घोषित कीं। लेकिन नई व्यवस्था के साथ तालमेल न बैठा पाने से योजनाएं जमीन पर नहीं उतर सकीं। अब नजरें नए केंद्रीय बजट पर हैं।

author-image
Ravi Awasthi
New Update
New payment system stops Madhya Pradeshs old trick

Photograph: (the sootr)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

NEWS IN SHORT

  • भुगतान का तरीका बदला: नए पोर्टल एसएनएस स्पर्श से केंद्रांश अब बिल अपलोड होते ही सीधे हितग्राही,ठेकेदार के खाते में, निगरानी रिजर्व बैंक के पास।
  • सीखने में देरी,नुकसान भारी: सिस्टम पहले से लागू था, पर मप्र के विभाग अगस्त 2025 के बाद जागे। ट्रेनिंग में समय गया, बजट अटक गया।
  • 10% भी नहीं मिल पाया: कई विभाग तय केंद्रीय राशि का 10% तक हासिल नहीं कर सके। अब बजट लेप्स होने का खतरा।
  • पुरानी कोषालय संस्कृति खत्म: बजट रोककर ब्याज कमाने या इधर- उधर उपयोग के रास्ते बंद हुए।
  • नतीजा,योजनाएं कागजों पर: पुलिस आधुनिकीकरण,जेल सुधार, ड्राइविंग सेंटर,डिजिटल क्रॉप सर्वे व नगरीय विकास जैसी योजनाएं,रकम नहीं मिलने से ठंडे बस्ते में।  

BHOPAL. केंद्र की नई ऑनलाइन भुगतान प्रणाली एसएनएस स्पर्श ने सरकारी खर्च के तरीके बदल दिए हैं। पैसा अब राज्य कोषालय में रुकता नहीं ​बल्कि सीधे हितग्राहियों और ठेकेदारों के खातों में जाता है। मकसद साफ है,लीकेज रोकना। बिल के बदले ही भुगतान और हर रुपए का डिजिटल हिसाब रखना।

कागजों तक सिमटी योजनाएं

केंद्रीय स्तर पर हुए इस बदलाव के बीच मध्य प्रदेश की गाड़ी अटक गई। नई तकनीक समझने और अपनाने में देरी का असर यह हुआ कि कई विभाग केंद्रीय बजट का बड़ा हिस्सा समय पर हासिल ही नहीं कर सके। नतीजा,वित्तीय साल खत्म होने को है और कई योजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ पाईं।

यह खबरें भी पढ़ें..

हाई कोर्ट ने दिए सरकार को निर्देश, साइबर ठगी रोकने के लिए चलाया जाए अभियान

बांधवगढ़ से 5 बाघिन होंगी शिफ्ट, सरकार ने तैयार किया रूट प्लान

बजट कमान अब रिजर्व बैंक के हाथ

 - केंद्र अब बजट एसएनएस पोर्टल से रिलीज करता है।

 - निगरानी सीधे आरबीआई यानी रिजर्व बैंक के पास।

 - बिल अपलोड होते ही केंद्रांश जारी।

 - शेष राशि राज्य को देनी होती है।

 - पैसा सीधे लाभार्थी व ठेकेदार के खाते में पहुंचता है।

बदलाव से बजट दुरुपयोग के रास्ते बंद

पुरानी व्यवस्था में बजट राज्य कोषालय में आता रहा है। कोषालय से इसका आवंटन विभागों के खातों में होता था। विभाग इसका उपयोग अपने तरीके से करते थे। कई बार योजना से इतर मदों या ब्याज कमाने के लिए बजट रोका जाता था। कुछ विभाग प्रमुख अपनी पसंद की बैकों में रकम जमाकर बैंक प्रबंधन को उपकृत भी करते रहे। नई व्यवस्था ने यह सभी रास्ते बंद कर दिए।

वक्त पर खुद को नहीं किया अपडेट

यह सिस्टम दो साल पहले लागू हुआ था। केंद्र ने ट्रेनिंग के मौके दिए, पर मप्र के कई विभाग अगस्त 2025 के बाद ही सक्रिय हुए। जब नई व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया गया। नतीजतन, 3-4 महीने ट्रेनिंग में निकल गए। जब तक सिस्टम समझ आया, तब तक वित्तीय साल की रफ्तार निकल चुकी थी।

अब बजट लेप्स होने का भय सताया

कई विभागों को तय केंद्रीय राशि का 10% भी नहीं मिल पाया। समय रहते उपयोग न हुआ तो रकम लेप्स होने का खतरा है। इसलिए अंतिम तिमाही में विभाग बकाया केंद्रांश पाने की दौड़ में हैं। कुछ विभागों के वित्तीय प्रमुखों ने नए वित्तीय वर्ष में मौजूदा साल के बजट रिएंबर्स की उम्मीद भी जताई। 

बजट आवंटन और प्राप्ति की स्थिति (राशि करोड़ में)

दिनांक: 20 जनवरी 2026 तक

विभागकेंद्र से अपेक्षित (₹ करोड़)प्राप्त राशि (₹ करोड़)उपयोग/प्राप्ति (%)
स्कूल शिक्षा3,7001,46139.47%
हेल्थ (स्वास्थ्य)5,1811,55730.00%
गृह616.7911.00%
कृषि99639.144.00%
नगरीय प्रशासन1,95450.25%
ऊर्जा1,73600%
राजस्व5000%
जेल1500%
परिवहन4.4000%

अटक गई योजनाएं,उम्मीदों पर पानी फिरा

पिछले बजट में अधिकांश विभागों ने केंद्र से मदद के भरोसे अनेक लोक लुभावन योजनाएं तैयार की। वित्त मंत्री ने इन्हें अपने बजट भाषण में शामिल कर विकास का खाका भी पेश किया था,लेकिन केंद्र की बदली हुई व्यवस्था से उम्मीदों पर पानी फिर ​गया। इसे इन उदाहरणों से समझें...

पुलिस आधुनिकीकरण: 25 करोड़ की मांग,मिले 7 करोड़।

जेल सुधार: 15 करोड़ की योजना, एक पैसा नहीं।

ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर: 4.40 करोड़,योजना ठप ।

डिजिटल क्रॉप सर्वे: 50 करोड़, राशि शून्य।

ऊर्जा क्षेत्र (आरडीएसएस): 1736 करोड़ अपेक्षित, मिला कुछ नहीं।

कृषि मिशन: 996 करोड़ में से सिर्फ 39 करोड़ मिले।

हेल्थ: एनआरएचएम,आयुष्मान से कुछ राहत,वरना हाल और खराब

नगरीय प्रशासन: 3572 करोड़ की योजनाएं, मिले सिर्फ 5 करोड़।

यह खबरें भी पढ़ें..

MP BJP कार्यालय में होगी मंत्रियों से मुलाकात : फरवरी का कार्यक्रम जारी, देखें कब मिलेंगे आपके मंत्री

हितानंद शर्मा को नई जिम्मेदारी, मध्य क्षेत्र का सह बौद्धिक प्रमुख बनाया, इंदौर में हुआ फैसला

अब ऐसा नहीं चलेगा की सीख

एसएनएस स्पर्श ने लीकेज रोका। भुगतान को पारदर्शी बनाया और बजट को रियल-टाइम उपयोग से जोड़ा। पर प्रदेश के जिन विभागों ने समय पर सिस्टम नहीं अपनाया,वे अपने ही बजट से वंचित रह गए।
इस तरह मप्र के लिए यह साल एक सीख बन गया है। बजट अब आ जाएगा नहीं बल्कि काम दिखाओ,पैसा पाओ के नियम पर चलेगा।

केंद्रीय बजट आज

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग

वित्त मंत्री रिजर्व बैंक केंद्रीय बजट आज नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग
Advertisment