शादी से पहले प्री-मैरिज बैकग्राउंड चेक का नया ट्रेंड, आखिर क्यों हो रही ये सीक्रेट जांच
Aman Vaishnav | Aug 03, 2026, 12:15 IST
शादी से पहले प्री-मैरिज बैकग्राउंड चेक का नया ट्रेंड
देशभर में शादी से पहले दूल्हा या दुल्हन की जांच कराने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। मैट्रिमोनियल साइट्स, धोखा और धोखाधड़ी से बचने के लिए लोग अब रिश्तेदारों की जगह डिटेक्टिव की मदद ले रहे हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- देश में शादी से पहले बैकग्राउंड चेक कराने का चलन तेजी से बढ़ रहा है।
- पहले रिश्तेदार और पंडित रिश्ते लेकर आते थे।
- अब ज्यादातर रिश्ते मैट्रिमोनियल साइट्स पर बन रहे हैं।
- इसलिए परिवार डिटेक्टिव हायर कर रहे हैं।
- पिछले एक दशक में ऐसे मामलों में 4-5 गुना बढ़ोतरी हुई है।
डिटेक्टिव केस में उछाल
यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह बताता है कि शादी से पहले भरोसे का तरीका बदल गया है। अब लोग सिर्फ बातों पर यकीन नहीं करते।
दिल्ली के केस ने खोला सच
एजेंसी ने युवक के पुराने पते पर पड़ताल की। पता चला कि वह पहले से शादीशुदा था। उसकी पहली पत्नी ने कथित घरेलू प्रताड़ना के बाद आत्महत्या कर ली थी। यह जानकारी सामने आते ही परिवार ने रिश्ता तोड़ दिया।
अरेंज-लव दोनों में जांच
अब सिर्फ अरेंज मैरिज नहीं, लव मैरिज करने वाले भी एक-दूसरे की पृष्ठभूमि जांच करा रहे हैं। मार्केट एन टेल के अनुसार यह बाजार 2032 तक हर साल 31.64% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा मैट्रिमोनियल जांच का ही है।
पेरेंट्स कराते ज्यादा जांच
ज्यादातर जांच लड़कियों के चरित्र और पुराने रिलेशन को लेकर होती है। लड़कों के मामले में आमदनी, आदतें और नौकरी की जांच ज्यादा होती है।
टियर-2 शहरों में मांग
डिटेक्टिव विपिन कुमार कहते हैं कि ज्यादातर परिवार शक की वजह से नहीं आते। वे सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि प्रोफाइल में लिखी बातें सच हैं या नहीं।
617621d7-233
केतन केस के बाद असर
लोग फोन पर खासतौर पर इस मामले का जिक्र करते हुए प्री-मैरिज बैकग्राउंड चेक का अनुरोध करते हैं।
फीस और जांच में समय
वहीं अगर जांच कई शहरों में या विदेश में करनी हो तो फीस और बढ़ सकती है। एक मामले की जांच में आमतौर पर 15-20 दिन लगते हैं। इसमें सोशल मीडिया, बैंक खाते और फील्ड जांच शामिल होती है।
कानूनी मान्यता नहीं
कोई भी व्यक्ति अपने जोखिम पर निजी एजेंसी को नियुक्त कर सकता है, लेकिन ऐसी जांच को कानूनी जांच नहीं माना जाएगा। लोक अभियोजक ऐसे साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं कर सकता। हालांकि बचाव पक्ष इसे पेश कर सकता है।
किन रेड फ्लैग्स पर सबसे ज्यादा फोकस?
- पहले से शादीशुदा होना
- फर्जी नौकरी या सैलरी
- झूठी शैक्षणिक योग्यता
- आपराधिक मामले
- घरेलू हिंसा का इतिहास
- भारी कर्ज
- नशे की लत
ये खबरें भी पढ़िए।
देश दुनिया न्यूज: एमपी में पतियों के लिए काल बनी पत्नियां, 7 महीनों में 15 को उतारा मौत के घाट
क्राइम न्यूज: प्रेमी के चक्कर में की पतियों की हत्या, अब भोग रहीं कर्मों की सजा
सुहागरात की रात स्पाइडर-वुमन बनी दुल्हन, छत से लगाई छलांग, गहने लेकर फरार
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari