सागर शराबकांड में देवड़ा घिरे, सिंघार-जोकचंद ने पूछा-किसे बचा रहा नेक्सस ?
Ramanand Tiwari | Sept 07, 2026, 21:20 IST
sagar-sharabkand-devda-nexus-sawal
सागर जहरीली शराबकांड में मौतों के बाद आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा विपक्ष के निशाने पर हैं। उमंग सिंघार ने आबकारी आयुक्त के सागर पहुंचने और डिस्टलरी नेटवर्क पर सवाल उठाए, जबकि श्यामलाल जोकचंद ने देवड़ा से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा मांगा।
ऐसे समझें पूरा मामला
- सागर में जहरीली शराब से 11 मौतों की खबर
- सिंघार ने शराब नेटवर्क पर गंभीर सवाल उठाए
- आबकारी आयुक्त के सागर पहुंचने पर सवाल
- जोकचंद ने देवड़ा से इस्तीफा मांग लिया
- डिस्टलरी मालिकों पर कार्रवाई को लेकर सवाल
मौतों के बाद फिर वही सवाल-जिम्मेदार कौन?
यही सवाल अब आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि हर शराबकांड के बाद जांच, कार्रवाई और कड़ी व्यवस्था के दावे होते हैं, लेकिन कुछ समय बाद पूरा मामला शांत पड़ जाता है।
सिंघार का सबसे बड़ा सवाल-आयुक्त किसे बचाने पहुंचे?
सिंघार ने यह भी सवाल उठाया कि जिला आबकारी अधिकारी और बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। डिस्टलरी मालिकों पर केस को लेकर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।
यूपी नहीं, एमपी में नेटवर्क का दावा
उन्होंने उज्जैन और धार में कथित रूप से जहरीली शराब तैयार होने और उसके सागर तक पहुंचने का आरोप लगाया। साथ ही उज्जैन के कथित शराब नेटवर्क की जांच और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट बयान की मांग की।
आदेश बदलने का आरोप भी बना बड़ा मुद्दा
अगर जांच में ऐसा बदलाव प्रमाणित होता है, तो यह गंभीर प्रशासनिक सवाल बन सकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।
जोकचंद ने देवड़ा से मांगा इस्तीफा
जोकचंद ने 25 जुलाई 2021 के मल्हारगढ़ जहरीली शराबकांड का हवाला देते हुए कहा कि उस घटना में कई गरीब परिवारों ने अपने सदस्य खोए थे। उनके मुताबिक तब भी कार्रवाई और सहायता के दावे हुए, लेकिन पीड़ित परिवारों के सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए।
उनका सीधा सवाल है-अगर आबकारी विभाग जहरीली शराब को रोकने में विफल रहा है, तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी कौन लेगा?
‘सरकार कंट्रोल करने में असफल’-विपक्ष का हमला
उन्होंने देवड़ा से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सिर्फ मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताना पर्याप्त नहीं है। जिम्मेदारी तय करना भी सरकार की जवाबदेही का हिस्सा है।
मुआवजे से बड़ा सवाल-नेटवर्क तक कौन पहुंचेगा?
लेकिन इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल मुआवजा नहीं, बल्कि वह कथित नेटवर्क है जिसके जरिए जहरीली शराब लोगों तक पहुंची। यदि विपक्ष के आरोपों में दम है तो जांच को केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित रखने के बजाय सप्लाई चेन, डिस्टलरी, लाइसेंसिंग और विभागीय निगरानी तक पहुंचना होगा।
सागर शराबकांड अब सिर्फ ‘किसे सस्पेंड किया’ की खबर नहीं रह गया है। विपक्ष ने सीधे आबकारी विभाग के कथित नेक्सस और डिस्टलरी नेटवर्क पर उंगली उठाई है। सबसे बड़ा सवाल यही है-आबकारी आयुक्त सागर पहुंचे तो कार्रवाई के लिए या उस सिस्टम को संभालने के लिए, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं? इसका जवाब जांच और सरकार की कार्रवाई से ही साफ होगा।
यह खबरें भी पढ़ें...
सागर शराब कांड : 22 से ज्यादा मौतें, सवालों के घेरे में सरकार और सिस्टम...
सागर शराब कांड: जीतू पटवारी का दावा 50 मौतें हुईं, बोले-SP को जेल भेजो
बॉम्बे और सागर गोल्ड शराब से हुईं मौतें! आबकारी विभाग की क्लीन चिट पर उठे सवाल
सागर शराब कांड : SP अनुराग सुजानिया के कार्यकाल में दूसरा बड़ा हादसा
सीकर में ASI ने पंचायती राज चुनाव लड़ने के लिए छोड़ी पुलिस की नौकरी, 13 साल सर्विस थी बाकी
By Ashish Bhardwaj
छत्तीसगढ़ में CAT की स्थायी बेंच बनाने की मांग, हाईकोर्ट ने केंद्र से 3 सप्ताह में मांगा जवाब
By Harrison Masih
पहले मंत्री विजयवर्गीय की बैठक में नहीं गईं विधायक मालिनी गौड़, फिर उनकी ही विधानसभा में उठाया पानी की किल्लत का मुद्दा
By Sanjay Gupta
Rajasthan School Exam: अब 25 नवंबर से 7 दिसंबर तक होंगी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं, CBA भी इसी अवधि में
By Jageshwar prasad
नर्सिंग ऑफिसर की हत्या कर मगरमच्छों वाली नदी में फेंका शव, लिव-इन पार्टनर ने रची साजिश, फिर दर्ज कराई गुमशुदगी
By Manya Jain
MP में गहराया बिजली का संकट: 17 हजार मेगावाट पार डिमांड, किसानों के सामने आई सिंचाई की परेशानी
By Manya Jain
मंत्री झाबर सिंह खर्रा की भाभी का टिकट भाजपा से कटा, बेटे ने पहले ही भर दिया था निर्दलीय पर्चा
By Ashish Bhardwaj