मध्यावधि 2026: रीवा संभाग की 22 सीटों पर जनता की राय, सीधी जिला सबसे चुनौतीपूर्ण
The Sootr | Jun 15, 2026, 15:10 IST
रीवा संभाग
रीवा संभाग: 13 जून 2026 को मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार का आधा सफर पूरा हो गया। ढाई साल बीत गए हैं। अब उल्टी गिनती शुरू है। और ठीक इसी दौरान thesootr लेकर आया है मध्य प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा और विश्वसनीय सर्वे…
मध्य प्रदेश की हर विधानसभा से डेटा लेकर तैयार किए गए इस सर्वे में जानिए... रीवा संभाग के लोगों के मन की बात… और हां! ये सर्वे किसी तरह की घोषणा नहीं करता सिर्फ प्राप्त आंकड़ों से परसेप्शन बताता है।
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रीवा संभाग में चार जिले आते हैं- रीवा, सतना, सिंगरौली और सीधी। इन चारों को मिलाकर कुल 22 विधानसभा सीटें बनती हैं। इनमें से 18 सीटों पर बीजेपी का कब्जा है, जबकि 4 सीटें कांग्रेस के पास हैं।
अब thesootr के बड़े सर्वे के जो नतीजे आए हैं, वो काफी दिलचस्प तस्वीर दिखाते हैं।
लोगों की राय लगभग बराबरी पर टिकी हुई है। विधायक से संतुष्टि 53.6% है, सरकार से संतुष्टि 52.3% है और कांग्रेस की सक्रियता 49.9% लोगों ने मानी है।
यानि तीनों ही आंकड़े 50% के आसपास ही घूम रहे हैं। किसी भी पक्ष को साफ बढ़त नहीं मिल रही है।
सीधी भाषा में कहें तो रीवा संभाग पूरी तरह मुकाबले में है। यहां न कोई एक तरफा लहर है और न ही किसी एक दल का साफ दबदबा-सब कुछ टक्कर का चल रहा है।
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यहां एक खास बात यह है कि विधायक संतुष्टि और सरकार संतुष्टि लगभग बराबर-बराबर हैं। इसका मतलब है कि जहां विधायक मजबूत है, वहां सरकार की छवि भी बेहतर दिखती है। जहां विधायक कमजोर है, वहां सरकार की साख भी नहीं बचा पाती।
सत्ता पक्ष के लिए यह राहत और चिंता दोनों है। राहत इसलिए कि मजबूत विधायक सरकार विरोध को थाम सकता है। चिंता इसलिए कि कमजोर विधायक वाली सीटों पर सरकार का कोई अतिरिक्त फायदा नहीं मिलेगा।
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विधायक संतुष्टि में रीवा जिले की सेमरिया सीट सबसे ऊपर है। यहां कांग्रेस विधायक अभय कुमार मिश्रा की संतुष्टि दर 62.4 फीसदी है। इसके ठीक बाद सिंगरौली जिले की चितरंगी सीट पर भाजपा (BJP) विधायक राधा रविन्द्र सिंह 62.3 फीसदी के साथ हैं। दोनों के बीच का फर्क महज 0.1 फीसदी है।
दूसरी तरफ सबसे कम संतुष्टि रीवा जिले की गुढ़ सीट पर है जहां भाजपा विधायक नागेन्द्र सिंह की दर सिर्फ 43.9 फीसदी है। शीर्ष और तल के बीच करीब 18 फीसदी का अंतर दिखाता है कि यहां संतुष्टि पार्टी नहीं, व्यक्तिगत विधायक पर निर्भर करती है।
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सतना जिले की सात सीटों में सरकार संतुष्टि 55.1 फीसदी है, जो पूरे संभाग में सबसे अच्छी है। यह जिला सत्ता पक्ष के लिए सबसे भरोसेमंद बनकर उभरा है। चित्रकूट सीट पर भाजपा विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार की विधायक संतुष्टि 60.5 फीसदी है। रामपुर-बघेलान में सरकार संतुष्टि 60 फीसदी के साथ पूरे संभाग में सबसे ऊपर है।
जिले में दो कांग्रेस सीटें भी हैं, सतना और अमरपाटन। सतना सीट पर कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा की संतुष्टि 55.3 फीसदी है। अमरपाटन में कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह की संतुष्टि 54.8 फीसदी है लेकिन सरकार संतुष्टि 46.7 और कांग्रेस सक्रियता 53.3 फीसदी के साथ यह सीट कांग्रेस का अपेक्षाकृत मजबूत किला बनी हुई है।
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चार सीटों वाले सीधी जिले में सरकार संतुष्टि सिर्फ 46.9 फीसदी है, जो पूरे संभाग में सबसे कम है। इसी जिले में कांग्रेस सक्रियता 55.9 फीसदी के साथ सबसे ऊंची है। यह जोड़ सत्ता पक्ष के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है।
जिले की चुरहट सीट पर कांग्रेस विधायक अजय सिंह उर्फ राहुल सिंह की विधायक संतुष्टि 60.3 फीसदी है और कांग्रेस सक्रियता पूरे संभाग में सबसे ज्यादा 68.3 फीसदी है। यहां सरकार संतुष्टि सिर्फ 42.9 फीसदी है। यह कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ है। सिहावल सीट भाजपा के लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक है जहां सरकार संतुष्टि पूरे संभाग में सबसे कम, सिर्फ 39.8 फीसदी है। धौहनी में विधायक और सरकार दोनों दबाव में हैं और कांग्रेस सक्रियता 55.6 फीसदी तक पहुंची है।
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आठ सीटों वाले रीवा जिले में विधायक संतुष्टि 51.9 और सरकार संतुष्टि 52.4 फीसदी है। कांग्रेस सक्रियता 47 फीसदी के साथ संभाग में सबसे कम है। इसका मतलब है कि विपक्षी दबाव यहां थोड़ा कम है। देवतालाब सीट भाजपा के लिए सबसे सुरक्षित है। यहां विधायक गिरीश गौतम की संतुष्टि 56.4 और सरकार संतुष्टि 58.6 फीसदी है। कांग्रेस सक्रियता यहां सिर्फ 38.3 फीसदी है जो पूरे संभाग में सबसे कम है।
गुढ़ और त्योंथर में विधायक संतुष्टि औसत से नीचे है, जो जमीनी जुड़ाव की कमी दिखाती है। मऊगंज में सरकार संतुष्टि 45.1 फीसदी के साथ कमजोर है।
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सिंगरौली में सिर्फ तीन सीटें हैं, लेकिन तीनों के आंकड़ों में बड़ा फर्क है। चितरंगी में विधायक संतुष्टि 62.3 और सरकार संतुष्टि 58 फीसदी के साथ जिले की सबसे मजबूत सीट है। सिंगरौली शहर सीट पर विधायक संतुष्टि 53.2 फीसदी ठीक है लेकिन कांग्रेस सक्रियता 58.3 फीसदी के साथ संभाग में दूसरे नंबर पर है। यह विपक्ष की ताकतवर जमीनी मौजूदगी का संकेत है। देवसर में सरकार संतुष्टि 44.9 फीसदी कमजोर है लेकिन कांग्रेस सक्रियता भी 40.4 फीसदी के साथ कम है। यहां दोनों पक्षों के लिए अवसर और जोखिम बराबर-बराबर हैं।
यह सर्वे रीवा संभाग के मतदाताओं की असली जनभावना को सामने लाता है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद (Article) 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी देता है और अनुच्छेद 21 जीवन की गरिमा सुनिश्चित करता है। जब योजनाएं जमीन तक नहीं पहुंचती तो संविधान की यही भावना कमजोर होती है। यह सर्वे जनता को उनके प्रतिनिधियों की कार्यक्षमता जांचने का लोकतांत्रिक अवसर देता है। अनुच्छेद 51A (Article 51A) के तहत यह प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है कि वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाए। यह डेटा नागरिकों, नेताओं और नीति-निर्माताओं, तीनों के लिए जरूरी आईना है। पारदर्शी और तथ्य-आधारित पत्रकारिता ही जिम्मेदार लोकतंत्र की नींव है।
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हमने पूछे सिर्फ तीन सवाल
- क्या आप अपने विधायक से संतुष्ट हैं?
- BJP और डॉ. मोहन यादव की सरकार से संतुष्ट हैं या नहीं?
- क्या कांग्रेस प्रदेश में active दिखती है?
तो पहली बार हर नागरिक जान सकेगा
- उसके अपने जिले का मूड क्या है
- उसके विधायक को जनता पास करती है या फेल
- मोहन यादव सरकार के बारे में उसके इलाके की राय क्या है
- कांग्रेस जनता को active दिखती है या नहीं
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रीवा संभाग: 50 फीसदी के इर्द-गिर्द अटकी जनभावना
अब thesootr के बड़े सर्वे के जो नतीजे आए हैं, वो काफी दिलचस्प तस्वीर दिखाते हैं।
लोगों की राय लगभग बराबरी पर टिकी हुई है। विधायक से संतुष्टि 53.6% है, सरकार से संतुष्टि 52.3% है और कांग्रेस की सक्रियता 49.9% लोगों ने मानी है।
यानि तीनों ही आंकड़े 50% के आसपास ही घूम रहे हैं। किसी भी पक्ष को साफ बढ़त नहीं मिल रही है।
सीधी भाषा में कहें तो रीवा संभाग पूरी तरह मुकाबले में है। यहां न कोई एक तरफा लहर है और न ही किसी एक दल का साफ दबदबा-सब कुछ टक्कर का चल रहा है।
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विधायक और सरकार की संतुष्टि साथ-साथ चल रही है
सत्ता पक्ष के लिए यह राहत और चिंता दोनों है। राहत इसलिए कि मजबूत विधायक सरकार विरोध को थाम सकता है। चिंता इसलिए कि कमजोर विधायक वाली सीटों पर सरकार का कोई अतिरिक्त फायदा नहीं मिलेगा।
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सेमरिया और चितरंगी शीर्ष पर
दूसरी तरफ सबसे कम संतुष्टि रीवा जिले की गुढ़ सीट पर है जहां भाजपा विधायक नागेन्द्र सिंह की दर सिर्फ 43.9 फीसदी है। शीर्ष और तल के बीच करीब 18 फीसदी का अंतर दिखाता है कि यहां संतुष्टि पार्टी नहीं, व्यक्तिगत विधायक पर निर्भर करती है।
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सतना: सरकार की सबसे मजबूत पकड़
जिले में दो कांग्रेस सीटें भी हैं, सतना और अमरपाटन। सतना सीट पर कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा की संतुष्टि 55.3 फीसदी है। अमरपाटन में कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह की संतुष्टि 54.8 फीसदी है लेकिन सरकार संतुष्टि 46.7 और कांग्रेस सक्रियता 53.3 फीसदी के साथ यह सीट कांग्रेस का अपेक्षाकृत मजबूत किला बनी हुई है।
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सीधी: सत्ता पक्ष की सबसे बड़ी चुनौती
जिले की चुरहट सीट पर कांग्रेस विधायक अजय सिंह उर्फ राहुल सिंह की विधायक संतुष्टि 60.3 फीसदी है और कांग्रेस सक्रियता पूरे संभाग में सबसे ज्यादा 68.3 फीसदी है। यहां सरकार संतुष्टि सिर्फ 42.9 फीसदी है। यह कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ है। सिहावल सीट भाजपा के लिए सबसे ज्यादा चिंताजनक है जहां सरकार संतुष्टि पूरे संभाग में सबसे कम, सिर्फ 39.8 फीसदी है। धौहनी में विधायक और सरकार दोनों दबाव में हैं और कांग्रेस सक्रियता 55.6 फीसदी तक पहुंची है।
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रीवा जिला: मिली-जुली तस्वीर
गुढ़ और त्योंथर में विधायक संतुष्टि औसत से नीचे है, जो जमीनी जुड़ाव की कमी दिखाती है। मऊगंज में सरकार संतुष्टि 45.1 फीसदी के साथ कमजोर है।
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सिंगरौली: छोटा पर ध्रुवीकृत जिला
यह खबर क्यों जरूरी है
FAQ
- प्रश्न 1: रीवा संभाग सर्वे में कितनी सीटें शामिल थीं और किन जिलों को शामिल किया गया?
उत्तर: रीवा संभाग की कुल 22 विधानसभा सीटें इस सर्वे में शामिल रहीं। चार जिले हैं जो हैं रीवा, सतना, सिंगरौली और सीधी। इनमें 18 सीटें भाजपा और 4 सीटें कांग्रेस के पास हैं। सर्वे में विधायक संतुष्टि, सरकार संतुष्टि और कांग्रेस सक्रियता, तीन मानकों पर जनता की राय ली गई। - प्रश्न 2: रीवा संभाग सर्वे में सबसे अच्छा और सबसे खराब प्रदर्शन किस सीट का रहा?
उत्तर: विधायक संतुष्टि में सेमरिया के कांग्रेस विधायक अभय कुमार मिश्रा 62.4 और चितरंगी के भाजपा विधायक राधा रविन्द्र सिंह 62.3 फीसदी के साथ शीर्ष पर हैं। सबसे कम संतुष्टि गुढ़ के भाजपा विधायक नागेन्द्र सिंह की 43.9 फीसदी रही। सरकार संतुष्टि में रामपुर-बघेलान 60 और सिहावल सीट पर 39.8 फीसदी के साथ सबसे निचले पायदान पर रही। - प्रश्न 3: रीवा संभाग में सत्ता पक्ष के लिए सबसे खतरनाक जिला कौन सा है और क्यों?
उत्तर: सीधी जिला सत्ता पक्ष के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण है। यहां सरकार संतुष्टि सिर्फ 46.9 फीसदी है जो पूरे संभाग में सबसे कम है। इसी जिले में कांग्रेस सक्रियता 55.9 फीसदी के साथ सबसे ऊंची है। चुरहट में कांग्रेस सक्रियता 68.3 फीसदी तक पहुंची है। सिहावल में सरकार संतुष्टि संभाग में सबसे कम 39.8 फीसदी है। धौहनी में भी दोनों मानक दबाव में हैं।
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