55 की उम्र में भोपाल की ज्योति ने फतह किया एवरेस्ट
Shreya Nakade | May 20, 2024, 07:50 IST
माउंट एवरेस्ट ज्योति रात्रे
मध्य प्रदेश की ज्योति रात्रे माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला बन गई हैं। उन्होंने 55 साल की उम्र में यह कारनामा करके दिखाया है।
BHOPAL. मध्य प्रदेश की ज्योति रात्रे ( jyoti ratre ) एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे उम्रदराज महिला ( oldest women to climb mount everest ) बन गई है। 55 वर्ष की उम्र में भोपाल की ज्योति ने यह कारनामा किया है। वे रविवार 19 मई को सुबह 6:30 बजे माउंट एवरेस्ट (Mount everest ) की चोटी पर पहुंची। उनसे पहले एवरेस्ट फतह करने वाली सबसे उम्रदराज महिला संगीता बाहल थी। उन्होंने यह कारनामा 53 साल की उम्र में करके दिखाया था। संगीता के 2018 की 19 मई को एवरेस्ट फतह करने के ठीक 6 साल बाद ज्योति ने उनके इस रिकॉर्ड को तोड़ा है।
पर्वतारोही ज्योति रात्रे का माउंट एवरेस्ट की चोटी फतेह करने का यह दूसरा मौका था। इससे पहले 2023 में भी उन्होंने एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने का प्रयास किया था। इस समय उन्हें 8,160 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचकर खराब मौसम के चलते लौटना पड़ा था।
इस बार भी जब ज्योति रात्रे एवरेस्ट फतह करने निकली तो उन्हें खराब मौसम का सामना करना पड़ा। तेज हवा के कारण रात्रे को चार रातों के लिए 7,800 मीटर की ऊंचाई पर ल्होत्से कैंप में रहना पड़ा। इसके अलावा आखिरी शिखर पर पहुंचने से पहले भी उन्हें एवरेस्ट कैंप पर एक रात रुकना पड़ा था। हालांकि इस बार ज्योति ने मौसम से अपनी जंग जीत ली और एवरेस्ट फतह कर लिया।
पर्वतारोही बनने की ज्योति की यात्रा कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई। ज्योति रात्रे आइलैंड पीक, एल्ब्रस, किलिमंजारो और कोसियुज़्को जरूरी चोटियों कीचढ़ाई कर चुकी है। इस बार एवरेस्ट फहत करने ज्योति बोलीविया के पर्वतारोही डेविड ह्यूगो अयाविरी क्विस्पे के नेतृत्व में 15 सदस्यीय अभियान टीम का हिस्सा थी। पर्वतारोही बनने से पहले वे एक उद्यमी थी। ज्योति का भोपाल में स्कूल यूनिफॉर्म का व्यवसाय था।
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दूसरे प्रयास में फतेह की चोटी
पर्वतारोही ज्योति रात्रे का माउंट एवरेस्ट की चोटी फतेह करने का यह दूसरा मौका था। इससे पहले 2023 में भी उन्होंने एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने का प्रयास किया था। इस समय उन्हें 8,160 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचकर खराब मौसम के चलते लौटना पड़ा था।
खराब मौसम से जीती जंग
इस बार भी जब ज्योति रात्रे एवरेस्ट फतह करने निकली तो उन्हें खराब मौसम का सामना करना पड़ा। तेज हवा के कारण रात्रे को चार रातों के लिए 7,800 मीटर की ऊंचाई पर ल्होत्से कैंप में रहना पड़ा। इसके अलावा आखिरी शिखर पर पहुंचने से पहले भी उन्हें एवरेस्ट कैंप पर एक रात रुकना पड़ा था। हालांकि इस बार ज्योति ने मौसम से अपनी जंग जीत ली और एवरेस्ट फतह कर लिया।
कोरोना काल में उद्यमी से बनी पर्वतारोही
पर्वतारोही बनने की ज्योति की यात्रा कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई। ज्योति रात्रे आइलैंड पीक, एल्ब्रस, किलिमंजारो और कोसियुज़्को जरूरी चोटियों कीचढ़ाई कर चुकी है। इस बार एवरेस्ट फहत करने ज्योति बोलीविया के पर्वतारोही डेविड ह्यूगो अयाविरी क्विस्पे के नेतृत्व में 15 सदस्यीय अभियान टीम का हिस्सा थी। पर्वतारोही बनने से पहले वे एक उद्यमी थी। ज्योति का भोपाल में स्कूल यूनिफॉर्म का व्यवसाय था।
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