पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट पर किसके साइन मान्य होंगे? HC ने सरकार को 21 दिन में फैसला करने के दिए निर्देश
Amresh Kushwaha | Sept 25, 2026, 12:42 IST
पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट पर किसके साइन मान्य होंगे
मध्य प्रदेश में पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट पर MD पैथोलॉजिस्ट या MBBS डॉक्टर के हस्ताक्षर को लेकर कानूनी विवाद छिड़ गया है। हाईकोर्ट ने सरकार व CMHO को 21 दिनों में नियमानुसार फैसला लेने का आदेश दिया है।
अगर आप किसी पैथोलॉजी लैब से खून, पेशाब या दूसरी मेडिकल जांच करवाते हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। मध्य प्रदेश में पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट पर किसके हस्ताक्षर मान्य होंगे- एमडी पैथोलॉजिस्ट के, एमबीबीएस डॉक्टर के या दोनों के? रिपोर्ट पर साइन करने वाले डॉक्टर की योग्यता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल एक आदेश जारी कर कहा था कि निजी पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट पर केवल एमडी पैथोलॉजिस्ट ही हस्ताक्षर कर सकेंगे। अब इस आदेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह नियम सही प्रक्रिया से बनाया गया है या नहीं।
रतलाम पैथोलॉजी लैब एसोसिएशन का कहना है कि सरकार ने जिस पुराने कोर्ट आदेश के आधार पर यह नियम बनाया है, उसमें बाद में बदलाव हो चुका था।
एसोसिएशन के अनुसार, 2003 के एक हाईकोर्ट आदेश में MD पैथोलॉजिस्ट की बात कही गई थी। वहीं, 2007 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले में बदलाव करते हुए MBBS डॉक्टरों को भी कुछ परिस्थितियों में रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दी थी।
एसोसिएशन का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग ने 2024 में नया आदेश जारी करते समय 2007 के इस बदलाव का ध्यान नहीं रखा।
पैथोलॉजी लैब में जांच कराने वाले आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी रिपोर्ट सही मानी जाएगी या नहीं।
यदि किसी लैब को केवल MD पैथोलॉजिस्ट की शर्त पूरी न कर पाने के कारण बंद करना पड़ता है, तो छोटे शहरों और कस्बों में जांच की सुविधा प्रभावित हो सकती है।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह बताया गया है कि मरीजों को बेहतर और विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच रिपोर्ट मिले।
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लैब संचालकों का कहना है कि सरकार किसी भी नए नियम को केवल एक सरकारी पत्र के जरिए लागू नहीं कर सकती। इसके लिए नियमों में बदलाव या उचित कानूनी प्रक्रिया जरूरी होती है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि आदेश जारी करने से पहले क्या विधि विभाग से सलाह ली गई थी और किस अधिकारी ने इसकी मंजूरी दी थी?
मामले में विभाग के एक नोटिस में जिस कानून का नाम लिखा गया है, उसे लेकर भी विवाद सामने आया है।
लैब एसोसिएशन का कहना है कि नोटिस में उल्लेखितमध्यप्रदेश आयुर्वेद परिषद अधिनियम, 1987 नाम का कोई कानून मौजूद ही नहीं है।
उनका दावा है कि सही कानून मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम है, जो MBBS डॉक्टरों के पंजीयन से जुड़ा है।
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विवाद बढ़ने के बाद रतलाम के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने भी शासन से मार्गदर्शन मांगा है। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से पूछा है कि MBBS डॉक्टर द्वारा हस्ताक्षर की गई रिपोर्ट वाली लैब को मान्यता दी जा सकती है या नहीं। इससे साफ है कि विभागीय स्तर पर भी इस नियम को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
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मामले में पैथोलॉजी लैब एसोसिएशन ने हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने CMHO रतलाम को निर्देश दिए हैं कि एसोसिएशन के आवेदन पर 21 दिन के अंदर नियमानुसार फैसला लिया जाए।
हाई कोर्ट के वकील एम. रिज़वान खान ने बताया किइंदौर हाईकोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि सरकार का आदेश सही है या गलत; अंतिम फैसला संबंधित अधिकारी को ही लेना होगा।
फिलहाल मरीजों को सामान्य जांच के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। हालांकि, पैथोलॉजी लैब की मान्यता और रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाले डॉक्टर की योग्यता को लेकर अंतिम स्थिति शासन के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब देखना यह है कि सरकार इस नियम को यथावत जारी रखती है, इसमें संशोधन करती है या कोई नया स्पष्टीकरण जारी करती है।
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स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल एक आदेश जारी कर कहा था कि निजी पैथोलॉजी लैब की रिपोर्ट पर केवल एमडी पैथोलॉजिस्ट ही हस्ताक्षर कर सकेंगे। अब इस आदेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह नियम सही प्रक्रिया से बनाया गया है या नहीं।
क्यों शुरू हुआ विवाद?
एसोसिएशन के अनुसार, 2003 के एक हाईकोर्ट आदेश में MD पैथोलॉजिस्ट की बात कही गई थी। वहीं, 2007 में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले में बदलाव करते हुए MBBS डॉक्टरों को भी कुछ परिस्थितियों में रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दी थी।
एसोसिएशन का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग ने 2024 में नया आदेश जारी करते समय 2007 के इस बदलाव का ध्यान नहीं रखा।
मरीजों पर क्या असर पड़ेगा?
यदि किसी लैब को केवल MD पैथोलॉजिस्ट की शर्त पूरी न कर पाने के कारण बंद करना पड़ता है, तो छोटे शहरों और कस्बों में जांच की सुविधा प्रभावित हो सकती है।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह बताया गया है कि मरीजों को बेहतर और विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच रिपोर्ट मिले।
a08ac8d3-768
लैब संचालकों ने उठाए कानूनी सवाल
उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि आदेश जारी करने से पहले क्या विधि विभाग से सलाह ली गई थी और किस अधिकारी ने इसकी मंजूरी दी थी?
सरकारी नोटिस में अधिनियम के नाम पर भी सवाल
लैब एसोसिएशन का कहना है कि नोटिस में उल्लेखित
उनका दावा है कि सही कानून मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम है, जो MBBS डॉक्टरों के पंजीयन से जुड़ा है।
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CMHO ने भी सरकार से मांगा जवाब
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हाईकोर्ट ने 21 दिन में फैसला करने का दिया आदेश
हाई कोर्ट के वकील एम. रिज़वान खान ने बताया किइंदौर हाईकोर्ट ने अभी यह तय नहीं किया है कि सरकार का आदेश सही है या गलत; अंतिम फैसला संबंधित अधिकारी को ही लेना होगा।
आम लोगों के लिए अभी क्या जानना जरूरी है?
अब देखना यह है कि सरकार इस नियम को यथावत जारी रखती है, इसमें संशोधन करती है या कोई नया स्पष्टीकरण जारी करती है।
ये खबरें भी पढ़िए...
MP के 9 मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में देने के फैसले पर सरकार का यू-टर्न, खुद ही करेगी संचालन
10 गुना ज्यादा दाम पर बिक रही दवाएं, सुप्रीम कोर्ट बोला- मरीजों से कर रहे दिनदहाड़े डकैती
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