ओलंपियन अंकित शर्मा ने फर्जी कागज से पाई नौकरी, खुद ससुर ने लगाए आरोप
Aman Vaishnav | Aug 20, 2026, 10:30 IST
ओलंपियन अंकित शर्मा
ओलंपियन एथलीट अंकित शर्मा पर एक बड़ा आरोप लगा है। अंकित शर्मा पर फर्जी कागजात लगाकर उम्र छिपाने और अवैध रूप से सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- ओलंपियन एथलीट अंकित शर्मा पर फर्जी दस्तावेज का आरोप लगा है।
- मुरैना कोतवाली में उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई है।
- आरोप है कि उन्होंने जन्मतिथि बदलकर सरकारी नौकरी पाई।
- यह शिकायत उनके ससुर डॉ. राजकुमार तिवारी ने की है।
- अंकित के भाई ने सभी आरोपों को झूठा बताया है।
क्या है पूरा विवाद
आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे ही उन्होंने सरकारी नौकरी हासिल की। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच अभी शुरुआती दौर में बताई जा रही है।
कौन हैं अंकित शर्मा
इसी शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 2016 के ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफाई किया था। उन्होंने ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।
खेल जगत में उनकी यह उपलब्धि खासी चर्चा में रही थी। इसके बाद वे आयकर विभाग में निरीक्षक के पद पर नियुक्त हुए।
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ससुर का क्या है आरोप
शिकायत के अनुसार अंकित की वास्तविक जन्मतिथि 1 अगस्त 1987 है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के पिनहट, आगरा के स्कूलों से इसी जन्मतिथि पर पढ़ाई की।
प्राथमिक कक्षा से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई इसी आधार पर पूरी हुई थी, ऐसा शिकायत में बताया गया है।
आरोप है कि इसके बाद एक सुनियोजित तरीके से उम्र बदली गई। मुरैना जिले में उनकी उम्र करीब 5 साल कम दिखाई गई। शिकायत के मुताबिक नई जन्मतिथि 20 जुलाई 1992 दर्शाई गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि बिना सातवीं कक्षा पास किए ही सीधे दसवीं में दाखिला लिया गया। यह प्रवेश मुरैना के शासकीय ज्योति उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गणेशपुरा में हुआ बताया गया है।
इसके बाद उन्होंने इसी स्कूल और मध्य प्रदेश बोर्ड से 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं पास कीं, ऐसा शिकायत में दर्ज है।
यह पूरा मामला अभी आरोपों के स्तर पर है। पुलिस जांच के बाद ही तथ्यों की पुष्टि हो सकेगी।
परिवार का क्या कहना है
राजा शर्मा के अनुसार अंकित का ससुराल पक्ष से पहले से एक कानूनी मामला चल रहा है। उनका दावा है कि ससुराल वाले इसी वजह से अंकित को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
राजा शर्मा ने यह भी कहा कि दस्तावेजों से जुड़े सवाल पहले भी उठे थे। उस समय भी परिवार ने पुलिस को दस्तावेज दिखाकर संतुष्ट कर दिया था, ऐसा उनका कहना है।
अब आगे क्या होगा
जन्मतिथि और शैक्षणिक रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में आमतौर पर संबंधित संस्थानों से भी रिकॉर्ड मंगाए जाते हैं। जांच पूरी होने और आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ही अदालत में मामले की सुनवाई शुरू होगी। तब तक आरोप सिद्ध नहीं माने जा सकते।
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