/sootr/media/media_files/2026/03/02/umang-singhar-2026-03-02-16-38-13.jpg)
News in Short
- बड़वानी में हुई कृषि कैबिनेट बैठक का उद्देश्य किसानों के लिए योजनाएं लाना था।
- नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बैठक को केवल प्रचार का हिस्सा बताया।
- बैठक में सिर्फ पुराने फैसले ही घोषित किए गए, जो किसानों के लिए बेअसर हैं।
- सिंघार ने कहा कि किसानों के लिए कोई ठोस विकास योजना नहीं आई।
- कर्ज और आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई गई।
News in Detail
BHOPAL. मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में आयोजित "कृषक कल्याण वर्ष 2026" के अंतर्गत कृषि कैबिनेट बैठक को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ी आलोचना की है। उनका कहना था कि इस बैठक से किसानों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलने वाला। सच्चाई यह है कि सरकार ने किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल घोषणाएं कीं, जो पहले ही घोषित योजनाओं का हिस्सा थीं।
एमपी कृषि कैबिनेट : किसानों को मिली बड़ी सौगात, 27 हजार करोड़ की योजनाओं को मिली मंजूरी
किसानों को फायदा नहीं मिला: उमंग सिंघार
बड़वानी में हुई कृषि कैबिनेट बैठक में किसानों के कल्याण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे सिर्फ प्रचार का हिस्सा बताया। पुराने फैसलों को फिर से घोषणाओं के रूप में पेश किया गया, जबकि किसानों को वास्तविक फायदा नहीं मिला। कर्ज और आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर भी सवाल उठाए गए।
एमपी में बिजली उपभोक्ताओं को झटका, स्मार्ट मीटर का खर्च आपकी जेब से वसूलेगी कंपनी
घोषणाओं का असर या सिर्फ दिखावा
मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में आयोजित "कृषक कल्याण वर्ष 2026" के अंतर्गत कृषि कैबिनेट बैठक को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कड़ी आलोचना की है। उनका कहना था कि इस बैठक से किसानों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलने वाला। सच्चाई यह है कि सरकार ने किसानों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय केवल घोषणाएं कीं, जो पहले ही घोषित योजनाओं का हिस्सा थीं।
कृषक कल्याण से अधिक प्रचार
सिंघार ने कहा कि यह बैठक मुख्य रूप से प्रचार और छवि निर्माण के उद्देश्य से की गई थी। सरकार ने सरसों को भावांतर योजना में शामिल करने का फैसला लिया, लेकिन यह योजना निमाड़ क्षेत्र के किसानों के लिए अप्रासंगिक है, क्योंकि यहां के किसान मुख्य रूप से कपास और मकई उगाते हैं। इसी तरह, मक्का पर कोई ठोस योजना नहीं आई, जबकि पिछले साल किसानों को बहुत कम दाम पर अपनी फसल बेचना पड़ा।
उद्योग की कमी और पलायन
बड़वानी जिले में तीन इंडस्ट्रियल पार्क्स और राष्ट्रीय हाईवे से जुड़ा होने के बावजूद, यह क्षेत्र उद्योगों के मामले में पूरी तरह से पिछड़ा हुआ है। सिंघार ने यह भी बताया कि पलायन दर बहुत ज्यादा है और अधिक मजदूरी के लिए मजदूर गुजरात और महाराष्ट्र जा रहे हैं। यदि इस क्षेत्र में उद्योग लगते तो आदिवासी किसानों को लाभ होता, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
एमपी में नहाती छात्रा का वीडियो बनाते पकड़ाया पटवारी, लोगों ने कर दी जमकर धुनाई
कर्ज और आत्महत्या की समस्या
सिंघार ने राज्य में बढ़ते कर्ज और किसानों की आत्महत्या की समस्या पर भी चिंता जताई। किसानों के कर्ज में वृद्धि हो रही है और सरकार की योजनाएं किसी भी ठोस प्रभाव के बिना चल रही हैं। 2023 में 777 किसानों ने आत्महत्या की, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है।
सरकार की असफलता का पर्दाफाश
अंत में सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल किया कि किसानों को अब जुमलों से नहीं, बल्कि ठोस योजनाओं और कार्यों से मदद की आवश्यकता है। "कृषक कल्याण वर्ष" और "कृषक कल्याण योजना" जैसी घोषणाएं किसानों के जीवन में कोई बदलाव नहीं लाएंगी, जब तक कि सरकार इन योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं करती।
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us