बार-बार भर्ती परीक्षा और फीस से बेहाल बेरोजगार, कब हकीकत बनेगी सरकारी घोषणा

Sanjay Sharma | Feb 03, 2026, 22:44 IST
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Unemployed suffering from repeated recruitment exams and fees
Photograph: (the sootr)

बेरोजगार युवाओं को बार-बार परीक्षा फीस चुकाने का दबाव है। सीएम डॉ. मोहन यादव और पूर्व सीएम शिवराज का वादा अब तक अधूरा। बेरोजगार युवाओं की राहत का इंतजार।

News in Short

1.सरकारी नौकरी के लिए मध्य प्रदेश के युवा लगातार जद्दोजहद में उलझे।
2. वन टाइम फीस और एक भर्ती परीक्षा की घोषणा लागू करना भूली सरकार।
3. अलग- अलग भर्ती परीक्षाओं के लिए युवा बार- बार चुका रहे हैं फीस।
4. मध्य प्रदेश में एक लाख से ज्यादा पदों पर नियुक्ति के लिए हो रही भर्तियां।
5. जीएडी को सीएम की घोषणा याद दिलाने 'द सूत्र' भी उठाता रहा है युवाओं की आवाज।

INTRO

सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवा बार- बार परीक्षा देने मजबूर हैं। हर भर्ती परीक्षा के लिए उनसे अलग से फीस भी वसूली जा रही है। युवाओं को सीएम डॉ.मोहन यादव की यूपीएससी की तर्ज पर एक भर्ती परीक्षा की घोषणा पर अमल का इंतजार है।

पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा साल 2023 में किया वन टाइम फीस का वादा पूरा न होने से भी युवा निराश हैं। दो साल में दो मुख्यमंत्रियों से बेरोजगार युवाओं को आश्वासन ही मिले हैं, लेकिन उनकी घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। इस वजह से मध्य प्रदेश के लाखों युवा भर्ती परीक्षा की तैयारी और अलग-अलग फीस चुकाने का दबाव झेल रहे हैं।

News in Detail

BHOPAL. मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियों के लिए कर्मचारी चयन मंडल और मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग के माध्यम से भर्ती परीक्षाएं कराई जाती हैं। हर साल एमपीपीएससी और ईएसबी औसतन 15 से 18 भर्ती परीक्षाओं का आयोजन करते हैं।

अलग-अलग पदों और श्रेणियों के लिए होने वाली भर्ती परीक्षाओं के लिए अभ्यर्थी युवाओं से कम से कम 500 और अधिकतम 1500 रुपए फीस वसूली जाती है। इस वजह से एक भर्ती में चयन से वंचित अभ्यर्थी दूसरी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए बार- बार फीस चुकानी पड़ती है। ऐसे में आर्थिक तंगी झेल रहे बेरोजगार युवाओं को सबसे मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ता है।

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बेरोजगारों पर बार- बार फीस चुकाने का बोझ

सरकारी नौकरी के लिए मध्य प्रदेश के युवा लगातार जद्दोजहद में उलझे हुए हैं। भर्तियों में पदों की संख्या बेहद सीमित होने और अभ्यर्थियों की संख्या लाखों होने से चंद युवा ही सफल हो पाते हैं। नौकरी के अवसर से वंचित युवाओं को साल में कई भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने की चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है।

अलग-अलग विभाग और श्रेणियों के लिए होने वाली भर्तियों की तैयारी के लिए पढ़ाई के अलावा फीस जमा करना भी उन्हें मुश्किल में डालता है। इस वजह से मध्य प्रदेश में लंबे समय से वन टाइम फीस और समान श्रेणी के अलग- अलग विभागों के पदों की एक साथ भर्ती की मांग उठ रही है। द सूत्र ने भी युवाओं की इस मांग को अभियान के रूप में प्रदेश सरकार तक उठा चुका है।

शिवराज का वादा पूरा हुआ न मोहन की घोषणा

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बेरोजगार युवाओं को वन टाइम फीस का भरोसा दिलाया था। उनकी सरकार में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अप्रेल 2023 में इस संबंध में आदेश भी जारी किया गया था। जिसमें कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित होने वाली भर्तियों के लिए एक बार रजिस्ट्रेशन और एक बार फीस जमा करने के निर्देश दिए गए थे। हांलाकि यह आदेश अमल में नहीं आया और चुनाव के बाद सरकार का चेहरा बदल गया। अंतत: सरकार वादा करने के बावजूद युवाओं के भरोसे पर खरा नहीं उतर पाई।

सीएम की घोषणा पर अमल भूला जीएडी

युवाओं की भर्ती परीक्षाओं के लिए अलग- अलग फीस की मुश्किल हो देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने भी उन्हें आश्वस्त किया था। अक्टूबर 2025 में सीएम यादव ने मंत्रालय के वल्लभ भाई पटेल पार्क में दिवाली मिलन समारोह के दौरान यूपीएससी की तर्ज पर एक भर्ती परीक्षा कराने की घोषणा की थी। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि अब विभागों के लिए युवाओं को अलग-अलग परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी और समान श्रेणी के पदों के लिए एक ही परीक्षा होगी।

इस घोषणा के बाद युवाओं को अलग- अलग भर्ती परीक्षा की तैयारी और फीस चुकाने की मजबूरी से राहत की उम्मीद थी। हांलाकि पांच महीने बीत चुके हैं लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग को सीएम की महत्वपूर्ण घोषणा को अमल में लाने की सुध ही नहीं है।

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वन टाइम फीस- वन एग्जाम, इसलिए अहम

मध्य प्रदेश सरकार के विभागों में सवा लाख पद अभी भी खाली हैं। ग्रेड 1 और ग्रेड 2 के कुल् स्वीकृत 14,800 पदों में से लगभग 6200 पर ही नियुक्ति हैं शेष 8 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। वहीं विभागों में ग्रेड 3 और ग्रेड 4 के स्वीकृत 7 लाख से ज्यादा पदों में से लगभग 1 लाख पर नियुक्ति का सालों से इंतजार है। इनमें से कुछ पदों पर नियुक्ति होती है लेकिन तब तक उससे अधिक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

सरकार के मुखिया डॉ.मोहन यादव कुछ महीने पहले ही दो लाख पदों पर नियुक्तियां निकालने की घोषणा कर चुके हैं। कर्मचारी चयन मंडल और एमपीपीएससी की भर्तियां भी तेज हुई हैं। अब युवा वन टाइम फीस और एक भर्ती परीक्षा की घोषणा को लागू करने की आस लगाए हैं।

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