रीवा पुलिस के गवाह निकले अंतर्यामी, 6 गवाहों ने देख ली हजार वारदातें, ऐसे खुला राज

एमपी के रीवा जिले में पुलिस का एक अजीबोगरीब खेल उजागर हुआ है। यहां नियमों को ठेंगा दिखाकर गवाहों का गुट चलाया जा रहा था। मऊगंज क्षेत्र के दो थानों में 6 लोग हजार मुकदमों के गवाह बन गए। पुलिस ने अपने ही ड्राइवर और रसोइयों को चश्मदीद बनाकर पेश कर दिया।

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Aman Vaishnav
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News In Short

  • रीवा जिले के मऊगंज में पुलिस का गवाह सिंडिकेट पकड़ा गया।

  • सिर्फ 6 लोगों को 1 हजार से ज्यादा मुकदमों में गवाह बनाया गया।

  • अमित कुशवाहा नामक व्यक्ति 500 से अधिक केस का गवाह बना।

  • जांच में गवाह पुलिस के अपने ड्राइवर और रसोइया ही निकले।

  • मामले के बाद थाना प्रभारी जगदीश ठाकुर को लाइन हाजिर किया।

News In Detail

पुलिस ने बदली गवाह की परिभाषा

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। मऊगंज के लौर और नईगढ़ी थानों में दर्ज सैकड़ों मामलों में गवाहों को लेकर बड़ा घपला सामने आया है।

 CCTNS पोर्टल के आंकड़ों से पता चला है कि सिर्फ 6 लोगों को बार-बार सरकारी गवाह बनाया गया, और इनमें से कुछ के नाम तो 500 से ज्यादा मामलों में दर्ज हैं।

CCTNS पोर्टल ने ऐसे पकड़ी चोरी

पुलिस का यह कारनामा आधुनिक तकनीक ने रंगे हाथों पकड़ लिया है। CCTNS पोर्टल पर डेटा खंगालने के बाद सारा सच बाहर आ गया। कुछ चुनिंदा नाम पोर्टल पर सैकड़ों मुकदमों में दर्ज पाए गए। इसमें दिनेश कुशवाहा, राहुल विश्वकर्मा और अमित जैसे नाम प्रमुख थे। गंभीर अपराधों में भी इन्हीं लोगों को चश्मदीद बताया गया था। ताज्जुब की बात है कि एक ही दिन में इन्होंने कई अलग वारदातें होते देखीं।

पुलिस का ड्राइवर निकला सुपर गवाह

अमित कुशवाहा नाम का व्यक्ति इस खेल का सबसे बड़ा खिलाड़ी निकला। उसे पुलिस ने 500 से अधिक मुकदमों में गवाह बनाया था। रीवा पुलिस ने RTI में झूठ बोला कि वह उनका ड्राइवर नहीं है। लेकिन मीडिया के कैमरों ने पुलिस के दावों की पोल खोल दी। अमित पुलिस की सरकारी गाड़ी चलाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। वह थाने का स्टाफ होकर भी हर केस में गवाह था।

अपनों को ही बना दिया चश्मदीद

जांच में साफ हुआ कि गवाह पुलिस के ही करीबी कर्मचारी थे। इसमें थाना प्रभारी के ड्राइवर, रसोइया और अन्य कर्मचारी शामिल रहे। इन्हें बिना जानकारी के सैकड़ों मामलों में सरकारी गवाह बना दिया। आबकारी और ड्रग्स जैसे गंभीर केस में इनकी गवाही दर्ज हुई। पुलिस ने बाहरी गवाहों की जगह अपनों को ही चश्मदीद बनाकर केस की कागजी खानापूर्ति कर ली।

थाना प्रभारी पर गिरी गाज

इस गवाह सिंडिकेट का मुख्य केंद्र नईगढ़ी थाना बताया जा रहा है। थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर के कार्यकाल में यह खेल बढ़ा। मामला ऊपर तक पहुंचते ही प्रशासन ने सख्त कदम उठा लिया। जगदीश ठाकुर को तत्काल प्रभाव से थाने से हटा दिया गया है। उन्हें पुलिस लाइन भेजकर मामले की जांच के आदेश दिए हैं। 

न्याय व्यवस्था पर बड़ा खतरा

इस कांड से न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए। फर्जी गवाहों के दम पर केस की दिशा बदली जा सकती है। इससे असली अपराधियों को बचने का मौका मिल सकता है। कानून के साथ ऐसा खिलवाड़ न्याय व्यवस्था को कमजोर करता है। अब लोग दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। भविष्य में ऐसी धांधली रोकने के लिए नियमों का सख्त होना जरूरी हैं।

Sootr Alert

  • कानूनन पुलिस को मौके पर मौजूद किसी स्वतंत्र व्यक्ति को ही गवाह बनाना चाहिए।
  • कभी भी पुलिस के कहने पर किसी खाली कागज या बिना पढ़े गए पंचनामे पर हस्ताक्षर न करें।
  • यदि आप घटना के चश्मदीद नहीं हैं, तो दबाव में आकर झूठी गवाही देने के लिए कभी भी राजी न हों।
  • अदालत में गलत जानकारी देना भारी पड़ सकता है, इसके लिए आपको जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
  • गवाहों की जानकारी संदिग्ध लगने पर आप RTI के तहत स्पष्टीकरण मांग सकते हैं।

आगे क्या

हजारों मुकदमों की दोबारा कानूनी रूप से समीक्षा की जाएगी। फर्जी गवाहों वाले केस अदालत में कमजोर साबित हो सकते हैं। पुलिस विभाग में गवाहों के चयन पर सख्त गाइडलाइन आएगी। इस लापरवाही में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई होगी।

निष्कर्ष

रीवा की इस घटना ने पुलिस की साख पर बट्टा लगाया है। गवाही का ड्रामा करके न्याय को ठगने की कोशिश हुई है। तकनीक ने पुलिस के इस शॉर्टकट का पर्दाफाश कर दिया है। अब देखना है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या एक्शन होता है।

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