मंदिरों की लूट बंद हो, BJP विधायक चिंतामणि मालवीय ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग
Sandeep Kumar | Aug 19, 2026, 19:51 IST
विधायक चिंतामणि मालवीय
भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने मंदिरों के प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सरकारी नियंत्रण समाप्त करके सनातन बोर्ड बनाने का सुझाव दिया। बोर्ड से मंदिर संपत्ति, दान और जमीन की पारदर्शी निगरानी की मांग की गई है।
समझें क्या है पूरा मामला
- चिंतामणि मालवीय ने मंदिर संपत्ति पर विस्तृत वीडियो जारी किया।
- उन्होंने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग की।
- मंदिर प्रबंधन के लिए सनातन बोर्ड बनाने का सुझाव दिया।
- बोर्ड में सभी सामाजिक वर्गों की भागीदारी प्रस्तावित की।
- मंदिरों की आय शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च करने की बात कही।
मालवीय ने मंदिरों की जमीन और आय पर सवाल उठाए। उन्होंने मंदिरों के सरकारी प्रबंधन की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने मंदिरों के लिए सनातन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव रखा।
यह बोर्ड मंदिरों की संपत्ति और दान की निगरानी करेगा। मालवीय के अनुसार मंदिरों का नियंत्रण हिंदू समाज को लौटाना चाहिए। उनके प्रस्ताव में पारदर्शिता और सामाजिक भागीदारी पर जोर है।
दान से संपन्न हुए मंदिर
इससे कई मंदिर धीरे-धीरे बड़े धार्मिक केंद्र बन गए। ये मंदिर सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र भी रहे। मालवीय ने सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक उदाहरण भी दिया। उन्होंने 1026 में महमूद गजनवी के हमले का उल्लेख किया।
मंदिर की जमीन का रिकॉर्ड
मालवीय ने ओडिशा और तमिलनाडु की व्यवस्थाओं का उल्लेख किया। उन्होंने उन राज्यों जैसी स्पष्ट व्यवस्था बनाने की वकालत की। उन्होंने मॉडल का विस्तृत कानूनी प्रारूप पेश नहीं किया। इसलिए प्रस्ताव की व्यावहारिक संरचना अभी स्पष्ट नहीं है। राज्यवार मंदिर कानून और प्रबंधन व्यवस्था अलग हो सकती है। किसी राष्ट्रीय बोर्ड के लिए व्यापक कानूनी चर्चा जरूरी होगी।
सरकारी नियंत्रण पर सवाल
कई राज्यों में मंदिर प्रबंधन के लिए अलग कानून लागू हैं। कुछ मंदिर समितियों में सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी रहती है।
मालवीय ने इस व्यवस्था को बदलने का सुझाव दिया। उनके अनुसार मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं और समाज के पास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दान धार्मिक भावना से दिया जाता है। इसलिए इसका उपयोग संबंधित धार्मिक कार्यों में होना चाहिए।
कैसा होगा सनातन बोर्ड
प्रशासन हिंदू समाज के प्रतिनिधियों को सौंपने का सुझाव दिया। मालवीय ने परंपरागत पुजारी परिवारों की भूमिका सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने ऐसी व्यवस्थाओं के पंजीयन का सुझाव भी दिया। उनके अनुसार पूजा व्यवस्था परंपरा और शास्त्रों के अनुसार चलनी चाहिए। प्रशासन और पूजा को अलग-अलग समझना जरूरी है।
छोटे मंदिरों को मिले सहायता
सरकार का जवाब नहीं आया
ये भी पढ़ें...
एमपी में सरकारी कोचिंग का सच : स्कीम और बजट है, लेकिन 3 साल से क्लासेस नहीं
सरकार समय पर पेमेंट नहीं करती, इसलिए महंगा पड़ा गुड़ खरीदना
एमपी में सरकारी कोचिंग का सच : स्कीम और बजट है, लेकिन 3 साल से क्लासेस नहीं
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava