रीवा कलेक्टर बोले-ये अस्पताल है या कचराघर, औचक निरीक्षण में गायब मिले 190 कर्मचारी
Sanjay Dhiman | Sept 08, 2026, 17:30 IST
rewa-collector-sgmh-hospital-inspection
रीवा में कलेक्टर ने संजय गांधी अस्पताल का सोमवार रात में औचक निरीक्षण किया। डॉक्टर नदारद मिले, वार्डों में गंदगी मिली। कलेक्टर ने कड़ी फटकार लगाई और कार्रवाई की चेतावनी दी।
रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने संजय गांधी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई डॉक्टर ड्यूटी से गायब मिले। वार्डों में गंदगी और अव्यवस्था देखकर कलेक्टर नाराज हो गए। उन्होंने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी और कार्रवाई के निर्देश दिए। हाल के दिनों में अस्पताल से जुड़े तीन गंभीर मामले सामने आए हैं।
![543dc7e9-ac5]()
रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी मंगलवार देर रात अचानक संजय गांधी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पूरे अस्पताल का बारीकी से जायजा लिया। वार्डों में गंदगी और अव्यवस्था देखकर वे भड़क गए। उन्होंने कहा कि ये अस्पताल है या कोई कचरा खाना।
निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठे। कलेक्टर ने पूछा कि सफाई वाला कहां है। एक कर्मचारी सामने आया तो उसे भी फटकार पड़ी। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि वे रात 2 बजे या सुबह 6 बजे भी दोबारा आ सकते हैं।
निरीक्षण में कई सीनियर ड्यूटी डॉक्टर अस्पताल से नदारद पाए गए। कलेक्टर ने प्रभारी डीन डॉ. मनोज इंदुलकर से सीधे सवाल किए। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की मौजूदगी सुनिश्चित होनी चाहिए। अगली बार निरीक्षण में तकिए और चादरों की स्थिति भी देखी जाएगी।
कलेक्टर ने बताया कि कुल 300 कर्मचारियों में से केवल 190 मौजूद मिले। उन्होंने डीन को चेतावनी दी कि उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। कलेक्टर ने कहा कि यह सरकारी पैसा है, यह लूट मचाने की जगह नहीं है। गैरहाजिरी और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की बात कही गई।
ऑर्थोपेडिक्स वार्ड में पुराने गद्दे खुले में बिखरे मिले। इस पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी जताई। वार्ड इंचार्ज का 7 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए। अस्पताल में मरीजों के अटेंडरों की भीड़ भी देखी गई।
कलेक्टर ने कहा कि मरीजों की संख्या के हिसाब से व्यवस्थाएं होनी चाहिए। मौके पर व्यवस्थाएं अपेक्षा के अनुसार नहीं मिलीं। सुरक्षा और सफाई एजेंसी के काम पर भी सवाल उठाए गए।
बीते दो हफ्तों में संजय गांधी अस्पताल से जुड़े तीन गंभीर मामले सामने आए हैं। इन्हीं शिकायतों के बीच कलेक्टर ने यह निरीक्षण किया।
पहला मामला 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा का है। पहली डिलीवरी के दौरान गांधी मेमोरियल अस्पताल में कल्पना और उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई। मौत से पहले कल्पना का एक वीडियो सामने आया था। वीडियो में वह रोते हुए इलाज पर सवाल उठा रही थीं। परिजन ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
दूसरा मामला सतना की अर्चना गुप्ता का है। स्कूटी हादसे के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिनों बाद उनकी हालत बिगड़ गई और शरीर में कीड़े पड़ने जैसी स्थिति बन गई। परिजन का आरोप है कि दूसरे अस्पताल ले जाने की अनुमति भी नहीं दी गई।
तीसरा मामला 66 वर्षीय गिरिजा प्रसाद गुप्ता से जुड़ा है। इलाज के दौरान उन्हें मृत घोषित कर मॉर्च्यूरी भेज दिया गया था। करीब एक घंटे बाद उनकी पल्स दोबारा चलने की बात सामने आई। इसके बाद उन्हें वापस अस्पताल में भर्ती किया गया। परिजन और प्रत्यक्षदर्शियों ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
आईएएस नरेंद्र सूर्यवंशी ने अस्पताल प्रबंधन को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। सभी डॉक्टर और कर्मचारी ड्यूटी के दौरान मौजूद रहें, यह सुनिश्चित करने को कहा गया। गैरहाजिरी या लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई होगी।
उन्होंने साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। ड्यूटी व्यवस्था को गंभीरता से लागू कराने की बात कही गई। मरीजों को साफ-सुथरा वातावरण और बेहतर इलाज मिलना चाहिए, यह भी दोहराया गया।
कलेक्टर ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में व्यवस्थाएं सुधरेंगी। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ समय पर अस्पताल पहुंचेंगे, ऐसी अपेक्षा जताई गई। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है।
इस निरीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। डीन को अपने स्तर पर भी जवाबदेही तय करनी होगी। अगर अगली बार भी लापरवाही मिली, तो सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।
पिछले कुछ दिनों में सामने आए तीनों मामलों ने अस्पताल की छवि पर सवाल खड़े किए हैं। मरीजों और उनके परिजनों में डर और अविश्वास का माहौल बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता बेहद जरूरी हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ फटकार से समस्या हल नहीं होगी। उन्हें उम्मीद है कि कलेक्टर के निर्देशों का असर जमीन पर भी दिखेगा। आने वाले दिनों में दोबारा निरीक्षण से ही यह साफ होगा कि सुधार वाकई हुआ है या नहीं।
यह खबरें भी पढ़ें...
रीवा मेडिकल कॉलेज डीन का रविवार को तबादला, जच्चा-बच्चा मौत पर सरकार का एक्शन
रीवा में ACS ने जिस डॉक्टर को हटाने के दिए थे आदेश, तीन साल बाद हो सका निलंबन, उठे सवाल
बाढ़ में अंतिम यात्रा बनी चुनौती, रीवा में ड्रम पर शव रख पार कराया पानी भरा रास्ता
ED की खबर बनी मुसीबत! पाटन के युवक को मिली जान से मारने की धमकी
543dc7e9-ac5
रात में अचानक पहुंचे कलेक्टर
निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठे। कलेक्टर ने पूछा कि सफाई वाला कहां है। एक कर्मचारी सामने आया तो उसे भी फटकार पड़ी। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि वे रात 2 बजे या सुबह 6 बजे भी दोबारा आ सकते हैं।
डॉक्टरों की भारी कमी मिली
300 में 190 कर्मचारी मिले
गंदे वार्ड, बिखरे पुराने गद्दे
कलेक्टर ने कहा कि मरीजों की संख्या के हिसाब से व्यवस्थाएं होनी चाहिए। मौके पर व्यवस्थाएं अपेक्षा के अनुसार नहीं मिलीं। सुरक्षा और सफाई एजेंसी के काम पर भी सवाल उठाए गए।
दो हफ्ते में तीन बड़े मामले
पहला मामला 25 वर्षीय कल्पना मिश्रा का है। पहली डिलीवरी के दौरान गांधी मेमोरियल अस्पताल में कल्पना और उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई। मौत से पहले कल्पना का एक वीडियो सामने आया था। वीडियो में वह रोते हुए इलाज पर सवाल उठा रही थीं। परिजन ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
दूसरा मामला सतना की अर्चना गुप्ता का है। स्कूटी हादसे के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिनों बाद उनकी हालत बिगड़ गई और शरीर में कीड़े पड़ने जैसी स्थिति बन गई। परिजन का आरोप है कि दूसरे अस्पताल ले जाने की अनुमति भी नहीं दी गई।
तीसरा मामला 66 वर्षीय गिरिजा प्रसाद गुप्ता से जुड़ा है। इलाज के दौरान उन्हें मृत घोषित कर मॉर्च्यूरी भेज दिया गया था। करीब एक घंटे बाद उनकी पल्स दोबारा चलने की बात सामने आई। इसके बाद उन्हें वापस अस्पताल में भर्ती किया गया। परिजन और प्रत्यक्षदर्शियों ने पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
अस्पताल प्रबंधन को सख्त निर्देश
उन्होंने साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। ड्यूटी व्यवस्था को गंभीरता से लागू कराने की बात कही गई। मरीजों को साफ-सुथरा वातावरण और बेहतर इलाज मिलना चाहिए, यह भी दोहराया गया।
कलेक्टर ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में व्यवस्थाएं सुधरेंगी। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ समय पर अस्पताल पहुंचेंगे, ऐसी अपेक्षा जताई गई। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह कार्रवाई अहम मानी जा रही है।
आगे क्या हो सकता है
पिछले कुछ दिनों में सामने आए तीनों मामलों ने अस्पताल की छवि पर सवाल खड़े किए हैं। मरीजों और उनके परिजनों में डर और अविश्वास का माहौल बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता बेहद जरूरी हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ फटकार से समस्या हल नहीं होगी। उन्हें उम्मीद है कि कलेक्टर के निर्देशों का असर जमीन पर भी दिखेगा। आने वाले दिनों में दोबारा निरीक्षण से ही यह साफ होगा कि सुधार वाकई हुआ है या नहीं।
यह खबरें भी पढ़ें...
रीवा मेडिकल कॉलेज डीन का रविवार को तबादला, जच्चा-बच्चा मौत पर सरकार का एक्शन
रीवा में ACS ने जिस डॉक्टर को हटाने के दिए थे आदेश, तीन साल बाद हो सका निलंबन, उठे सवाल
बाढ़ में अंतिम यात्रा बनी चुनौती, रीवा में ड्रम पर शव रख पार कराया पानी भरा रास्ता
ED की खबर बनी मुसीबत! पाटन के युवक को मिली जान से मारने की धमकी
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कारंजा ही क्यों जा रहे? बालासाहेब देवरस के गांव में सेवा की नई कसौटी
By Ramanand Tiwari
MP Engineering College में 41 हजार सीटें खाली, छात्र अब डिग्री नहीं प्लेसमेंट और फैकल्टी देखकर चुन रहे कॉलेज
By Ramanand Tiwari
आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े के आरोप में भोपाल के सृष्टि हॉस्पिटल संचालक के खिलाफ EOW ने दर्ज किया केस
By Sandeep Kumar
प्रेमी को फोन कर मिलने बुलाया, फिर पति के साथ मिलकर काटा गला, बलरामपुर वसीम हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा, पति-पत्नी पहुंचे जेल
By Umeshwari Baghel
MP ADPO और IBPS Law Mains की तारीख टकराई, अभ्यर्थी अब किसे चुनें? MPPSC से बदलाव की गुहार
By Sandeep Kumar
लॉरेंस बिश्नोई के नाम 50 करोड़ की फिरौती मांगने वाला शोएब ढेबर फरार, पता बताने वाले को पुलिस देगी 5 हजार रुपए
By VINAY VERMA
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें, MP शिक्षक भर्ती पर गरमाई सियासत, कूनो में फिर गूंजी किलकारी...
By Sandeep Kumar