ढाई हजार ईंट का बिल सवा लाखः शहडोल में सरपंच-सचिव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

शहडोल में सरकारी पैसों के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। आंगनबाड़ी निर्माण के लिए 2500 ईंटों का बिल 1.25 लाख रुपए में पास किया गया। इसके साथ ही स्कूलों के पेंटिंग कार्य में भी भारी घोटाले की पुष्टि हुई। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं।

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Sandeep Kumar
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शहडोल में ईंटों की खरीददारी में भारी घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए खरीदी गई 2500 ईंटों का भुगतान 1.25 लाख रुपए किया गया, जबकि 2.5 हजार ईंटों का बिल 12,500 रुपए बनता है। मामले को गर्माता देखकर कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।  

इससे पहले शहडोल के कुदरी ग्राम पंचायत में 2 पन्नों की फोटोकॉपी के लिए 4000 का बिल पास किया गया था। इसमें भी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था।

वहीं इसी जिले के हाई स्कूल सकंदी में केवल 4 लीटर पेंट के लिए 168 मजदूरों और 65 मिस्त्रियों को काम पर लगाया गया था। इस काम के लिए मजदूरों को 1,06,984 रुपए का भुगतान किया गया था। शहडोल जिले में इस तरह के भ्रष्टाचार का ये चौथा मामला सामने आया है।

2500 ईंटों का 1.25 लाख रुपए का बिल

शहडोल जिले की ग्राम पंचायत भटिया में आंगनबाड़ी निर्माण के लिए खरीदी गई 2500 ईंट का बिल 1.25 लाख रुपए किया गया। जबकि 2.5 हजार ईंटों की असल कीमत सिर्फ 12,500 रुपए है। यह असमानता न केवल सरकारी खजाने के दुरुपयोग को दर्शाती है, बल्कि एक गंभीर भ्रष्टाचार का संकेत भी है। बिल पर सरपंच और सचिव दोनों के हस्ताक्षर थे, जिसने मामले को और जटिल बना दिया।

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बिल की असल कीमत

स्थानीय ईंट कारोबारी लालन मिश्रा ने इस पर आपत्ति जताई और बताया कि जिले में ईंटों की कीमत 4 से 10 रुपए प्रति ईंट के बीच है। इस हिसाब से, 2500 ईंटों का बिल 12,500 से अधिक नहीं बनता, जबकि इसे 1,25,000 में पास किया गया है।

कलेक्टर की प्रतिक्रिया

कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने इस मामले को गंभीरता से लिया और एसडीएम को जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि अगर भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी पैसों का गलत इस्तेमाल 

शहडोल जिले में हाल ही में सरकारी पैसों के दुरुपयोग के कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। इन मामलों में सरकारी बिलों में गड़बड़ियों की पुष्टि हुई है, जिनमें अत्यधिक रकम का भुगतान किया गया है। यह घटना न केवल सरकारी कामकाजी प्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

13 किलो ड्राईफ्रूट के लिए 19,010 रुपए का भुगतान

25 मई को भदवाही ग्राम पंचायत में जल गंगा संवर्धन अभियान का जिला स्तरीय कार्यक्रम हुआ था। इस कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह, जिला पंचायत सीईओ नरेंद्र सिंह, एसडीएम प्रगति वर्मा और अन्य अधिकारी शामिल हुए थे। अफसरों के लिए ग्राम पंचायत ने टेंट, भोजन और नाश्ते की व्यवस्था की थी।

कार्यक्रम के दौरान अफसरों ने एक घंटे में 14 किलो ड्राईफ्रूट खा लिया। इसके अलावा 6 लीटर दूध में 5 किलो शक्कर डालकर चाय बनाई गई। जिला पंचायत के प्रभारी सीईओ एमपी सिंह ने कहा कि उन्होंने आयोजन में हिस्सा लिया था, लेकिन वहां इतना ड्राईफ्रूट नहीं था। बिल की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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ग्राम पंचायत ने अफसरों के स्वागत में 13 किलो ड्राईफ्रूट के लिए 19,010 रुपए का भुगतान किया। इस राशि में 5 किलो काजू, 6 किलो बादाम और 3 किलो किशमिश शामिल हैं। अफसरों को चाय पिलाने के लिए 6 लीटर दूध और 5 किलो शक्कर खरीदी गई। इसके अलावा 30 किलो नमकीन, 20 पैकेट बिस्कुट, 5 किलो शक्कर और 6 किलो दूध पर भी 19,010 रुपए खर्च किए गए।

2 पन्नों की फोटोकॉपी के लिए 4000 रुपए का बिल 

शहडोल जिले के जयसिंह नगर जनपद पंचायत के कुदरी ग्राम पंचायत में 2 पन्नों की फोटोकॉपी के लिए ₹4000 का बिल पास किया गया। यह रकम अत्यधिक और अवास्तविक प्रतीत होती है।

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सोशल मीडिया पर मामला वायरल

बिलों का वायरल होना सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। जिला पंचायत के प्रभारी सीईओ एमपी सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं और कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग में घोटाला

शहडोल जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक और घोटाला सामने आया है। ब्यौहारी के सरकारी स्कूलों में पेंटिंग के लिए अत्यधिक रकम का भुगतान किया गया।

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पेंटिंग के लिए किए गए अव्यावहारिक भुगतान

हाई स्कूल सकंदी में केवल 4 लीटर पेंट के लिए 168 मजदूरों और 65 मिस्त्रियों को काम पर लगाया गया, और इन मजदूरों को 1 लाख 6 हजार 984 का भुगतान किया गया। 

दूसरी ओर, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निपानिया में 20 लीटर पेंट के लिए 275 मजदूरों और 150 मिस्त्रियों को काम पर लगाया गया और 2 लाख 31 हजार 650 का भुगतान किया गया। इन दोनों बिलों में एक ही ठेकेदार सुधाकर कंस्ट्रक्शन का नाम सामने आया।

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