भोपाल में पाटीदार समाज का प्रदर्शन, जिहादी कहने वालों पर कार्रवाई की मांग

साध्वी रंजना विवाद में पाटीदार समाज ने 'जिहादी' शब्द के इस्तेमाल पर कड़ा ऐतराज जताया। समाज ने धर्म परिवर्तन की चेतावनी देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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Sanjay Dhiman
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Patidar community demonstration in Bhopal

Photograph: (the sootr)

News in Short

  • सड़क विवाद बना सामाजिक जंग: कार ओवरटेक करने की मामूली बहस ने अब बड़ा सामाजिक रूप ले लिया है।
  • 'जिहादी' शब्द पर भारी गुस्सा: पाटीदार समाज ने खुद को 'जिहादी' कहे जाने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
  • धर्म परिवर्तन की बड़ी चेतावनी: अपमान न रुकने पर समाज ने सामूहिक धर्म परिवर्तन करने की धमकी दी।
  • एकपक्षीय पुलिस कार्रवाई का आरोप: समाज का दावा है कि पुलिस ने दबाव में आकर झूठे केस दर्ज किए।
  • निष्पक्ष जांच और फुटेज मांग: सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सच्चाई सामने लाकर न्याय की मांग की गई। 

News in Detail

BHOPAL. भोपाल के मिसरोद इलाके में एक मामूली कार विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। 25 फरवरी को साध्वी रंजना दीदी की गाड़ी को ओवरटेक करने को लेकर एक विवाद शुरू हुआ था। देखते ही देखते यह झगड़ा इतना बढ़ गया कि पुलिस तक पहुंच गया। साध्वी पक्ष ने मारपीट और छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया।

लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई। पाटीदार समाज का आरोप है कि इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। समाज का कहना है कि उनके समाज के लड़कों को 'जिहादी' और 'अराजक तत्व' कहा जा रहा है। मंगलवार को मिसरोद के मांगलिक भवन में भारी संख्या में समाज के लोग जुटे और प्रर्दशन किया।

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'जिहादी' कहने पर नाराजगी

पाटीदार समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे हिंदू धर्म के रक्षक रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान अजय पाटीदार ने कहा कि अगर समाज के लोगों को इसी तरह 'जिहादी' कहकर अपमानित किया जाएगा तो वे खुद को हिंदू समाज का हिस्सा नहीं मानेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इंसाफ नहीं मिला, तो पूरा समाज सामूहिक धर्म परिवर्तन पर विचार कर सकता है।

इस बयान ने भोपाल के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। समाज का कहना है कि एक सड़क दुर्घटना या मामूली बहस को सांप्रदायिक रंग देना गलत है। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपमान नहीं सहेंगे।

पुलिस पर लगा एकपक्षीय कार्रवाई का आरोप

मिसरोद थाने में पाटीदार समाज के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। समाज का दावा है कि पुलिस ने दबाव में आकर केवल एक पक्ष की बात सुनी है। उनका कहना है कि 26 फरवरी को जो हुआ, वह केवल एक सड़क विवाद था। पुलिस ने इसे जान से मारने की कोशिश जैसी गंभीर धाराओं में बदल दिया।

समाज के लोगों ने मांग की है कि घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज निकाले जाएं। उनका मानना है कि कैमरे की रिकॉर्डिंग से पूरा मामला साफ हो जाएगा। समाज के प्रतिनिधि मंडल ने एसीपी को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

महिलाओं ने भी संभाली कमान, लगाए नारे

इस प्रदर्शन की खास बात यह थी कि इसमें पाटीदार समाज की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 'जय श्री राम' के नारों के साथ पूरा परिसर गूंज उठा। महिलाओं का कहना था कि वे शांति प्रिय लोग हैं, लेकिन उनके बेटों पर झूठे केस लादना गलत है। ओबीसी मोर्चा और सकल हिंदू समाज ने भी इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है।

प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

एक तरफ साध्वी रंजना पक्ष है, जिसे विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का समर्थन मिल रहा है। दूसरी तरफ पाटीदार समाज है, जो अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ रहा है। भोपाल पुलिस के लिए यह मामला अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने की एक बड़ी चुनौती बन गया है। अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो पाटीदार समाज ने इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाने की धमकी दी है।

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