NEYU छात्र नेताओं की होगी रिहाई, ACP की सरकारी कर्मचारी की जमानत शर्त HC से खारिज
Sanjay Gupta | Jul 25, 2026, 18:40 IST
Photograph: (THESOOTR)
INDORE. नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) की न्याय यात्रा रोकने के लिए पुलिस ने सख्ती दिखाई और छात्र नेताओं को हिरासत में लिया। इनकी जमानत के लिए एसीपी कोर्ट ने एक अजोबोगरीब शर्त लगा दी। जिसे अब हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) ने छात्र आंदोलन को लेकर न्याय यात्रा का आह्वान किया। यह यात्रा 23 जुलाई की दोपहर को निकलने वाली थी लेकिन इसके पहले ही पुलिस ने राधे जाट और सुरेंद्र यादव को हिरासत में ले लिया।
बाद में विजय चौधरी, चंद्रेखर गुर्जर, गौरव परिहार, रमन गोस्वामी को भी पुलिस हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद एसीपी कोर्ट ने सभी को जेल भेज दिया। वहीं छात्र नेताओं ने हाईकोर्ट में याचिका लगा दी।
अधिवक्ता विभोर खंडेलावल, अधिवक्ता जयेश गुरनानी के जरिए छात्र नेताओं ने हैबियस कार्पस याचिका लगाई। इसमें पुलिस ने माना कि उन्होंने इन्हें गिरफ्तार किया है और एसीपी कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया है।
कारण है कि इनसे एक लाख के बाउंडओवर के साथ ही सरकारी कर्मचारी की जमानत पेश करने के लिए कहा गया जो छात्र नेता नहीं दे सके।
हाई कोर्ट मेभुई सुनवाई में अधिवक्ता गुरनानी ने इस शर्त पर कड़ी आपत्ति ली और कहा कि बेरोजगार युवा कैसे इतनी बड़ी राशि कि जमानत दे सकता है। साथ ही कौन सरकारी अधिकारी इस तरह की गारंटी देगा और यह कहां से लेकर आएंगे।
हाईकोर्ट ने इस मामले में अब लिखित आदेश जारी किया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने माना कि यह शर्त काफी कठोर है।
कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी नौकरी की लेकर चिंतित रहेगा और वह बंदियों को जमानत बांड नहीं देगा। ऐसे में इस तरह की कठोर शर्त लगाना अनुचित है। यह एक तरह से हिरासत में लिए गए लोगों को जमानत देने से इंकार करने जैसा है।
हाईकोर्ट ने एसीपी कोर्ट को आदेश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता से 50 हजार के व्यक्तिगत बांड और 50 हजार के जमानतदार के आधार पर जमानत दी जाए। ऐसी जमानत पेश करने पर उन्हें रिहा किया जाए।
पुलिस ने इस शर्त को कोर्ट में सही बताया था। उनका तर्क था कि साल 2024 में बंदियों द्वारा किया गया आचरण ध्यान में रखा गया था। जिसमें इनके द्वारा विरोध प्रदर्शन के दौरान शांति करने का प्रयास किया गया था।
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बाद में विजय चौधरी, चंद्रेखर गुर्जर, गौरव परिहार, रमन गोस्वामी को भी पुलिस हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद एसीपी कोर्ट ने सभी को जेल भेज दिया। वहीं छात्र नेताओं ने हाईकोर्ट में याचिका लगा दी।
एसीपी कोर्ट ने मांगी ऐसी जमानत गारंटी
कारण है कि इनसे एक लाख के बाउंडओवर के साथ ही सरकारी कर्मचारी की जमानत पेश करने के लिए कहा गया जो छात्र नेता नहीं दे सके।
हाईकोर्ट ने इस शर्त को किया खारिज
हाईकोर्ट ने इस मामले में अब लिखित आदेश जारी किया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने माना कि यह शर्त काफी कठोर है।
कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी नौकरी की लेकर चिंतित रहेगा और वह बंदियों को जमानत बांड नहीं देगा। ऐसे में इस तरह की कठोर शर्त लगाना अनुचित है। यह एक तरह से हिरासत में लिए गए लोगों को जमानत देने से इंकार करने जैसा है।
इन शर्त पर किया जाए रिहा
पुलिस ने यह बोलकर लगाई थी शर्त
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