सीहोर का व्यवसायी ब्रिटिश सरकार को भेजेगा कानूनी नोटिस: 1917 का 35 हजार का कर्ज अब बनेगा करोड़ों का हिसाब

Sanjay Dhiman | Feb 23, 2026, 23:36 IST
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Sehores Vivek Ruthia will send legal notice to British government
Photograph: (the sootr)

सीहोर के एक व्यवसायी ने दावा किया कि उनके दादा ने 1917 में ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपए का कर्ज दिया था, जो आज तक चुकाया नहीं गया। वे अब कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

News in Short

  • सीहोर के विवेक रूठिया ब्रिटिश सरकार को कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
  • उनके दादा सेठ जुम्मा लाल ने 1917 में अंग्रेजों को कर्ज दिया था।
  • 35 हजार रुपए का यह कर्ज भोपाल रियासत के प्रशासनिक कामकाज हेतु लिया गया।
  • विवेक के पास इस लेन-देन के 109 साल पुराने पुख्ता ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हैं।
  • आज के हिसाब से ब्याज जोड़कर यह कर्ज करोड़ों की भारी-भरकम राशि बनती है।

News in Detail

SEHORE. सीहोर जिले के विवेक रूठिया ने एक ऐसा दावा किया है, जिसे जानकर हर कोई चौंक जाएगा। उनका कहना है कि उनके दादा, सेठ जुम्मा लाल रूठिया, ने 1917 में ब्रिटिश सरकार को 35 हजार रुपए का कर्ज दिया था। यह कर्ज भोपाल रियासत के प्रशासनिक प्रबंधन को ठीक से चलाने के लिए लिया गया था। आज 109 साल बाद भी इस कर्ज का भुगतान नहीं किया गया है। अब विवेक रूठिया कर्ज वसूली के लिए ब्रिटिश सरकार को कानूनी नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

रूठिया का कहना है कि उनके पास उस लेन-देन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं।
रूठिया का कहना है कि उनके पास उस लेन-देन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध हैं।


दादा ने किस कारण दिया था कर्ज?

1917 में सेठ जुम्मा लाल रूठिया ने 35 हजार रुपए का कर्ज दिया था, जब ब्रिटिश सरकार और भोपाल रियासत के बीच प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए धन की आवश्यकता थी। वह समय भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जब ब्रिटिश सरकार ने भारत में अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कई तरह के समझौते किए थे। इन समझौतों के तहत, सेठ जुम्मा लाल को यह कर्ज दिया गया।

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स्वतंत्रता के बाद भी नहीं चुकाया गया कर्ज

स्वतंत्रता के बाद, ब्रिटिश शासन भारत से चला गया, लेकिन सेठ जुम्मा लाल का यह कर्ज आज तक नहीं चुकाया गया। परिवार के सदस्य इसे लेकर कई बार अधिकारियों से संपर्क कर चुके हैं, लेकिन कर्ज की अदायगी नहीं हो पाई। अब विवेक रूठिया इस मामले को कानूनी रूप से हल करने की कोशिश कर रहे हैं।

कानूनी दस्तावेज और साक्ष्य

विवेक रूठिया के पास उन दिनों के कर्ज संबंधी सभी दस्तावेज मौजूद हैं। यह दस्तावेज उन्हें उनके दादा की पारिवारिक वसीयत के तहत प्राप्त हुए हैं। 1937 में सेठ जुम्मा लाल का निधन हो गया था, लेकिन उनका कर्ज आज भी लंबित है। उनका कहना है कि अगर उस समय की सोने की कीमत और आज की कीमत का हिसाब लगाया जाए, तो यह कर्ज कई करोड़ों रुपए के बराबर बनता है।

अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला

विवेक रूठिया का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, कोई भी संप्रभु राष्ट्र पूर्व में दिए गए कर्ज के भुगतान के लिए बाध्य होता है। ब्रिटिश सरकार को इसी आधार पर कानूनी नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उनका मानना है कि यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि ऐतिहासिक भी है, और यह पूरे देश में एक उदाहरण बन सकता है।

विवेक की कानूनी तैयारी

विवेक रूठिया के अनुसार, इस मामले की कानूनी प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। वे दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं और ब्रिटिश सरकार को नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं। इस मामले को लेकर उनकी उम्मीदें हैं कि न्याय मिलने तक वे इस लड़ाई को जारी रखेंगे।

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