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BHOPAL. मुख्यमंत्री सचिवालय में तीन रिटायर्ड अधिकारियों को फिर से अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। नए OSD के तौर पर अजातशत्रु श्रीवास्तव की नियुक्ति को लेकर 'द सूत्र' ने गुरुवार को ब्रेकिंग खबर दी थी। अब आधिकारिक आदेश से 'द सूत्र' की खबर पर मुहर लग गई है। राज्य सरकार ने दो रिटायर्ड आईएएस और एक आईपीएस अफसर की संविदा सेवा बढ़ाई है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किए आदेश
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेशों के मुताबिक पहले से कार्यरत दो रिटायर्ड अफसरों की संविदा सेवा एक साल के लिए बढ़ाई गई। चार महीने से खाली पड़े OSD पद पर नई नियुक्ति को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से सीएम सचिवालय में कामकाज को अनुभव का सहारा मिलेगा।
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किन अफसरों की संविदा बढ़ी?
रिटायर्ड आईएएस गोपाल चंद्र डाड पहले से मुख्यमंत्री सचिवालय में संविदा पर कार्यरत थे। जनवरी 2025 में जारी शर्तों के आधार पर उनकी सेवा एक साल के लिए बढ़ाई गई। वह मुख्यमंत्री के OSD के रूप में सिंहस्थ मामलों के सलाहकार हैं। राजेश हिंगणकर (रिटायर्ड आईपीएस) की संविदा नियुक्ति की अवधि फिर से बढ़ाई गई है।
वह आगे भी मुख्यमंत्री के OSD के तौर पर काम करते रहेंगे। सुरक्षा और प्रशासनिक अनुभव के कारण सरकार के भरोसेमंद अफसर हैं। अजातशत्रु श्रीवास्तव नए OSD के रूप में मुख्यमंत्री सचिवालय में शामिल हुए हैं।
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अधिकारी की एंट्री हुई है
आईएएस अजातशत्रु श्रीवास्तव को OSD नियुक्त किया गया है। पूर्व आईएएस महेश चौधरी की जगह उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह पद पिछले चार महीनों से रिक्त था। अजातशत्रु श्रीवास्तव कोई नया नाम नहीं हैं। वे पहले भी मुख्यमंत्री सचिवालय में OSD और अन्य भूमिकाओं में सेवाएं दे चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में भी वह OSD रहे थे।
अजातशत्रु श्रीवास्तव को सचिवालय की कार्यप्रणाली और सिस्टम की गहरी समझ मानी जाती है। वे अनुभवी अफसरों से निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाते हैं। संवेदनशील मामलों में उन्हें भरोसेमंद सलाहकार माना जाता है। सचिवालय में निरंतरता बनी रहती है।
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रिटायर्ड अफसरों पर बढ़ती निर्भरता
युवा अधिकारियों को मौके सीमित हैं, नई सोच और ऊर्जा पर सवाल उठे हैं। सरकार का साफ संदेश है कि अनुभव अभी भी प्राथमिकता है। सीएम सचिवालय में हुई ये संविदा नियुक्तियाँ यह संकेत देती हैं कि सरकार फिलहाल अनुभव और भरोसे को सबसे ऊपर रख रही है। अब देखना यह होगा कि ये अफसर नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक समन्वय में कितना प्रभावी साबित होते हैं।
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