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INDORE. आरक्षण को लेकर ब्राह्मण पर विवादित बयान देने वाले अजाक्स के प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका आईएएस अवार्ड खतरे में आ गया है। आरोप है कि वर्मा ने आईएएस अवार्ड और पदोन्नति बचाने के लिए फर्जी आदेश बनवाया है। इस आदेश में इंदौर में एक महिला अपराध केस का झूठा निराकरण दिखाया गया है।
इसी मामले में अब इंदौर हाईकोर्ट ने पुलिस को कोर्ट से दस्तावेज लेकर आगे जांच करने की प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। प्रशासनिक मंजूरी की पुष्टि जांच अधिकारी एसपी विनोद दीक्षित ने द सूत्र को की है। इसमें कहा गया है कि कोर्ट से सभी दस्तावेज लेकर जांच की जाएगी। इस मामले में प्रमोटी आईएएस संतोष वर्मा पर कोर्ट में चार्ज फ्रेम होना है।
वर्मा पर केस कराने वाले जज निलंबित
आईएएस संतोष वर्मा पर कोर्ट का फर्जी आदेश बनाने का आरोप है। इंदौर कोर्ट में पदस्थ तत्कालीन विशेष जज विजयेंद्र सिंह रावत के आवेदन पर एमजी रोड थाने में केस हुआ था। हाल ही में जज रावत को निलंबित करने के आदेश हुए हैं। रावत को शहडोल जिले की बुराड़ नामक जगह भेजा गया है। निलंबन अवधि में दोनों का मुख्यालय उक्त कोर्ट रहेगा।
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वर्मा पर एक युवती ने आरोप लगाए थे
प्रशासनिक अधिकारी संतोष वर्मा पर एक युवती ने आरोप लगाए थे। इस केस के चलते उनके पदोन्नत होकर आईएएस बनने की राह में रोड़ा आ गया था। आरोप है कि इस मामले में बरी होने का फर्जी आदेश पारित कराया था। निलंबन आदेश के तहत जज रावत को शहडोल जिले की बुराड़ नामक जगह भेजा गया।
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जज रावत ने थाने में यह कराई थी शिकायत
एमजी रोड थाने में 27 जून 2021 को यह फर्जी कोर्ट आदेश बनाने का केस हुआ था। इसमें अज्ञात आरोपी पर आईपीसी धारा 120बी, 420, 467, 468, 471 व 472 में केस हुआ था। अपराध होने का समय 6 अक्टूबर 2020 बताया गया था। थाने में जज विजयेंद्र सिंह रावत द्वारा केस दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया था।
आवेदन में जज रावत ने कहा कि लसूडिया थाने में संतोष वर्मा पर एफआईआर दर्ज है। यह एफआईआर संख्या 851/2016 है, जिसमें धारा 323, 294 और 506 लगाई गई है। इस मामले में केस 1621/2019 चल रहा है। यह केस पहले दूसरे कोर्ट में था, फिर 3 अक्टूबर 2020 को मेरी कोर्ट में आ गया था। सुनवाई के लिए 23 नवंबर 2020 की तारीख तय हुई थी। इसके बाद साक्ष्य के लिए 22 फरवरी 2021 को तारीख तय की गई थी। फिर अगली तारीख 31 मई 2021 को रखी गई थी।
इस मामले में मेरी कोर्ट के जरिए 6 अक्टूबर 2020 को कोई आदेश पारित नहीं किया गया था। कोर्ट की डायरी व सीआईएस में इस दिन का कोई रिकॉर्ड नहीं है। ना ही इस दिन मेरे हस्ताक्षर से कोई निर्णय हुआ है। मेरी पत्नी बीमार है, इसलिए इस दिन 6 अक्टूबर को मैं अवकाश पर था।
जिला अभियोजन अधिकारी अकरम शेख ने कोर्ट में आकर बताया कि केस में समझौता हो गया है। उन्होंने बताया कि इस आधार पर निर्णय लिया गया और इसकी स्कैन कॉपी है। उस कॉपी में 6 अक्टूबर की तारीख लिखी थी। कोर्ट की सील लगी थी, लेकिन हस्ताक्षर अपठनीय थे। हालांकि, मैंने उस दिन कोई आदेश नहीं दिया था। यह फैसला कूटरचित तरीके से तैयार किया गया है।
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वर्मा पर महिला ने क्या लगाए हैं आरोप
18 नवंबर 2016 को एक महिला ने संतोष वर्मा पिता रूमाल सिंह वर्मा के खिलाफ लसूडिया थाना इंदौर में केस दर्ज कराया था। यह केस नंबर 851/2016 है और इसमें आईपीसी की धारा 493, 494, 495, 323, 294 और 506 शामिल हैं। उस समय वर्मा उज्जैन में अपर कलेक्टर के पद पर थे। महिला ने बताया कि वह 2010 से वर्मा को जानती थी। मेल-जोल के दौरान वर्मा ने उसे शादी का प्रस्ताव दिया। इसके बाद दोनों ने चुपचाप रिद्धिनाथ मंदिर, हण्डिया जिला धार में शादी कर ली।
पूर्व में वह शादीशुदा थे। पत्नी की तरह चुपचाप रखा। शारीरिक संबंध बनाए। जैसे ही पूर्व में शादीशुदा होने की बात चली और विरोध किया तो वर्मा ने मारपीट शुरू कर दी। बीते तीन सालों से इंदौर में एक टाउनशिप में उनके साथ रह रही है। बीच में गर्भवती हुई तो वर्मा ने दबाव डालकर दो बार अबॉर्शन कराया था।
बालाघाट पोस्टिंग के दौरान सरकारी बंगले पर भी पांच माह रखा था। वह अलग-अलग जगह पदस्थ रहे। बालाघाट में अपर कलेक्टर पद पर पदोन्नत हुए, फिर सीहोर एडीएम बने थे। इसके बाद राजगढ़ में सीईओ जिला पंचायत और इसके बाद उज्जैन अपर कलेक्टर हैं। मुझसे धोखाधड़ी करते हुए शादी की गई।
वर्मा के समर्थन में JAYS ने निकाली रैली
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चौतरफा घिरे वर्मा को अब जयस की ओर से राहत मिली है। उनके समर्थन में आदिवासी संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) खुलकर सामने आ गया है। जयस ने इंदौर में उनके समर्थन में प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। वहीं, आज इंदौर में जयस ने आईएएस संतोष वर्मा के समर्थन में रैली भी निकाली है।
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जयस की यह मांग
1.IAS संतोष वर्मा को जारी नोटिस वापस लिया जाए।
2.संतोष वर्मा को धमकियां देने वालों पर FIR दर्ज की जाए।
3. मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने आरक्षित वर्ग SC,ST,OBC को कुत्ता, गधा, मक्खी, कौवा कहकर अपमानित करने पर एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाए।
4. संविधान व डॉ भीमराब अंबेडकर का अपमान करने वाले अनिल मिश्रा पर FIR दर्ज की जाए।
5. प्रदेश में सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था बनाए रखने की ठोस कार्रवाई की जाए। जयस ने कहा कि आरक्षित वर्ग के अधिकारियों कर्मचारियों पर अनावश्यक कार्रवाई नहीं करने देंगे।
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