PWD में औचक जांच: दावे बड़े, लेकिन जमीन पर ढीला निरीक्षण और इंजीनियरों की सेटिंग!

PWD मंत्री के दावों के बावजूद, भोपाल में लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण की गति धीमी है। तकनीकी स्टाफ की कमी, संसाधनों की कमी और कार्रवाई में सुस्ती ने सवाल खड़े किए हैं।

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Ramanand Tiwari
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pwd surprise inspection

BHOPAL. मध्यप्रदेश में लोक निर्माण विभाग (PWD) गुणवत्ता और औचक निरीक्षण के बड़े-बड़े दावे कर रहा है। मंच से मंत्री सख्ती की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ विभाग के अंदर निरीक्षण सिर्फ फाइलों तक सीमित रहने के आरोप हैं।

संसाधनों की कमी, तकनीकी स्टाफ की घटती संख्या और लंबित शिकायतों के बीच सवाल उठ रहा है। क्या वाकई गुणवत्ता सुधर रही है या सिर्फ दावे ही किए जा रहे हैं?

कार्यक्रम में क्या कहा गया?

भोपाल में ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट और भवन निर्माण तकनीक कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव और PWD मंत्री राकेश सिंह ने विभाग की उपलब्धियों और योजनाओं पर बात की।

मुख्यमंत्री ने इंजीनियरों को विश्वकर्मा का अवतार बताया। उन्होंने कहा कि सड़क, पुल और भवन निर्माण में गुणवत्ता और समयसीमा बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इंजीनियरों को जनता, पुलिस, ठेकेदार और जनप्रतिनिधियों से चुनौतियां मिलती हैं।

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सख्ती, टेक्नोलॉजी और ट्रेनिंग

PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि औचक निरीक्षण की रफ्तार बढ़ाई जाएगी। गलत काम करने वालों पर कार्रवाई होगी। सही काम करने वालों को संरक्षण मिलेगा। पीएम गतिशक्ति पोर्टल से बजट मॉनिटरिंग की जा रही है। हर किलोमीटर सड़क और हर रुपये का हिसाब डिजिटल सिस्टम में दर्ज होगा। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद सहित कई संस्थानों से तकनीकी सहयोग लिया जा रहा है। साथ ही इंजीनियरों को आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग दी जा रही है।

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एमओयू और ट्रेनिंग मॉडल

मंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम और भवन विकास निगम ने CRRI, IIT मुंबई, SPA भोपाल से एमओयू की प्रक्रिया शुरू की है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में ऐसा ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनेगा। यहां दूसरे राज्यों के इंजीनियर भी प्रशिक्षण लेने आएंगे।

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जमीनी हकीकत क्या कहती है?

मंत्री के दावों के उलट विभाग के भीतर कई गंभीर सवाल खड़े हैं। औचक निरीक्षण या औपचारिकता?औचक निरीक्षण की बात तो होती है, लेकिन कई मामलों में सिर्फ खानापूर्ति के आरोप हैं। कुछ इंजीनियरों को शो-कॉज नोटिस दिए जाते हैं, पर आगे की कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है। तकनीकी अमले की कमी विभाग के पास विशेषज्ञ तकनीकी स्टाफ लगभग ना के बराबर बताया जा रहा है। गुणवत्ता जांच के लिए जरूरी संसाधन भी सीमित हैं।

सवाल उठता है कि निरीक्षण टीम गुणवत्ता का सही आकलन कैसे करेगी? कई सड़कों पर मेजरमेंट अधिक चढ़ाने और गुणवत्ता में कमी की शिकायतें लंबित हैं। लेकिन कार्रवाई के ठोस उदाहरण कम नजर आते हैं। BDC निर्माण पर भवन निर्माण करने वाली एजेंसियों के खिलाफ गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आईं। इनकी पुष्टि विभागीय स्तर पर भी हुई, फिर भी कार्रवाई का अभाव विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

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शो-कॉज के बाद ‘सॉफ्ट कॉर्नर’?

बीच में नोटिस और कार्रवाई की बातों से इंजीनियरों में असंतोष और एकजुटता की स्थिति बनी। इसके बाद औचक निरीक्षण की गति धीमी पड़ने की चर्चा भी विभागीय हलकों में है। कुछ जानकार इसे सेटिंग सिस्टम का हिस्सा मानते हैं।

क्या सिर्फ ट्रेनिंग से सुधरेगी गुणवत्ता?

विभाग का कहना है कि इंजीनियरों को नई तकनीक की ट्रेनिंग दी जा रही है। लेकिन अनुभवी इंजीनियरों का कहना है कि उन्हें बुनियादी ट्रेनिंग की जरूरत नहीं है। वास्तविक चुनौती संसाधन उपलब्ध कराना, निष्पक्ष निरीक्षण, समयबद्ध कार्रवाई और जवाबदेही तय करना है।

औचक निरीक्षण के दावे तेज हैं, लेकिन जमीनी कार्रवाई धीमी है। तकनीकी स्टाफ और संसाधनों की कमी, गुणवत्ता संबंधी शिकायतें लंबित हैं, और शो-कॉज नोटिस के बाद कार्रवाई शिथिल हो जाती है। डिजिटल मॉनिटरिंग और एमओयू की प्रक्रिया जारी है। पांच करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट में लोक कल्याण सरोवर थीम लागू करने की तैयारी है।

लॉजिस्टिक कॉस्ट घटाने का लक्ष्य

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने कहा कि विभाग लॉजिस्टिक कॉस्ट में 10-12 प्रतिशत कमी लाने पर काम कर रहा है। साथ ही, भवन निर्माण तकनीक को विकसित भारत की कार्ययोजना के अनुरूप अपडेट किया जा रहा है। जब विभाग के पास विशेषज्ञ और संसाधन नहीं हैं, तो औचक निरीक्षण की सख्ती कैसे सुनिश्चित होगी? क्या डिजिटल पोर्टल और ट्रेनिंग ही गुणवत्ता की गारंटी हैं, या जमीनी स्तर पर जवाबदेही ज्यादा जरूरी है? मंच से तकनीक, पारदर्शिता और सख्ती की बातें हो रही हैं। लेकिन निरीक्षण निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई के बिना गुणवत्ता सुधार का दावा अधूरा रहेगा। PWD की सबसे बड़ी चुनौती है। दावों को जमीन पर साबित करना।

मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री मोहन यादव मोहन यादव भोपाल PWD राकेश सिंह
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