OBC आरक्षण : सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं कैविएट, सरकार और अभ्यर्थी आमने-सामने
Neel Tiwari | Jan 31, 2025, 18:27 IST
सुप्रीम कोर्ट। Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% आरक्षण दिए जाने का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस विवाद में ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने हाईकोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ कैवियट याचिका दायर की है।
मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% आरक्षण दिए जाने से संबंधित विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के दिल्ली राज्य के प्रवक्ता ने हाईकोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कैविएट याचिका दायर की है। इस मामले में सरकार की निष्क्रियता, ओबीसी अभ्यर्थियों की संभावित मुश्किलें और आगामी कानूनी लड़ाई को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27% आरक्षण दिए जाने को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। उच्च न्यायालय में याचिका क्रमांक 18105/2021 के तहत इस मुद्दे पर सुनवाई हो रही थी, जिसमें 28 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश पारित किया। इस आदेश के कारण 87%-13% के भर्ती फार्मूले और 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर नए सिरे से कानूनी दुविधा पैदा हो गई है।
OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मूड में नहीं है MP सरकार, उठे सवाल!
ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता जल्द ही इस आदेश को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो आरक्षण का मामला एक बार फिर लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझ सकता है, जिससे हजारों ओबीसी अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होगा। यही वजह है कि ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने पीड़ित अभ्यर्थियों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में केवियट दाखिल करने का निर्णय लिया, ताकि बगैर उनकी दलील सुने सुप्रीम कोर्ट कोई एकतरफा आदेश न दे।
OBC आरक्षण खत्म करने के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से इस महत्वपूर्ण मामले में अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण ओबीसी समुदाय में सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खासकर हाईकोर्ट द्वारा 4 अगस्त 2023 को पारित स्टे आदेश के विरुद्ध मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कोई अपील नहीं की थी। इसके परिणामस्वरूप, हजारों ओबीसी अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रियाएँ ढप पड़ी हैं और कई सरकारी नौकरियों में उनकी नियुक्तियां रोक दी गईं। हाईकोर्ट द्वारा 28 जनवरी 2025 को पारित अंतिम आदेश के बावजूद भी राज्य सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह तब हुआ जब ओबीसी आरक्षण के लिए नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में तत्काल अपील दायर करने का सुझाव दिया था। बावजूद इसके, राज्य सरकार और महाधिवक्ता ने इस पर कोई सक्रियता नहीं दिखाई। सरकार की इस ढुलमुल नीति के कारण ओबीसी समुदाय में रोष बढ़ रहा है, और इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सरकार की निष्क्रियता को देखते हुए, ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इस मामले को खुद सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने का फैसला किया। इस संबंध में दिल्ली में स्थित एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AOR) संदीप कुमार सेन के माध्यम से 31 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट में कैवियट दायर कर दी गई।
OBC आरक्षण पर कमलनाथ ने दिया बड़ा बयान, बीजेपी पर साधा निशाना
कैवियट एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत यदि इस मामले में कोई भी पक्ष सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर करता है, तो बिना ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन और पीड़ित अभ्यर्थियों की बात सुने कोई भी एकतरफा फैसला नहीं दिया जा सकता। इस कदम को ओबीसी कैंडीडेट्स की ओर से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि आरक्षण के मुद्दे पर किसी एक पक्ष को नुकसान ना उठाना पड़े।
ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने उन सभी अभ्यर्थियों से अपील की है, जिनकी भर्तियाँ आरक्षण विवाद के कारण रुकी हुई हैं। संगठन ने सुझाव दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट में अपनी ओर से भी हस्तक्षेप याचिका (Intervention Application) दायर करें, ताकि वे इस कानूनी लड़ाई का प्रत्यक्ष हिस्सा बन सकें
इसके अलावा, संगठन ने ट्रांसफर प्रकरणों में भी सक्रिय भागीदारी की अपील की है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि ओबीसी आरक्षण से संबंधित कोई भी केस किसी अन्य कोर्ट में स्थानांतरित होता है, तो वहाँ भी ओबीसी पक्ष को अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट में इस प्रकरण की प्रभावी पैरवी की जाती है, तो इससे ओबीसी आरक्षण से जुड़े विवादों का समाधान हो सकता है और भर्ती प्रक्रियाओं पर लगी रोक हट सकती है।
ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट ने 87%-13% फार्मूला लागू करने वाले आदेश को किया खारिज
अब इस मामले में सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। यदि ओबीसी अभ्यर्थी और संगठन प्रभावी हस्तक्षेप कर पाते हैं, तो आरक्षण व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय सामने आ सकता है।
हालांकि, यह भी देखा जाना बाकी है कि मध्य प्रदेश सरकार अब भी निष्क्रिय बनी रहेगी या सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस प्रकरण को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाती, तो ओबीसी अभ्यर्थियों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
इस मुद्दे पर कमलनाथ ने सरकार की नियत पर पहले ही सवाल खड़ा कर दिया है। अब अन्य राजनीतिक दलों की भी प्रतिक्रिया आ सकती है, क्योंकि ओबीसी आरक्षण से जुड़ा मामला एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी बन सकता है। अब सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण को लेकर कोई बड़ा फैसला देता है या सरकार आखिरी मौके पर अपनी रणनीति बदलती है ये सभी सवाल आने वाले दिनों में साफ हो पाएंगे।
क्या है मामला?
OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मूड में नहीं है MP सरकार, उठे सवाल!
याचिकाकर्ता कर सकते है एसएलपी दायर
OBC आरक्षण खत्म करने के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज
सरकार की मंशा पर उठे सवाल
ओबीसी संगठन पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
OBC आरक्षण पर कमलनाथ ने दिया बड़ा बयान, बीजेपी पर साधा निशाना
एक तरफा फैसले से बचने दायर हुई कैवियट
होल्ड अभ्यर्थियों से अपील
सभी से सक्रिय भागीदारी की अपील
ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट ने 87%-13% फार्मूला लागू करने वाले आदेश को किया खारिज
अब सुप्रीम कोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें
हालांकि, यह भी देखा जाना बाकी है कि मध्य प्रदेश सरकार अब भी निष्क्रिय बनी रहेगी या सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस प्रकरण को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाती, तो ओबीसी अभ्यर्थियों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
इस मुद्दे पर कमलनाथ ने सरकार की नियत पर पहले ही सवाल खड़ा कर दिया है। अब अन्य राजनीतिक दलों की भी प्रतिक्रिया आ सकती है, क्योंकि ओबीसी आरक्षण से जुड़ा मामला एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी बन सकता है। अब सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण को लेकर कोई बड़ा फैसला देता है या सरकार आखिरी मौके पर अपनी रणनीति बदलती है ये सभी सवाल आने वाले दिनों में साफ हो पाएंगे।
खबर सें संबंधित 5 सवाल-जवाब।
- क्या है ओबीसी आरक्षण विवाद?
ओबीसी समुदाय को 27% आरक्षण देने को लेकर मध्य प्रदेश में कानूनी विवाद चल रहा है, जो अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। - कैवियट याचिका क्या है?
कैवियट याचिका एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सुनिश्चित किया है कि बिना उनकी सुनवाई के कोई फैसला न लिया जाए। - मध्य प्रदेश सरकार की निष्क्रियता पर क्यों सवाल उठ रहे हैं?
सरकार ने ओबीसी आरक्षण विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील नहीं की, जिससे ओबीसी समुदाय में नाराजगी है और भर्ती प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। - क्या ओबीसी अभ्यर्थी इस मामले में हस्तक्षेप कर सकते हैं?
हां, ओबीसी अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर कर सकते हैं, ताकि वे इस कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें। - इस विवाद का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
ओबीसी आरक्षण से संबंधित विवाद एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है, और विभिन्न राजनीतिक दल इस पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA