निर्मला सप्रे दलबदल केस, HC ने फैसला सुरक्षित रखा: स्पीकर को निर्देश देने पर बहस
Neel Tiwari | Jun 18, 2026, 16:20 IST
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बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मुख्य बहस इस बात पर रही कि क्या कोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को निर्णय के लिए समयसीमा तय करने का निर्देश दे सकता है।
समझें क्या है पूरा मामला
- हाईकोर्ट ने निर्मला सप्रे दलबदल मामले में फैसला सुरक्षित रखा।
- सरकार ने याचिका को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज करने की मांग की।
- उमंग सिंघार पक्ष ने कहा - 90 दिन की जगह 2 साल बाद भी फैसला नहीं।
- सप्रे पक्ष ने फिर दावा किया “मैं अब भी कांग्रेस में हूं, भाजपा ज्वाइन नहीं की।”
- मुख्य विवाद इस बात पर रहा कि क्या हाईकोर्ट स्पीकर को समयसीमा तय कर निर्देश दे सकता है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस की बेंच में हुई अहम सुनवाई
सरकार ने कहा- याचिका राजनीतिक उद्देश्य से दायर की गई
उमंग सिंघार पक्ष ने फिर उठाया 2 साल की देरी का मुद्दा
खंडेलवाल ने कोर्ट से कहा कि यदि निर्मला सप्रे वास्तव में भाजपा में शामिल नहीं हुई हैं और अब भी कांग्रेस में हैं, तो फिर उनके खिलाफ लंबित दलबदल याचिका को खारिज क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 90 दिनों की समयसीमा के बावजूद लगभग दो साल बाद भी निर्णय नहीं लिया जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने हाई कोर्ट से विधानसभा अध्यक्ष को तय समय में निर्णय लेने के निर्देश देने की मांग की।
सप्रे पक्ष का फिर दावा, भाजपा ज्वाइन नहीं की
स्पीकर को निर्देश देने की शक्ति पर हुई कानूनी बहस
इसके विपरीत उमंग सिंघार पक्ष ने केशव नेमचंद संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हाई कोर्ट को पूर्ण अधिकार है कि वह स्पीकर को लंबित मामलों के निपटारे के लिए समयसीमा निर्धारित कर सके, विशेषकर तब जब निर्धारित अवधि से कई गुना अधिक समय बीत चुका हो।
क्या है पूरा मामला?
अब निगाहें हाई कोर्ट के फैसले पर
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