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सड़कों पर विकास का पहिया जाम है,
ईमानदारी यहां अनजाना सा नाम है,
कुर्सी के लालच में बिक रहे हैं जमीर यहां,
भ्रष्टाचार अब इस तंत्र का 'निजाम' है।
Point Of View With Anand ( प्वाइंट ऑफ व्यू विद आनंद ) : ये पंक्तियां किसी कवि की कल्पना नहीं हैं...ये तो आज के मध्यप्रदेश की हकीकत बयां करती हैं। फिलवक्त MP में जो घटनाक्रम चल रहे हैं, उनसे पूरा सिस्टम कठघरे में आ गया है। प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों रेट लिस्ट की चर्चा है। हम उस मुहाने पर आ खड़े हैं, जहां तंत्र का मुखिया खुद यह स्वीकार कर रहा है कि उसके प्यादे बिना चढ़ावे के पत्ता भी नहीं हिलाते हैं।
देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है...झांकियां सज रही हैं और भाषण लिखे जा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इस गण के तंत्र को भ्रष्टाचार के घुन ने भीतर तक खोखला कर दिया है। नमस्कार, मैं हूं आनंद और आप देख रहे हैं द सूत्र का बेहद खास कार्यक्रम Point Of View।
दोस्तों, इस हफ्ते मध्यप्रदेश से दो चर्चित खबरें निकली हैं। एक तो यह कि सूबे के प्रशासनिक मुखिया यानी चीफ सेक्रेटरी अनुराग जैन ने यह माना है कि कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता। दूसरा, सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद अशोकनगर कलेक्टर रहे आदित्य सिंह को हटा दिया है।
ये खबरें गणतंत्र दिवस से ठीक पहले सामने आई हैं। हां, हां...वही गणतंत्र दिवस जब पूरे देश में तिरंगा फहराया जाएगा। संविधान की शपथ दोहराई जाएगी। मंचों से लोकतंत्र की मजबूती पर भारी-भरकम भाषण दिए जाएंगे...लेकिन मध्यप्रदेश की जमीनी सच्चाई यह है कि यहां गण यानी जनता दफ्तरों के बाहर खड़ी है और तंत्र भीतर बैठकर सौदे कर रहा है।
यह संयोग नहीं है, यह विडंबना है। गणतंत्र दिवस से ठीक पहले वही सिस्टम कठघरे में खड़ा है, जिसे संविधान के पालन का जिम्मा सौंपा गया है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार आरोप बाहर से नहीं आए हैं, बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे सबसे बड़े प्रशासनिक अफसर के मुंह से निकले हैं।
दोस्तों, मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर-एसपी की आधिकारिक कॉन्फ्रेंस में जो कहा है, वह किसी राजनीतिक भाषण का हिस्सा नहीं है। उन्होंने साफ तौर पर यह बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कहते हैं कि प्रदेश का कोई भी कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करता। यह बात सिर्फ प्रशासनिक टिप्पणी नहीं है, यह उस व्यवस्था का डेथ सर्टिफिकेट है, जिसे हम लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ कहते आए हैं।
चलिए, हम आपको वह मजमून बताते हैं, जो चीफ सेक्रेटरी ने अधिकारियों से कहा है। तो ये बात 21 जनवरी की है। सीएस अनुराग जैन मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों के कलेक्टर और एसपी की कॉन्फ्रेंस ले रहे थे। उन्होंने सुशासन पर बातचीत के वक्त भ्रष्टाचार और पैसों के लेन-देन का किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा, सीएम डॉ. मोहन यादव बोलते हैं कि प्रदेश के कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करते।
सीएस यहीं नहीं रुके। उन्होंने कलेक्टरों के साथ एक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि नामांतरण की एक शिकायत आई थी। इसमें लिखा था कि काम करने के पैसे मांगे जा रहे हैं। मैंने जांच के लिए उसे कलेक्टर को भेजा। वहां से रिपोर्ट दी गई कि शिकायत गलत है, ऐसा कुछ नहीं है।
कलेक्टर की रिपोर्ट वैसी की वैसी शिकायतकर्ता को भेज दी। शिकायतकर्ता का जवाब आया कि एसडीएम-पटवारी आए थे और साढ़े सात लाख रुपए में लेन-देन तय करके गए हैं। शिकायतकर्ता द्वारा लिखी गई यह बात कलेक्टर को भेजी और जांच के लिए कहा। कलेक्टर ने एडीएम को भेजा तो शिकायतकर्ता की बात को सही पाया। ये सब क्या है?
अब आप सोचिए...आखिर चल क्या रहा है सिस्टम में? जब प्रशासनिक मुखिया ही पूरी हकीकत बयां कर रहा है तो जनता कितनी परेशान होगी। हालांकि जब इतना बड़ा मामला उठा तो जनसंपर्क विभाग ने बाकायदा अपना फैक्ट चैक वाला ब्रह्मास्त्र निकाला और सफाई दी। कहा गया कि मुख्य सचिव के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। चलिए... हम और आप एक पल के लिए यह मान भी लेते हैं कि चीफ सेक्रेटरी के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया तो फिर अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह को क्यों हटाया गया? उन पर तो भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।
मैं कहता हूं, चीफ सेक्रेटरी ने जो किस्से सुनाए या कहें कि जो हकीकत बयां की है, वह पूरे प्रदेश की कार्यसंस्कृति का आईना है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर यह सवाल और भी भारी हो जाता है कि हम किस गणतंत्र का उत्सव मना रहे हैं। क्या यह वही गणतंत्र है, जहां अधिकार संविधान से मिलते हैं या फिर यह वह गणतंत्र है, जहां हर फाइल का एक रेट तय है। सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है, लेकिन सरकार के ही आंकड़े इस दावे को मजाक बना देते हैं।
पिछले पांच वर्षों में मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के 1 हजार 271 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से 1 हजार 35 मामले ऐसे थे, जहां अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए। यह कोई छोटी संख्या नहीं है, यह बताता है कि रिश्वत अपवाद नहीं, व्यवस्था का स्थाई हिस्सा बन चुकी है।
राज्य प्रशासनिक सेवा के 19 अधिकारी घूसखोरी में पकड़े गए, लेकिन इनमें से किसी एक को भी सजा नहीं मिली है। नौ मामलों में जांच का दिखावा चल रहा है। चार मामलों में अभियोजन स्वीकृति नहीं मिल रही है। चार केस में चालान पेश किए गए हैं, जिनमें से एक में अभियोजन स्वीकृति के बावजूद चालान नहीं हुआ है और एक मामले में खात्मा लगा दिया गया है।
घूसखोरी ही नहीं, लोकायुक्त पुलिस ने पद के दुरुपयोग के 154 और अनुपातहीन संपत्ति के 82 प्रकरण भी दर्ज किए हैं, लेकिन यहां भी कार्रवाई की रफ्तार वही है, जो हर सरकारी फाइल की होती है। कुल 178 केस आज भी अभियोजन स्वीकृति के इंतजार में हैं, जबकि लगभग एक हजार मामलों में चालान पेश किया जा चुका है। अदालतों में जिन मामलों के फैसले आए हैं, उनमें 68 प्रतिशत में सजा जरूर हुई है, लेकिन इस लिस्ट में कोई भी बड़ा अफसर नहीं है। तो यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि गणतंत्र में सजा नीचे वालों के लिए है, ऊपर वालों के लिए सिर्फ प्रक्रियाएं हैं।
जनता के लिए शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन भी विडंबना का प्रतीक बन चुकी है। सूबे में एक लाख 74 हजार से ज्यादा शिकायतें सौ दिन से अधिक समय से पेंडिंग हैं। 98 हजार से ज्यादा शिकायतें ऐसी हैं, जिन्हें देखा तक नहीं गया है। एल-3 और एल-4 स्तर पर 2 लाख 75 हजार से ज्यादा मामले पेंडिंग पड़े हैं।
यह आंकड़े जनता के धैर्य का अपमान हैं। आपको बताते चलें कि एल-3 और एल-4 स्तर पर कमिश्नर, सचिव, प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव आते हैं। यही वह लेवल है, जहां जिले (एल-1) और संभाग (एल-2) स्तर पर हल न हो सकी शिकायतों का निपटारा होना चाहिए, लेकिन इस स्तर पर भी शिकायतें पेंडिंग हैं। कुल मिलाकर लोग शिकायत के बाद इंतजार कर रहे हैं और सिस्टम उन्हें चुप रहने की सलाह दे रहा है।
दो दिन बाद जब गणतंत्र दिवस है, तब शायद इन सवालों का जिक्र नहीं होगा। मंचों से सब कुछ ठीक होने का भरोसा दिया जाएगा, पर सच्चाई यही है कि मध्यप्रदेश में गणतंत्र सिर्फ कैलेंडर पर ही शोभित नजर आता है। जमीन पर आज भी रिश्वत चलती है। फाइलें बिकती हैं और ईमानदारी सबसे कमजोर कड़ी बनी हुई है। असली सवाल यही है कि क्या हम सिर्फ गणतंत्र दिवस मनाते रहेंगे या कभी उस गणतंत्र को जिएंगे भी, जिसमें बिना पैसे दिए काम होना एक अधिकार हो, कोई एहसान नहीं।
ये बात तो यह भी है कि हम लोग भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज नहीं उठाते। शायद हमनें इसे न्यू नॉर्मल मान लिया है या नागार्जुन की ये कविता पढ़ ली है, जिसमें वे कहते हैं...
गूंगा रहोगे, गुड़ मिलेगा।
रुत हंसेगी, दिल खिलेगा।
पैसे झरेंगे, पेड़ हिलेगा।
सिर गायब, टोपा सिलेगा
गूंगा रहोगे, गुड़ मिलेगा...!
यदि आप भी किसी भ्रष्टाचार का शिकार हुए हैं...कोई आपको परेशान कर रहा है तो आवाज जरूर उठाइए। द सूत्र आपके साथ खड़ा है। अक्सर आप लोगों में से कुछ का यह सवाल होता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायत आखिर करें कहां? हम इसका भी हल लेकर आए हैं। चाहे पीएमओ का नंबर हो या फिर सीएमओ का, सभी जरूरी जानकारी हम दे रहे हैं।
सबसे पहले बात पीएमओ की...
पीएमओ में कैसे शिकायत दर्ज करें?
ऑनलाइन पोर्टल खोलें: https://pgportal.gov.in पर जाएं और Lodge Your Grievance चुनें।
रजिस्ट्रेशन/लॉगिन: नाम, ईमेल, मोबाइल आदि विवरण भरकर अकाउंट बनाएं या लॉगिन करें।
शिकायत भरें: PMO कैटेगरी चुनें, विवरण लिखें, दस्तावेज अपलोड करें और सबमिट करें।
स्टेटस ट्रैक करें: रजिस्ट्रेशन नंबर से https://pgportal.gov.in पर चेक करें।
पोस्ट विकल्प: यदि ऑनलाइन न हो, तो पत्र भेजें: Prime Minister's Office, South Block, New Delhi - 110011।
इन बातों पर जरूर ध्यान दें
शिकायत स्पष्ट, संक्षिप्त और तथ्यों पर आधारित रखें। पॉइंट-वाइज प्रश्न पूछें। यदि शिकायत किसी विशिष्ट मंत्रालय से संबंधित है तो CPGRAMS में उचित कैटेगरी चुनें, लेकिन PMO को एस्केलेट किया जा सकता है। स्टेटस चेक करने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर सुरक्षित रखें। यदि कोई समस्या हो, तो CPGRAMS हेल्पलाइन या FAQ देखें।
यदि आपकी शिकायत गंभीर है, तो इसे ट्विटर (@PMOIndia) पर भी मेंशन कर सकते हैं, लेकिन आधिकारिक पोर्टल प्राथमिक तरीका है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)
जांच एजेंसी का नाम: केंद्रीय जांच ब्यूरो
अंग्रेजी में जांच एजेंसी का नाम: Central Bureau of Investigation
किस तरह की शिकायतें की जा सकती हैं: भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध, विशेष अपराध और केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले
जांच एजेंसी का संपर्क नंबर: 011-24362736, 011-24366465 (AC-II Delhi), 011-24361515 (AC-III Delhi)
जांच एजेंसी का ईमेल:information@cbi.gov.in (धोखेबाजों के खिलाफ), speou9del@cbi.gov.in (साइबर अपराध)
जांच एजेंसी की वेबसाइट:https://cbi.gov.in/
जांच एजेंसी का पूरा पता: Plot No 5-B, 8th Floor, A-Wing, CGO Complex, New Delhi-110003
प्रवर्तन निदेशालय (ED)
जांच एजेंसी का नाम: प्रवर्तन निदेशालय
अंग्रेजी में जांच एजेंसी का नाम: Directorate of Enforcement
किस तरह की शिकायतें की जा सकती हैं: मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA), विदेशी मुद्रा उल्लंघन (FEMA), भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) से जुड़े मामले
जांच एजेंसी का संपर्क नंबर: 011-23339102 / 103
जांच एजेंसी का ईमेल:ed-del-rev@nic.in (FEMA/PMLA उल्लंघन के लिए)
जांच एजेंसी की वेबसाइट:https://enforcementdirectorate.gov.in/
जांच एजेंसी का पूरा पता: Pravartan Bhawan, APJ Abdul Kalam Road, New Delhi – 110011
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)
जांच एजेंसी का नाम: केंद्रीय सतर्कता आयोग
अंग्रेजी में जांच एजेंसी का नाम: Central Vigilance Commission
किस तरह की शिकायतें की जा सकती हैं: केंद्रीय सरकार के विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें
जांच एजेंसी का संपर्क नंबर: 1800 110 180 (टोल फ्री), 1964 (हेल्पलाइन), 011-24651020 (कंट्रोल रूम)
जांच एजेंसी का ईमेल:coord1-cvc@nic.in
जांच एजेंसी की वेबसाइट:https://cvc.gov.in/
जांच एजेंसी का पूरा पता: Satarkta Bhawan, GPO Complex, Block A, INA, New Delhi-110023
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भोपाल
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का भोपाल कार्यालय मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध और केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामलों की जांच करता है। यह एंटी-करप्शन ब्रांच का हिस्सा है जो राज्य स्तर पर सक्रिय रहता है।​
जांच एजेंसी का नाम: केंद्रीय जांच ब्यूरो भोपाल
अंग्रेजी में जांच एजेंसी का नाम: Central Bureau of Investigation (CBI) Bhopal
किस तरह की शिकायतें की जा सकती हैं: भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध, विशेष मामलों की जांच​
जांच एजेंसी का संपर्क नंबर: 0755-2577355 (चार इमली कार्यालय), सामान्य CBI हेल्पलाइन के माध्यम से संपर्क​
जांच एजेंसी का ईमेल:hobbpl@cbi.gov.in
(सामान्य शिकायतों के लिए)​
जांच एजेंसी की वेबसाइट:https://cbi.gov.in
जांच एजेंसी का पूरा पता: Opposite Akant Park, Near Akshay Hospital, Char Imli, Bhopal, Madhya Pradesh - 462016​
भोपाल में यहां है दफ्तर
CBI भोपाल कार्यालय प्रोफेसर्स कॉलोनी क्षेत्र में भी सक्रिय है। साथ ही, उच्च प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामलों जैसे रेलवे कर्मचारियों की रिश्वतखोरी पर कार्रवाई करता रहा है। मध्य प्रदेश सरकार के कर्मचारियों की जांच के लिए राज्य की पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।
जांच एजेंसी का नाम: मध्यप्रदेश लोकायुक्त कार्यालय
अंग्रेजी में जांच एजेंसी का नाम: Madhya Pradesh Lokayukt
किस तरह की शिकायतें की जा सकती हैं: राज्य सरकार के अधिकारियों, मंत्रियों, विधायकों और कर्मचारियों से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले
जांच एजेंसी का संपर्क नंबर: 0755-2540889, 9407293446 (भ्रष्टाचार शिकायत हेल्पलाइन), 0755-123456
जांच एजेंसी का ईमेल:lokayuktmp@yahoo.in
जांच एजेंसी की वेबसाइट:https://mplokayukt.nic.in
Madhya Pradesh Lokayukta Office का पूरा पता: F-Block, Sultania Rd, Old Secretariat, SBI Bank Square, Bhopal, Madhya Pradesh 462001
सीबीआई एंटी करप्शन ब्रांच जबलपुर (मध्य प्रदेश)
जांच एजेंसी का नाम: केंद्रीय जांच ब्यूरो एंटी करप्शन ब्रांच जबलपुर
अंग्रेजी में जांच एजेंसी का नाम: CBI Anti Corruption Branch Jabalpur
किस तरह की शिकायतें की जा सकती हैं: केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों और मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध के मामले
जांच एजेंसी का संपर्क नंबर: 0761-2679222, 0761-2679111
जांच एजेंसी का ईमेल:hobacjbp@cbi.gov.in
जांच एजेंसी की वेबसाइट:https://cbi.gov.in
जांच एजेंसी का पूरा पता: CARVAS Commercial Complex, Block-A, IInd Floor, 15 Civil Lines, Jabalpur, 482001 (MP)
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