NGT ने माना पूरे MP में जन स्वास्थ्य आपातकाल, इंदौर ही नहीं भोपाल-ग्वालियर जैसे शहर भी खतरे में

Sandeep Kumar | Jan 15, 2026, 22:57 IST
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NGT ने MP में जल आपूर्ति संकट को गंभीर माना है। प्रदेश में एक जैसे जल आपूर्ति नियम लागू किए गए हैं। इंदौर समेत अन्य शहरों में पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा है।

News in Short

  • एनजीटी ने मध्यप्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था को गंभीर संकट बताया है।
  • लापरवाही और खराब रखरखाव का परिणाम मानते हुए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
  • भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 में दूषित पानी के कारण जलजनित बीमारियां फैलीं।
  • NGT ने MP में एक जैसे जल आपूर्ति नियम लागू किए हैं। इन नियमों में पानी की गुणवत्ता सुधारने के उपाय होंगे।
  • एनजीटी ने मुआवजा देने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए समिति गठित की है।

News in Detail

मध्यप्रदेश में लोगों के घरों तक पहुंच रहा पीने का पानी जानलेवा साबित हो रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने माना है कि प्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था गंभीर संकट में है और यह संकट सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि लापरवाही और खराब रखरखाव का नतीजा है। इंदौर की घटना को चेतावनी मानते हुए एनजीटी ने पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक जैसे सख्त निर्देश जारी किए हैं।

यह टिप्पणी एनजीटी की भोपाल पीठ ने 15 जनवरी 2026 को दिए आदेश में की। मामला इंदौर के राशिद नूर खान की याचिका से सामने आया, जिसमें उन्होंने दूषित पेयजल के कारण फैली बीमारियों, सामूहिक अस्पताल में भर्ती और मौतों का मुद्दा उठाया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा।

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि कई शहरों में नलों से आ रहे पानी में इंसानी गंदगी से जुड़े तत्व, ई.कोलाई, फीकल कोलीफॉर्म और कॉलरा फैलाने वाले बैक्टीरिया पाए गए हैं। इससे साफ होता है कि सीवेज का पानी पीने की पानी की लाइनों में मिल रहा है। यह स्थिति सीधे तौर पर लोगों की सेहत और जीवन के अधिकार पर हमला है।

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इंदौर से उठा सवाल, पूरे प्रदेश पर असर

एनजीटी ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके की उस घटना का विशेष जिक्र किया, जहां दिसंबर 2025 के आखिरी हफ्ते में दूषित पानी की सप्लाई से जलजनित बीमारियों का प्रकोप फैल गया था। बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े, कई को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा और बच्चों व बुजुर्गों सहित कई लोगों की मौत हुई। जांच में पानी में कॉलरा, ई.कोलाई और फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई है।

अधिकरण ने माना कि जर्जर पाइपलाइन, पेयजल और सीवेज लाइनों का साथ-साथ गुजरना, लंबे समय से लंबित सुधार कार्य और लोगों की शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना इस हादसे की वजह बने। यह भी सामने आया कि पाइपलाइन बदलने के लिए पहले टेंडर निकले थे, लेकिन काम जमीन पर नहीं उतरा।

सिर्फ इंदौर नहीं, भोपाल-ग्वालियर भी खतरे में

एनजीटी ने साफ किया कि यह समस्या सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है। भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा, सतना, खरगोन जैसे शहरों में भी यही हालात हैं। कहीं भी लाइन फटी या दबाव बदला, तो गंदा पानी साफ पानी में मिल सकता है। इसलिए इस मामले को राज्य-स्तरीय संकट माना गया।

देशभर के आंकड़ों का हवाला देते हुए एनजीटी ने कहा कि हर साल करीब दो लाख लोगों की मौत दूषित पानी से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। करोड़ों लोग हर साल जलजनित रोगों की चपेट में आते हैं।

वर्ष 2005 से 2022 के बीच 20 करोड़ से अधिक जलजनित रोगों के मामले दर्ज किए गए। NGT ने यह भी प्रतिपादित किया कि दूषित पेयजल की आपूर्ति जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत निहित स्वच्छ जल सहित जीवन के मौलिक अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है।

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अब पूरे मध्यप्रदेश में एक जैसे नियम

अब तक अलग-अलग शहरों में अलग व्यवस्था चल रही थी। एनजीटी ने इसे नाकाफी बताते हुए पूरे प्रदेश में एक जैसे नियम लागू करने का आदेश दिया है। सभी नगर निगमों को अब 24 घंटे काम करने वाली पानी शिकायत प्रणाली बनानी होगी। पाइपलाइन रिसाव रोकना होगा। जल स्रोतों के आसपास अतिक्रमण हटाना होगा।

गर्मी में बिना जरूरत खुदाई पर रोक लगेगी। बारिश का पानी सहेजने की व्यवस्था अनिवार्य होगी। कुओं, बावड़ियों और ट्यूबवेल क्षेत्रों में जल पुनर्भरण करना होगा। पानी की कमी पर टैंकर की वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी।

घरों में पहुंचने वाले पानी में क्लोरीन मिलाना जरूरी होगा। ओवरहेड टैंक और समप्स की नियमित सफाई करनी होगी। घरेलू और व्यावसायिक जल आपूर्ति की मीटरिंग होगी। तालाबों और नदियों में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगेगी। डेयरियों को शहर से बाहर करना होगा।

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मौतों पर जिम्मेदारी तय होगी

एनजीटी ने माना कि प्रथम दृष्टया पानी से जुड़े कानूनों का उल्लंघन हुआ है। प्रभावित लोगों को मुआवजा देने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के सवाल पर एक संयुक्त समिति बनाई गई है। यह समिति मौके पर जाकर हालात देखेगी और छह हफ्ते में रिपोर्ट देगी।

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अगली सुनवाई 30 मार्च को

मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च 2026 को होगी। एनजीटी ने आदेश की कॉपी राज्य के सभी कलेक्टरों और नगर आयुक्तों को भेज दी है, ताकि तुरंत कदम उठाए जा सकें। एनजीटी का यह आदेश साफ संकेत देता है कि अब दूषित पानी को सामान्य समस्या नहीं माना जाएगा। अगर व्यवस्था नहीं सुधरी, तो जवाबदेही तय होगी।





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